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मैं इप्टा की सदस्य नहीं हूँ, मेरे माता-पिता इप्टा में थे

: बिहार इप्टा का 14वां राज्य सम्मेलन : फासिस्टवादी फिरकापरस्त ताकतों से मानवता की रक्षा करने का आवाह्न : सहरसा के एमएलटी महाविधालय के मैदान में रंगकर्मियों का बेहतरीन जमावड़ा ‘इप्टा के 14 वें राज्य सम्मेलन’ में दिखा। देश के विभिन्न हिस्से से आये रंगमंच   के नामचीन शख्सियतों का यह समागम कोसी इलाके के लिए ऐतिहासिक था। तीन दिनों (25, 26, और 27 नवम्बर) तक चलने वाला यह सम्मेलन फैज, नगार्जुन और शमशेर की विरासत को समर्पित रहा।

: बिहार इप्टा का 14वां राज्य सम्मेलन : फासिस्टवादी फिरकापरस्त ताकतों से मानवता की रक्षा करने का आवाह्न : सहरसा के एमएलटी महाविधालय के मैदान में रंगकर्मियों का बेहतरीन जमावड़ा ‘इप्टा के 14 वें राज्य सम्मेलन’ में दिखा। देश के विभिन्न हिस्से से आये रंगमंच   के नामचीन शख्सियतों का यह समागम कोसी इलाके के लिए ऐतिहासिक था। तीन दिनों (25, 26, और 27 नवम्बर) तक चलने वाला यह सम्मेलन फैज, नगार्जुन और शमशेर की विरासत को समर्पित रहा।

इस सम्मेलन में रंग जगत के चर्चित चेहरे से रू-ब-रू होने का मौका यहाँ के लोगों को मिला। सुप्रसिद्ध रंगकर्मी कीर्ति जैन, प्रवीर गुहा, तनवीर अख्तर, राजेन्द्र राजन (महासचिव बिहार प्रलेस), उदय नारायण सिंह, विनोद कुमार, अनिल पतंग आदि की उपस्थिति ने सम्मेलन को सम्मेलन यादगार बना दिया। दिल्ली से आई एनएसडी की पूर्व निदेशक कीर्ति जैन ने उद्घाटन भाषण में कहाकि – मैं इप्टा की सदस्य नहीं हूँ,  मेरे माता-पिता इप्टा में थे। रेखा जैन व नेमीचन्द्र जैन से मुझे यह विरासत में मिला। अतः इप्टा मेरी खून में है। यह अकेली संस्था है जो देश को नई दिशा, नई सोच और नई दृष्टि दे रही है।  इससे पहले उदय नारायण सिंह (प्रतिकुलपति- विश्वभारती विश्ववि. शांति निकेतन) ने नाटक का उदेश्य और विकास यात्रा को रेखांकित करते हुए कहाकि गांव से शहर तक इप्टा का यह सांस्कृतिक आन्दोलन चलते रहना चाहिए।

प्रसिद्ध रंगकर्मी एवं राज्य इप्टा के महासचिव तनवीर अख्तर ने आवाम की पूरी आवाज को अपने नाटक में रखने की बात कही तथा हर गांव में रंगशाला हो, इसके लिए इप्टा 3 अप्रैल से आंदोलन करेगी। बिहार प्रगतिशील लेखक संघ के महासचिव  राजेन्द्र राजन ने इप्टा के गठन और आजादी के दिनों और आज भी सामंती शक्तियों के खिलाफ इसकी संघर्ष गाथा को रेखांकित किया। उन्होंने मानवता की हिफाजत के लिए इप्टा के प्रयासों की सराहना की। रंगकर्मी विनोद कुमार ने भ्रष्टाचार के मुद्दे को व्यापक परिप्रेक्ष्य में देखने की जरूरत बतायी।

पेशे से पत्रकार जीतेन्द्र ने पिछले दिनों फारबिसगंज में पुलिसिया जुल्म के विरूद्ध एक प्रस्ताव रखा उन्होंने इस कांड पर मीडिया की चुप्पी पर भी सवाल उठाया। कोलकते से आये चर्चित रंगकर्मी प्रवीर गुहा ने रंगमंच से अपने गहरे ताल्लुकात का जिक्र करते हुए दिवंगत बादल सरकार को स्मरण व नमन किया। उन्होंने कहा कि ‘बादल दा से मैंने बहुत सीखा’। अध्यक्ष मंडल की ओर से वक्तव्य देते हुए डा. यतीन्द्र नाथ सिंह ने आजादी के दिनों में हम सक्रिय थे हम आज भी सक्रिय हैं क्योकि इप्टा एक आन्दोलन का नाम है जो अनवरत चलता रहेगा।

श्रमिक आन्दोलन से जुड़े ओमप्रकाश जी ने इप्टा के जनगीतों की प्रासंगिगता एवं जनआन्दोलन में इप्टा की भूमिका को अपने ओजपूर्ण वक्तव्य से दर्शक एवं श्रोताओं को अह्लादित कर दिया। अजय सिंह ने कहाकि बिहार की धरती राह दिखाती है। इस धरती ने गौतम बुद्ध और महात्मा गांधी को मार्ग दिखाया। मैं इतिहासकार डा. रामशरण शर्मा का छात्र रहा हूँ और रंगकर्म अभिव्यक्ति का एक सशक्त माध्यम है। हरिहर प्रसाद गुप्ता ने कहाकि यह संस्था सच्चाई से जुड़ा हम रंगमंच के माध्यम से जन-जन को जाग्रत करते हैं।

सम्मेलन में प्रसिद्ध गायक व निदेशक सीताराम सिंह एवं उनकी मंडली द्वारा फै़ज, नागार्जुन एवं शमशेर की कविताओं का सस्वर गायन से उपस्थित रंगकमी झूम उठे। कार्यक्रम का संचालन युवा रंगकर्मी फिरोज अशरफ ने किया। उक्त कार्यक्रम के पूर्व इप्टा के प्रांतीय अध्यक्ष समी अहमद ने झंडोतोलन किया तथा रंगकर्मियों ने नगर में सांस्कृतिक रैली निकाली रैली में झूमते -गाते रंगकर्मियों ने शहरवासियों का आकर्षित किया। इस रैली के साथ ही सहरसा में तीन दिनों तक चलने वाले इप्टा के 14वें राज्य सम्मेलन सह नाट्य महोत्सव का आगाज हुआ।

अरविन्द श्रीवास्तव (09431080862) की रिपोर्ट

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