आकाशवाणी दिल्ली का अत्यंत लोकप्रिय ऍफ़ एम गोल्ड चैनल पिछले दो वर्षों से विवादों के घेरे में रहा है. फिर चाहे वह कार्यक्रम प्रस्तोताओं के पारिश्रमिक में भारी विलम्ब का मामला हो, कार्यक्रम अधिशासियों के तानाशाही पूर्ण रवैये का मसला हो या फिर एक बड़े घोटाले के तौर पर देखा जाने वाला ऍफ़ एम गोल्ड की फ्रीक्वेंसी बदले जाने का विवाद हो. हालांकि ये सभी मामले मीडिया की सुर्खियाँ बनने के चलते समय रहते सुलझा लिए गए मगर कार्यक्रम प्रस्तोताओं की कई गंभीर समस्याएं ज्यों की त्यों बनी रहीं.
गौरतलब है कि इसी वर्ष जनवरी-फरवरी माह में चैनल के प्रस्तोताओं ने शिकायत और सुझावों से भरे पत्र आकाशवाणी महानिदेशक नौरीन नक़वी तथा प्रसार भारती बोर्ड के सदस्यों वी.शिवकुमार और ए. के. जैन को सौंपे थे मगर उन पर कोई संतोषजनक कार्रवाई नहीं हुई. आहत प्रस्तोताओं ने ड्यूटी, पारिश्रमिक, अनावश्यक स्वरपरीक्षाओं, पहचान पत्र, पुराने उपकरणों और उनको नियमित या लम्बी अवधी के करार पर नियुक्त किये जाने जैसे मुद्दों को लेकर एक और पत्र तैयार किया और उसे सूचना एवं प्रसारण मंत्री अम्बिका सोनी के कार्यालय में दिया, साथ ही इन्हीं शिकायतों और सुझावों से युक्त एक पत्र सीईओ प्रसार भरती के कार्यालय में भी सौंपा.
हालांकि सीईओ कार्यालय का स्टाफ उन्हें टरकाने का काम करता रहा मगर सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से उन्हें (मंत्री से मिलने का समय तो नहीं मिला) लेकिन उनकी मांगों पर उचित कार्रवाई का आश्वासन ज़रूर मिला. नतीजतन 25 नवम्बर 2011 को समझा जाता है कि मंत्रालय के दबाव में आकाशवाणी महानिदेशक लीलाधर मंडलोई ने प्रस्तोताओं को मीटिंग के लिए बुलाया. मगर मीटिंग में महानिदेशक के बर्ताव ने उन्हें संशय की स्थिति में डाल दिया है.
मीटिंग की शुरुआत के दस मिनट मंडलोई ने आत्म प्रशंसा में खर्च किए और शेष पैंतालीस मिनट प्रस्तोताओं को अकुशल बताकर उनकी खिल्ली उड़ाने में बिताए. प्रस्तोताओं के मुताबिक़ मंडलोई ने उनसे बार-बार कहा कि आपका प्रस्तुतीकरण निराशाजनक है, आपके काम में कहीं भी परिश्रम नज़र नहीं आता, आपको उर्दू भाषा के नुक़तों का ज्ञान नहीं है और आपका उच्चारण दोषपूर्ण है. मज़े की बात यह है कि एक ज़माने में आकस्मिक उद्घोषक के तौर पर अपना करियर शुरू करने वाले मंडलोई के खुद के भाषण में नुक़ते अक्सर नदारद रहे और वे बारम्बार जाने माने ब्रोडकास्टर अमीन सायानी का नाम अमीन शियानी उच्चारित करते रहे. मंडलोई प्रस्तोताओं को मिली कमज़ोर ट्रेनिंग पर भी चिंता जताते रहे मगर शायद उन्हें इस बात का भान नहीं रहा कि आकाशवाणी अपने प्रस्तोताओं को तैयार करने के लिए कोई ठोस ट्रेनिंग नहीं देती सिवाय वानी नाम की छोटी सी ट्रेनिंग के, जिसका उद्देश्य प्रस्तोताओं से मोटी फीस डकारना ही होता है.
आखिरकार मंडलोई की बातों से आजिज़ आ चुके प्रस्तोताओं ने सभ्यता के साथ ड्यूटी, पारिश्रमिक, पहचान पत्र, उपकरणों और रात की ड्यूटी करने वाली महिला प्रस्तोताओं की सुरक्षा से सम्बंधित मुद्दे उठाए, जिस पर मंडलोई ने सलाह दी कि उन्हें विषम परिस्थितियों में काम करने की आदत डालनी चाहिए. और जब प्रस्तोताओं ने उन्हें नियमित किए जाने या लम्बी अवधि के करार पर रखे जाने की मांग की तब मंडलोई ने धमकी भरे अंदाज़ में उनसे कहा कि अगर वो ऎसी मांग उठा रहे हैं तो उन्हें एक निर्मम छंटनी की कार्रवाई के लिए तैयार रहना चाहिए. अब प्रस्तोता इस बात को लेकर चिंतित हैं कि कल को उनकी मांगों को मानने की आड़ लेकर उन्हें आकाशवाणी से ही चलता करने के इंतजाम न किए जा रहे हों. गौरतलब है कि ये सब वही प्रस्तोता है जो ऍफ़ एम गोल्ड चैनल को लोकप्रियता की आज की ऊँचाइयों पर लेकर आए हैं.





