मस्तराम और मंटो मे फर्क है , दोनों के पाठकों में भी – यदि INDIA TODAY ऐसे कवर छापेगा तो मंटो की कहानियों के कवर कैसे होने चाहिए?? इस पत्रिका का स्तर दिनों दिन गिर रहा है, कोई गंदी मछली इस पत्रिका को पतन की और ले जा रही है। कोई मनोविकृत प्राणी है जो गंदगी फैला रहा है…

कल के दिन कमाटीपुरा पर STORY लिखेंगे , किसकी दुकान अच्छी चल रही है, किसकी बोहनी नहीं हुई, कौन सी वर्कर कौन सा साबुन लगाती है, कौन ब्यूटी पार्लर जाती है ॥ किसकी तबीयत खराब है, किसको कौन सा सीरियल पसंद है… और बन गया "ताज़ा अंक" ॥ क्या पाठक वास्तव में यही पढ़ना चाहते हैं, या उनको जान बूझकर पढ़ाया जा रहा है… पतन है…
किसी "दलित" महिला का नंगा बदन अपने कवर पर छापकर INDIA TODAY क्या साबित करना चाहता है ??
बहुत ही घटिया लोग पहुँच गए हैं INDIA TODAY की टीम में… अब इसको छिपाकर पढ़ना पड़ता है… अब शायद आम पाठकों के लिए नहीं रही यह मैग्जीन… कभी इस पत्रिका को पढ़ने के लिए लोग इंतज़ार करते थे… मेरा तो एक साल का पैसा जमा है इसलिए साल भर इसे भोगेंगे… INDIA TODAY को श्रद्धांजलि
स्वप्निल जैन के फेसबुक वॉल से साभार.






