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प्रिय उमाशंकर जी, आप अच्छे आदमी हो सकते हैं, पर एनडीटीवी एक भ्रष्ट कंपनी है

Nikhil Bhusan : एनडीटीवी इंडिया के बड़े सम्मानित पत्रकार हैं श्री उमाशंकर सिंह। अभी तुरंत उन्होंने मुझे ब्लाक कर दिया। पूरा मसला है यह कि उन्होंने अरविंद केजरीवाल पर एक पोस्ट लिखी। जिसके जवाब मैने भी कुछ प्रश्न पूछ डाले। जिसके बाद उन्होंने मुझे चंगू कहते हुए ब्लाक कर डाला। घटनाक्रम विस्तार से उमा जी केजरीवाल पर लिखा स्टेटसः 

Nikhil Bhusan : एनडीटीवी इंडिया के बड़े सम्मानित पत्रकार हैं श्री उमाशंकर सिंह। अभी तुरंत उन्होंने मुझे ब्लाक कर दिया। पूरा मसला है यह कि उन्होंने अरविंद केजरीवाल पर एक पोस्ट लिखी। जिसके जवाब मैने भी कुछ प्रश्न पूछ डाले। जिसके बाद उन्होंने मुझे चंगू कहते हुए ब्लाक कर डाला। घटनाक्रम विस्तार से उमा जी केजरीवाल पर लिखा स्टेटसः 

''अरविंद केजरीवाल ने दो महीने पहले एक पंक्ति का आरोप लगाया था कि इंडिया बुल्स में बड़े लोगों के पैसे लगें हैं और वे जल्द ही इसका ख़ुलासा करेंगे। लेकिन इस मामले में उनकी चुप्पी लंबी होती जा रही है। इससे शक पैदा होना लाज़िमी है कि कहीं उन्हें इस मामले में अपना मुंह बंद रखने के लिए मोटा माल तो नहीं मिल गया है? आरोप क्या इंडिया बुल्स पर सिर्फ दबाव बनाने के लिए लगाया गया था? (ज्ञात हो कि आरोप लगने के अगले ही दिन इंडिया बुल्स का शेयर 10 फीसदी तक गिर गया था।) कहीं ये गुपचुप तरीक़े से चुनावी चंदा जुटाने का तरीक़ा भर तो नहीं था? अगर यहां जताए गए शक और सवाल ग़लत हैं तो केजरीवाल को इस मामले में तुरंत अपनी बात रखनी चाहिए। आख़िर इस बाबत वो कब अपना खुलासा करेंगे?'' 

इसके जवाब में मैंने उमा जी को तीन चार टिप्पणी भेजी। पहले मैंने उन्हें एक लिंक दिया और पूछा इस मसले पर आपके क्या सुविचार हैं। दूसरी बात मैंने उनसे पूछी कि संडे गार्जियन ने शेयर घोटाला छापा था जो एनडीटीवी ने आईसीआईसीआई बैंक के साथ मिलकर किया था, उस पर आपकी क्या राय है और क्या आप 2009-10 वित्त वर्ष में एनडीटीवी की बैलेंस सीट पर उठाए गए प्रश्नों का उत्तर दे सकते हैं।  तीसरी बात उनका व्यवहार शुरू से ही अन्ना या अरविंद के प्रति आलोचनात्मक नहीं बल्कि विरोधी सा रहा है। तो मैंने उनके पिछली कुछ टिप्पणियों को पोस्ट किया। 

पहलाः अन्ना की तथाकथित अगस्त क्रांति से लेकर अब तक किसी सरकारी दफ्तर में भ्रष्टाचार के खिलाफ विद्रोह की कोई कोंपल नहीं फूटी… लेकिन अन्ना अनशन पार्ट थ्री के लिए कमर कस चुके हैं। सांकेतिक धरना 11 दिसंबर 'संडे'को होगा ताकि भ्रष्टाचार के खिलाफ फैशन शो में ज़्यादा से ज़्यादा लोग जुटें! आपका भी इंतज़ार रहेगा। 

दूसराः मैं शहर को दो हिस्सों में बंटा देख रहा हूं। एक जहां टीवी कैमरे हैं और दूसरा जहां टीवी कैमरे नहीं हैं। टीवी कैमरों वाले हिस्से में आंदोलन हो रहा है। जहां टीवी कैमरे नहीं हैं वहां ज़िंदगी अपनी रफ्तार से चल रही है। शहर का यही हिस्सा जन आंदोलन की थ्योरी को अभी तक नकार रहा है। 

तीसराः आम आदमी के चेहरे पर लिखा होता है कि वो आम आदमी है। उसे टोपी पहन अपनी ब्रांडिंग की ज़रूरत नहीं होती। 

इसके बाद मैंने उनसे पूछा कि आपको तो अन्ना का आंदोलन फैशन शो लगता था, आप समय की चाल और जनता के नब्ज को नहीं भाप पाएं। जब मैंने इतना लिख दिया तो भद्रलोक के प्राणी श्री उमा जी ने ये कमेंट लिखाः ''कई चंगू बिलबिला गए हैं। लेकिन उनके उकसावे में नहीं आउंगा। अपने सवाल पर क़ायम हूं। किसी के पास उसका जवाब है तो दे। ख़ामख्वाह मेरे वॉल पर जगह खा कर मशहूर होने की कोशिश न करे।'' 

अब कोई मुझे समझाएं जब एक पत्रकार होने के नाते उमा जी केजरीवाल पर सवाल कर सकते हैं तो मैं क्यों नहीं उनके कंपनी एवं सहयोगी पर सवाल उठा सकता हूं। उमा जी से ऐसी उम्मीद नहीं थी कि वो मैदान छोड़कर तो भागेंगे ही साथ ही मुझे ब्लाक भी कर देंगे। बेचारे सोशल मीडिया के आवाज बुलंद करने वाले उमा जी ने सबसे पहले मेरी टिप्णणीयों को हटा दिया। लेकिन मुझे चंगू कहने वाले कमेंट को रखा है। अब जरा व्यक्तिगत होते हुए उमा जी के लिए कुछ खासः

'प्रिय उमाशंकर जी आप अच्छे आदमी हो सकते हैं पर एनडीटीवी एक भ्रष्ट कंपनी है। इसने कई कानूनों का उल्लंघन कर रखा है और इस पर कभी भी गाज गिर सकती है। अपनी जानकारी दुरुस्त कीजिए और ये लोग अपने कल पुर्जोँ को भी सुतवा डालते हैं। कल पुर्जोँ को यह नहीं लगना चाहिए कि वह ही मशीन है। आपके उज्ज्वल भविष्य की कामना के साथ। जेल में तो सुधीर और समीर को जाना पड़ता है, सुभाष का क्या बिगड़ना है। प्रणय और राधिका ने SARAFAESI 2002 कानून को तोड़कर गलत ढंग से शेयर हस्तांतरित किए हैं और आपको पता तक नहीं। और अभी भी आपको मुगालता है कि आप एनडीटीवी के बारे में सबकुछ जानते हैं तो मुगालतोँ में रहना आपका हक है पर आपने न तो रविश की तरह नाम कमाया है और न ही दीपक की तरह पैसा, तो आप सावधान रहें तो ही अच्छा है क्योंकि कल पुर्जे कल पुर्जे ही होते हैं। sunday guardian ने दो स्टोरी छापी थी अगर उनका जवाब है आपके पास तो बोलिए, नहीं तो ईमानदारी से पेट पालिए और मुगालतों से बाहर आइए क्योंकि इनका कोई भरोसा नहीं, परिवार पालना मुश्किल हो जाएगा, 2008 का इतिहास उठाकर देख लीजिए…''

तो उमाशंकर जी उम्मीद है आपके मुगालते आपको कष्ट नहीं देंगे, धन्यवाद


Pankaj Chaturvedi जिस तरह कार सेवा के लिए मशहूर उमा भारती और कल्याण सिंह को भाजापा ने बाहर किया था, उसी तरह केजरीवाल के कार सेवक बने कुछ पत्रकार – आने वाले दिनों में खुद की सोच पर पछ्तायेनेगे — कार सेवकों का यही हश्र होता हे होता रहेगा

Abhishek Srivastava टीवी वाले इन चंपकों के ब्‍लॉक करने न करने से आपकी सेहत पर क्‍या फर्क पड़ता है… इंतज़ार कीजिए, सारे चंपकों के दिन लदने वाले हैं

निखिल भूषण के फेसबुक वॉल से साभार. निखिल ने आईआईएमसी से पत्नकारिता की पढ़ाई की है.

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