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लोकतंत्र में भ्रष्टाचार के लिए पांचों स्तंभ जिम्मेदार : जस्टिस रामा जॉईस

कांस्टीट्यूशन क्लब, रफी मार्ग, नई दिल्ली : ‘साथी’ संस्था द्वारा प्रकाशित हिन्दी मासिक पत्रिका ‘‘पाँचवाँ स्तंभ’’ के छठवें वार्षिकोत्सव समारोह के अवसर पर ‘‘लोकतंत्र में शुचिता: कौन कितना जिम्मेदार’’ विषय पर व्याख्यान का प्रारंभ सुश्री हंसा कुमारी द्वारा सरस्वती वंदना से हुआ। इस अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए पूर्व मुख्य न्यायधीश एवं राज्यसभा सदस्य श्री रामा जॉइस ने कहा कि हमारे देश में लोकतंत्र 60 साल पहले ही शुरू हो गया पर 60 साल बाद भी इस विषय पर चर्चा करना बेहद जरूरी हो गया, यह हमारे लिए चिंता का विषय है। 

कांस्टीट्यूशन क्लब, रफी मार्ग, नई दिल्ली : ‘साथी’ संस्था द्वारा प्रकाशित हिन्दी मासिक पत्रिका ‘‘पाँचवाँ स्तंभ’’ के छठवें वार्षिकोत्सव समारोह के अवसर पर ‘‘लोकतंत्र में शुचिता: कौन कितना जिम्मेदार’’ विषय पर व्याख्यान का प्रारंभ सुश्री हंसा कुमारी द्वारा सरस्वती वंदना से हुआ। इस अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए पूर्व मुख्य न्यायधीश एवं राज्यसभा सदस्य श्री रामा जॉइस ने कहा कि हमारे देश में लोकतंत्र 60 साल पहले ही शुरू हो गया पर 60 साल बाद भी इस विषय पर चर्चा करना बेहद जरूरी हो गया, यह हमारे लिए चिंता का विषय है। 

रामायण से लेकर कौटिल्य अर्थशास्त्र तक में राजधर्म के बारे में बहुत कुछ लिखा गया है। उन्होनें चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि वर्तमान स्थिति में कोई ऐसा क्षेत्र नहीं बचा है जो भ्रष्टाचार से लिप्त न हो। उन्होंने लोकतंत्र के पांचों स्तम्भों का व्यौरा देते हुए कहा कि जीवन के हर क्षेत्र में शुचिता की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार समाप्त करने के लिए व्यक्ति के निर्माण पर विशेष जोर देना होगा। शुचितापूर्ण आचरण सिखाना आवश्यक है। उन्होंने ‘पांचवां स्तंभ’ पत्रिका को शुभकामना देते हुए अपने वक्तव्य की समाप्ति की।

विषय प्रवर्तन करते हुए कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि श्री भोला सिंह, सांसद (नवादा) ने अपने वक्तव्य में कहा कि लोकतंत्र जनता की, जनता द्वारा और जनता के लिए जनता की पसंद है। उन्होंने विषय को आवश्यक बताते हुए पांचवां स्तंभ को शुभाकामना दी और पांचवा स्तंभ पत्रिका को बहुत ही रूचिकर बताते हुए लोकतंत्र की पत्रिका कहा। ‘पाँचवाँ स्तंभ’ पत्रिका लोकतंत्र की संवाहिका के रूप में कार्य करते हुए ग्रामीण परिवेश को भारत के हर क्षेत्र तक पहुंचाती है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए ‘‘पाँचवाँ स्तंभ’’ की संपादक एवं सुप्रसिद्ध लेखिका मृदुला सिन्हा ने कहा कि आज लोकतंत्र की शुचिता कम हुई है। व्यक्ति के जीवन में ही शुचिता की कमी आई है। लोकतंत्र के पांच स्तम्भों में यदि एक खम्बा कमजोर होता है तो दूसरा इसे संभाल लेता है। व्यक्ति की शुचिता अपने काम और दायित्व के बारे में महत्त्वपूर्ण हो। यदि व्यक्ति ईमानदार होता है तो अन्य क्षेत्रों में भी ईमानदारी होती है।

कार्यक्रम में पूर्व केन्द्रीय मंत्री डॉ. रामकृपाल सिन्हा, पूर्व सांसद श्री ओम प्रकाश कोहली, शिक्षा बचाओ अभियान के संयोजक श्री दीनानाथ बत्रा सहित कई जाने-माने राजनेता, वरिष्ठ पत्रकार, वरिष्ठ साहित्यकार एवं समाज के गण्यमान्य लोग उपस्थित थे। कार्यक्रम का कुशल संचालन सुश्री संगीता सिन्हा एवं धन्यवाद ज्ञापन सिम्मी जैन ने किया। कार्यक्रम के अंत में सिम्मी जैन जी का सम्मान रामा जॉईस जी ने किया।

प्रस्तुति:  गौरबेश सिंह

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