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सहारा का दोगलापन- अखबार में विज्ञापन छपवाकर बता रहे खूब पैसा है, सुप्रीम कोर्ट में कह रहे पैसे लौटाने में दिक्कत

सहारा समूह का दोगलापन अब साफ साफ सामने आ गया है. वह अखबारों में दो दो पेज विज्ञापन छपवाकर आम लोगों को यह बताने में जुटा है कि उसके पास बहुत पैसा है, घबड़ाने की कोई बात नहीं है. साथ ही अखबारों को विज्ञापन देकर सहारा मीडिया कंपनियों का भी मुंह बंद रखता है. पर यही सहारा समूह जब सुप्रीम कोर्ट में पैसे लौटाने के मुद्दे पर बात होती है तो अपने वकील के जरिए कहलवाता है कि पैसे देने में दिक्कत है. सहारा के इस दोगलापन को समझते हुए चीफ जस्टिस अल्तमस कबीर ने कड़ी फटकार लगाई और एक दिन का मौका देकर पूछा है कि सहारा साफ साफ बताए कि वह पैसे लौटा पाएगा या नहीं. 

सहारा समूह का दोगलापन अब साफ साफ सामने आ गया है. वह अखबारों में दो दो पेज विज्ञापन छपवाकर आम लोगों को यह बताने में जुटा है कि उसके पास बहुत पैसा है, घबड़ाने की कोई बात नहीं है. साथ ही अखबारों को विज्ञापन देकर सहारा मीडिया कंपनियों का भी मुंह बंद रखता है. पर यही सहारा समूह जब सुप्रीम कोर्ट में पैसे लौटाने के मुद्दे पर बात होती है तो अपने वकील के जरिए कहलवाता है कि पैसे देने में दिक्कत है. सहारा के इस दोगलापन को समझते हुए चीफ जस्टिस अल्तमस कबीर ने कड़ी फटकार लगाई और एक दिन का मौका देकर पूछा है कि सहारा साफ साफ बताए कि वह पैसे लौटा पाएगा या नहीं. 

मुख्य न्यायाधीश अल्तमस कबीर ने कहा- "समूह का रवैया लापरवाही भरा है और हम उनकी जरूरत के हिसाब से अपने आदेश की व्याख्या नहीं कर सकते. इस पूरे मसले में सहारा समूह अपने बचाव में जिस तरह की दलीलें दे रहा है, उसे स्वीकार नहीं किया जा सकता." जस्टिस कबीर वैसे तो शांत स्वभाव के माने जाते हैं लेकिन सुनवाई के दौरान उन्होंने कड़े शब्दों में सहारा समूह को लताड़ लगाई है. सुप्रीम कोर्ट के आदेश मानने में हो रही देरी को जस्टिस कबीर ने गंभीरता से लिया है और उन्होंने कहा कि इस मसले में सहारा समूह की याचिका सुनवाई लायक भी नहीं है.

जस्टिस कबीर की अध्यक्षता वाली बेंच ने सहारा समूह को यह बताने के लिए एक दिन की मोहलत दी है कि वे निवेशकों का पैसा लौटाने में सक्षम हैं या नहीं. सहारा समूह की ओर से सुनवाई में शामिल वरिष्ठ वकील गोपाल सुब्रमण्यम ने निवेशकों के पूरे पैसे लौटाने में असमर्थता जताते हुए दलील देने की कोशिश की, जिससे बेंच ने पूरी तरह से ख़ारिज कर दिया.

दरअसल सहारा समूह आम ने हाल ही में सभी प्रमुख दैनिक समाचार पत्रों में दो पृष्ठ के विज्ञापन प्रकाशित कराए हैं जिसमें कंपनी की माली हालत बेहतर दिखाई गई है.लेकिन समूह आम निवेशकों के पैसे लौटाने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रहा है. माना जा रहा है कि सुप्रीम कोर्ट के कड़े रवैए के पीछे एक वजह सहारा समूह के विज्ञापन के जरिए दबाव बनाने की कोशिश से नाराजगी भी रही होगी.

बाजार की कंपनियों पर नज़र रखने वाली संस्था सेबी ने भी सहारा की याचिका का विरोध किया है. सेबी ने कहा कि वह सहारा की याचिका के ख़िलाफ़ अवमानना याचिका दायर कर चुकी है और सहारा समूह पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए. मामले की सुनवाई के दौरान बेंच को आम लोगों की चिंता ज्यादा दिखी. बेंच ने कहा कि अगर इन लोगों को जेल भी भेजना पड़ा तो हम उन्हें जेल भेजेंगे लेकिन हमें आम आदमियों के निवेश की चिंता कहीं ज़्यादा है.

मुख्य न्यायाधीश अल्तमस कबीर की अध्यक्षता वाली बेंच ने सहारा समूह की दो कंपनियों सहारा इंडिया रियल इस्टेट कॉरपोरेशन लिमिटेड (एसआईआरईसीएल) और सहारा हाउसिंग इंवेस्टमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (एसएचआईसीएल) ने पूछा है कि क्या वे एक सप्ताह के अंदर निवशकों का पैसा लौटाने में सक्षम हैं.

sebi sahara

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