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एकाध मामले कोर्ट में जाएं तो दिमाग ठिकाने आ जाएंगे : गीताश्री

Geeta Shree : साहित्य में इन दिनों व्यक्तिगत हमले बहुत बढ रहे हैं। जिसको जो मर्जी आ रहा है किसी के बारे में लिखकर विवाद पैदा कर दे रहा है। कोई आधारहीन साहित्यिक चोरी का इल्जाम लगा रहा है तो कोई अपने साथ संबंधो को जोड़ कर प्रचार कर रहा है। घिन्न आने लगी है अब…अपना नया कुछ रच पाना संभव नहीं है तो यही सब लिखकर प्रचार पाते रहो और तूफान उठाते रहो..ये कौन सी प्रवृति है साहित्य में..ये कैसी दुनिया है जो मेरी समझ से परे है। अपने को महान साबित करने की कैसी होड़ है…राजेंद्र यादव तो अक्सर करते हैं और एक लेखिका ने उन पर कोर्ट केस करने की ठान ली..फिर बीच बचाव करके उनको समझाया गया कि साहित्यिक मसलों को कोर्ट से दूर रखना चाहिए…क्या सिर्फ साहित्य के नाम पर आप कुछ भी लिख देंगे और आप बेहद रसूख वाले लोग हैं तो सदियां आप पर भरोसा करेंगी…मुझे तो लगता है कि एकाध मामले कोर्ट में जाएं तो दिमाग ठिकाने आ जाएंगे..साहित्यकारो की दोस्ती एक डरावने सपने में बदल रहा है….

Geeta Shree : साहित्य में इन दिनों व्यक्तिगत हमले बहुत बढ रहे हैं। जिसको जो मर्जी आ रहा है किसी के बारे में लिखकर विवाद पैदा कर दे रहा है। कोई आधारहीन साहित्यिक चोरी का इल्जाम लगा रहा है तो कोई अपने साथ संबंधो को जोड़ कर प्रचार कर रहा है। घिन्न आने लगी है अब…अपना नया कुछ रच पाना संभव नहीं है तो यही सब लिखकर प्रचार पाते रहो और तूफान उठाते रहो..ये कौन सी प्रवृति है साहित्य में..ये कैसी दुनिया है जो मेरी समझ से परे है। अपने को महान साबित करने की कैसी होड़ है…राजेंद्र यादव तो अक्सर करते हैं और एक लेखिका ने उन पर कोर्ट केस करने की ठान ली..फिर बीच बचाव करके उनको समझाया गया कि साहित्यिक मसलों को कोर्ट से दूर रखना चाहिए…क्या सिर्फ साहित्य के नाम पर आप कुछ भी लिख देंगे और आप बेहद रसूख वाले लोग हैं तो सदियां आप पर भरोसा करेंगी…मुझे तो लगता है कि एकाध मामले कोर्ट में जाएं तो दिमाग ठिकाने आ जाएंगे..साहित्यकारो की दोस्ती एक डरावने सपने में बदल रहा है….

Pankaj Jha कुछ कहानी स्पष्ट लिखती.

Geeta Shree किसी का नाम लेना ठीक नही….कहानियां तो बहुत हैं..पाखी का ताजा अंक देखें..पढे..एक नया विवाद..आधारहीन..इसके पहले कितने विवाद हो चुके..साहित्यिक वध कहते हैं इसे…विवादप्रिय लोग इस हत्या में मजा लेते हैं..

Tejendra Sharma Hindi sahitya ki dunia mein itnee boo hai ki nahaatey samay bhee naak par rumaal rakhna padta hai.

Shikha Shalini जब आपने पाखी का जिक्र कर ही दिया है तो महुआ माजी का नाम लेने में आखिर क्या विवशता है? उन पर लगे आरोप गंभीर हैं। उन्हें वक्त चाहे जितना लेना हों ले लें लेकिन इसका संतोषजनक जवाब आना चाहिए। यह व्यापक हिंदी लेखक और पाठक समाज दोनों के हित में होगा।

Geeta Shree समझ में आ रहा है….मुझे कम ही दिन हुए इस इलाके में आए हुए…माजरा समझ गई..लेकिन इसका इलाज जरुरी..किसी के बारे में कुछ भी लिख देने की आदत खत्म होनी चाहिए..अब साहित्य भी सबूत की मांग करेगा तब कहां से पेश करेगें..जरुरी है कि किसी को सबक सिखाया जाए..कुछ फर्क पड़े तब। पेश करो सबूत…किसी की डायरी के अंश सबूत होने लगे तो बैक डेट में किसी के बारे में कुछ भी लिख दो..ये दुनिया…अपने गिरेबान में क्यों नहीं झांकती..नंगो को क्या फर्क पड़ता है..आइना सामने हो तो भी नहीं…
 
DrKavita Vachaknavee एक मित्र को कोट करना चाहूँगी – "श्रवण जी ने यह बात बहुत विलंब से लिखी और जिस रूप में लिखी उससे एक स्वर उभरता है कि चूंकि महुआ माजी ने उनके प्रति आभार व्यक्त नहीं किया इसलिए वह ऎसा लिख रहे हैं. जब वह महुआ माजी की प्रवृत्ति को पहचान गए थे तब उनसे यह उम्मीद ही क्यों कर रहे थे. इस बात से उनके आरोप हल्के हो जाते हैं, लेकिन जो तथ्य उन्होंने प्रस्तुत किए हैं उनपर विचार किया जाना चाहिए………" 

आउटलुक हिंदी मैग्जीन की वरिष्ठ पत्रकार और साहित्यकार गीताश्री के फेसबुक वॉल से.

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