: बैंक एकाउंट में 15 लाख मिले : अब प्रशासन कराएगा अंतिम संस्कार : कल हृदय गति रुकने से देहरादून के वरिष्ठ पत्रकार संतोष वर्मा का निधन हो गया. उसके बाद लोग उनके परिजनों को तलाशने लगे पर कोई नहीं मिला. संतोष के साथ काम कर चुकीं सुनीता भास्कर को जब संतोष जी के निधन की सूचना मिली तो उन्होंने परिजनों का पता लगाने का प्रयास किया पर सफलता न मिलने पर पूरे मामले को फेसबुक पर डाला और उत्तराखंड से जुड़े कई वरिष्ठ लोगों के वाल पर शेयर किया.
इसके बाद भड़ास को भी जानकारी मिली जिसके तहत भड़ास पर न्यूज प्रकाशित किए जाने के साथ साथ समाचार प्लस के निदेशक, देहरादून के एसएसपी, अमर उजाला के स्थानीय संपादक समेत कई लोगों को फोन कर घटना की जानकारी दी गई. वरिष्ठ पत्रकार की डेडबाडी को यथोचित सम्मान के साथ रखे जाने और परिजनों की तलाश किए जाने की भड़ास की पहल और प्रयास के बाद कई लोगों ने फेसबुक पर भी मामले की जानकारी दी.
इन्हीं जानकारियों के दौरान पता चला कि संतोष वर्मा की निजी जिंदगी सुखद नहीं थी. उनकी दो शादियां थी. पहली पत्नी ने उन पर मुकदमा किया हुआ था. अशोक मधुप की बिजनौर से टिप्पणी ये आई- ''santosh verma ki pahli ssural nahtaur bijnor me he.yaha se unka tlak ho gaya tha .phir bhi unki ssural me suchit kara diya hai.. Ashok Madhup, bijnor''.
संजय स्वदेश ने बताया- ''संतोष वर्मा जी 2004 में महामेधा में सेवारत थे..अभी महामेधा में कार्यरत
उनके समय के सहयोगियों से बातचीत कर रहा हूं… शायद कुछ परिवार वालों के बारे में पता चले…. लेकिन जहां मुझे जानकारी मिली है, उनका पारिवारिक जीवन बहुत तबाह था…. गाजियाबाद के वरिष्ठ पत्रकार तब के दैनिक जागरण के ब्यूरो चीफ और अब शायद अमर उजाला में सेवारत राज कौशिक ही उन्हें महामेधा में लाए थे. संभव हो उनके पास उनके परिवार के जुड़े लोगों की जानकारी हो… दुर्भाग्य से उनका नंबर मेरे पास नहीं है….''
सुनीता भास्कर ने बताया- ''इतनी जानकारी मिली है कि उनकी दूसरी पत्नी यहाँ उत्तराखंड के पौड़ी जनपद मैं रहती हैं जो कि फोन रिसीव नहीं कर रही हैं….और पहली जानकारी तो दे ही दी अशोक मधुप जी ने…..परिजनों तक पहुंचना संभव न हो सके या वह नहीं आयें तब भी उनकी अंत्येष्टि सम्मान से होनी चाहिए…'' सुनीता आगे बताती हैं- ''मैंने संतोष जी को मुख्यधारा मीडिया के दफ्तरों मैं एड़ियां घिसते देखा है….काबिल कापी एडिटर थे..बावजूद कहीं भी उन्हें नहीं लिया गया अंततः एक स्थानीय अख़बार जनभारत मेल के सीनियर एडिटर रहे लम्बे समय तक….द संडे इन्डियन के उत्तराखंड संवाददाता रहे…एक समय में उत्तराखंड की प्रतिनिधि पत्रिका जनपक्ष आजकल के सब एडिटर भी रहे..''
पूरे रात प्रयास करने के बाद अब ताजी स्थिति ये पता चली है कि संतोष वर्मा जी के सगे भाई और पहली व दूसरी पत्नी ने उनकी डेडबाडी लेने से मना कर दिया है. प्रशासन ने संतोष जी के बारे में जानकारी कराई और उनके डिटेल तलाशे तो पता चला कि उनके बैंक एकाउंट में 15 लाख रुपये हैं. इस बात का खुलासा होने के बाद माना जा रहा है कि हो सकता है कोई पैसे के लालच में ही सही, डेडबाडी लेने आ जाए.
हालांकि भाई और दोनों पत्नियों के लाश लेने से इनकार करने के बाद देहरादून प्रशासन अपनी निगरानी में सम्मान के साथ अंतिम संस्कार की तैयारियां कर रहा है. उसके पहले लाश का पोस्टमार्टम किया जाएगा. कहने वाले आपस में यही कह रहे हैं कि दो दो पत्नियां, भरा पूरा परिवार, एकाउंट में 15 लाख रुपये होने के बावजूद कोई डेडबाडी लेने को तैयार नहीं है. क्या यही जिंदगी का सच है?
शुरुआती खबर पढ़ें-
देहरादून में वरिष्ठ पत्रकार संतोष वर्मा का निधन, लाश लेने वाला कोई नहीं





