हृदय गति रुकने से देहरादून के वरिष्ठ पत्रकार संतोष वर्मा का निधन होने के बाद अब जबकि उनकी दो पत्नियों और सगे भाई ने डेडबाडी लेने से इनकार कर दिया है तो लोगों के मन में यह उत्सुकता पैदा हो रही है कि आखिर संतोष वर्मा जी कौन थे और उनकी जीवनशैली, सोच क्या थी. इस बारे में अभी ज्यादा जानकारी नहीं मिल पाई है. लेकिन उनके फेसबुक एकाउंट से पता चलता है कि वे फेसबुक पर काफी सक्रिय रहा करते थे. वे रोजाना कुछ न कुछ पोस्ट किया करते थे. साथ ही उन्होंने अपनी कई तस्वीरें भी अपलोड कर रखी हैं.
संतोष वर्मा ने 21 नवंबर को अपने वाल पर लिखा है- ''Aaj Divya Himgiri ke executive editor post se resign kar diya..''.
उन्होंने फेसबुक पर अपने बारे में ये लिखा है- ''Start life with Dainik Jagran Meerut as sub editor in 1985. From 1989 to dec 2003 worked with Amar Ujala at Meerut, Kanpur, Noida. In Jan 2004 re join Jagran at Bareilly In 2005 start work with daily Mahamedha as editorial incharge, and in dec 2006 come at Dedhradun and worked in Janpaksh Aajkal the uttaranchal no.1 magazine as assistant editor. Currently working editor of morning daily Janbharat Mail. Born on 26 January''
इससे पता चलता है कि संतोष वर्मा जी विशुद्ध पत्रकार थे और पूरे जीवन पत्रकारिता की. वे दैनिक जागरण, अमर उजाला में लंबे समय तक रहे. महामेधा और जनपक्ष आजकल में लंबे समय तक रहे. जिस व्यक्ति का इतना लंबा करियर रहा हो, जिसके साथ सैकड़ों लोगों ने काम किया हो, वो जब मरता हो तो कोई उनके परिजनों के बारे में बताने वाला तक नहीं, कोई उनकी डेडबाडी तक पहुंचने वाला नहीं. फेसबुक पर संतोष वर्मा ने होमटाउन के रूप में मेरठ लिखा है और फेवरिट कोटेशन में लिखा है- ''work is worship. Satyam Shivam Sundaram''.
मतलब ये कि जो आदमी काम को पूजा मानता हो और सत्यम शिवम सुंदरमा जिसका प्रिय वाक्य हो, वह जब मौत को गले लगाता है तो न तो उसका साथी कर्मयोगी उसके पास नजर आता है और न ही कोई सत्य शिव और सुंदर सरीखी स्थिति उसको लेकर बन पाती है. संतोष जी की कुछ तस्वीरें उनके फेसबुक एकाउंट से लेकर यहां प्रकाशित की जा रही हैं..




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