आज सुबह करीब नौ बजे गांव से मेरे भतीजे का फोन आया कि राज्य की खुफिया एजेंसी का कोई कर्मचारी मेरे गांव जा पहुचा और मेरे बारे में पूरी तहकीकात करने लगा। जैसे कि मैं क्या करता था, मैं क्या करता हूं,मेरा अतीत क्या था, मेरा वर्तमान क्या है, देहरादून में मैं कहां रहता हूं,किसका मकान है,किराए पर है या मेरा है। फिर मेरे परिवार से मेरे चचेरे भाई को थाने में बुलवा लिया गया उनसे पूछताछ की गई।
दो-तीन पहले नई टिहरी से भी मेरे पड़ोसियों ने भी मुझे इसी तरह की पूछताछ की जानकारी दी। कुछ दिन पहले गोपेश्वर में मेरे एक पुराने मित्र का फोन आया था। वो मेरी राजी खुशी जानना चाहते थे। वो चिंतित थे कि मैं आजकल पत्रकारिता के अलावा क्या कर रहा हूं। उन्हे लगता था कि कहीं मैं किसी ऐसी वैसी राजनीतिक गतिविधि में तो लिप्त नहीं हूं। मैंने उनसे जानना चाहा कि क्यों वह यह सब कुछ पूछ रहे हैं। उनका कहना था कि खुफिया विभाग के कुछ लोग मेरे अतीत को खंगाल रहे हैं। इनमें स्वास्थ्य विभाग और कुछ अन्य विभागों के कर्मचारी भी हैं।
नई टिहरी और गोपेश्वर में हो रही पूछताछ को मैने रुटीन खुफिया जांचों का हिस्सा मानकर अनदेखा कर दिया लेकिन आज जब गांव से भतीजे का फोन आया तो मुझे लगा कि खुफिया विभाग मेरे बारे में इस अंदाज के साथ पूछताछ कर रहा है कि जैसे कि मैं किसी आतंकवादी गतिविधि में लिप्त हूं। गांव के लोग सीधे-सादे होते हैं। यदि वहां कोई पुलिस का आदमी मेरे बारे में पूछताछ करने के लिए भी चला गया तो उन्हे लगता है कि कहीं मैं किसी अपराधिक कार्य में तो लिप्त नहीं हूं। मेरे भाई आम पहाड़ी ग्रामीण हैं। वो भयभीत हैं कि खुफिया विभाग वाले मेरे बारे में क्यो पूछ रहे हैं,पुलिस उन्हे थाने बुला कर मेरे बारे क्या जानकारी लेना चाहती है।
उन्हे लगता है कि कहीं पुलिस मुझे किसी अपराध में अरेस्ट तो नहीं करने जा रही है। वो मुझसे पूछ रहे थे कि मैने कहीं कोई गलत काम तो नहीं किया? मेरे लिए यह चैंकाने वाली घटना है। जाहिर है कि यह कोई सामान्य पूछताछ नहीं है। ये सारी चीजें तबसे शुरु हुई हैं जबसे टिहरी लोकसभा उपचुनाव में उत्तराखंड जनमंच ने चुनाव बहिष्कार का नारा दिया। टिहरी-उत्तरकाशी में मतदान भी कम हुआ और कांग्रेस प्रत्याशी हार भी गए। क्या ये घटनायें उसी का बदला लेने के लिए की जा रही है? या फिर पहाड़ी क्षेत्रवाद को उभारने के लिए मेरे को निशाना बनाया जा रहा है।
मिस्टर चीफ मिनिस्टर!मेरा स्पष्ट आरोप है कि मेरे बारे में ये खुफिया अभियान आपके कहने या आपके इर्दगिर्द के लोगों के कहने पर चलाया जा रहा है। यह आरोप मैं पूरी जिम्मेदारी और नौकरशाही में अपने सूत्रों से प्राप्त जानकारी के आधार पर लगा रहा हूं। ऐसा नहीं है कि यह पहली घटना है। मुझे सितंबर में ही एक आला पुलिस अधिकारी ने आगाह किया था कि आप अपने बीएसएनएल वाले नंबर पर सावधानी के साथ बात करें।
उन्होंने कहा कि हो सकता है कि वो टेप हो रहा हो। लेकिन मैने उनकी इस बात को बहुत गंभीरता से नहीं लिया। क्योंकि मैं तो वैसे ही सार्वजनिक रुप से इतनी तीखी टिप्पणियां करता हूं कि किसी को मेरे फोन टेप करने की जरूरत ही नहीं है। लेकिन इन घटनाओं से लगता है कि वो अधिकारी गलत नहीं रहा होगा। माननीय मुख्यमंत्रीजी! मेरा कहना है कि जो जानकारी सरकार के उच्च स्तर के निर्देशों के आधार पर खुफिया विभाग मेरे बारे में जुटा रहा है वो जानकारी तो आप भी उन्हे दे सकते थे। आखिर आप तो मुझे सन् 1989 से जानते हैं। उत्तराखंड आंदोलन में आपको लोकसभा चुनाव न लड़ने की सलाह देने वालों में स्व0 इंद्रमणि बडोनी के साथ मैं भी था। टिहरी लोकसभा का सन् 1999 तक ऐसा कौन सा चुनाव जिसमें आपने मुझसे और मेरे कर्मचारी साथियों से सहयोग नहीं मांगा हो।
मिस्टर चीफ मिनिस्टिर! आपको शायद याद न हो पर मैं आपको याद दिला सकता हूं कि मैं वही राजेन टोडरिया हूं जिसे आपने अपनी एक खबर छपवाने के लिए शिमला में ढूंढवाया था। बेहतर होता यदि आपकी खुफिया एजेंसियां मेरे बारे जानकारी जुटाने के लिए आपसे संपर्क करती। यदि जानकारी जुटाना मकसद नहीं है तो फिर ये सब क्या है? क्या आप मेरे मित्रों,परिजनों,परिचितों को क्यांे भयभीत कर रहे हैं। ये कौन सी राजनीति है,कैसी राजनीति कर रहे हैं आप? मैं आपको बताना चाहता हूं कि आपकी सरकार इस लुकाछिपी के खेल को बंद करे।
यदि आपको मुझे गिरफ्तार करना है, पहाड़ी आतंकवादी घोषित कर मुझे गोली मारनी है, रासुका में बंद करना है तो करें। मैं थाने में आकर खुद गिरफ्तारी दे दूंगा। लेकिन खुफिया जांच के नाम पर मेरे मित्रों, परिजनों, परिचितों को भयभीत करना बंद करें। एक और बात मैं कहना चाहूंगा कि हम लोग पहाड़ के लोगों के हकों की खातिर उत्तराखंड में 1994 के बाद आए 12 लाख बाहरी लोगों और उनकी सरकार से अंतिम दम तक लड़ेंगे। मत भूलियेगा कि ये वही पहाड़ी है जिन्होने स्व0 हेमवतीनंदन बहुगुणा के सम्मान के लिए इंदिरा गांधी की सत्ता की ताकत को बौना साबित कर दिया था। आज भी हम वही करने
की ताकत और बूता रखते हैं। हमें सत्ता की ताकत से झुकाया नहीं जा सकता।
राजेन टोडरिया वरिष्ठ पत्रकार हैं. वे उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश समेत कई राज्यों में विभिन्न अखबारो में विभिन्न पदों पर रह चुके हैं. वे जनपक्षधर पत्रकारिता के लिए हमेशा सक्रिय रहते हैं. उन्होंने अपनी यह बात फेसबुक पर प्रकाशित की है. इस पोस्ट पर कुछ टिप्पणियां इस तरह आई हैं…
धर्म सिंह बुटोला Oh! so, it shall be better if you could forward your grievances to [email protected] also
Rajen Todariya Nahi! meri koi grivance nahi! i DO NOT WANT HIS MERCY.I want his apology on behalf of Intelligence agency and immediate action against those who are responsible.
Kapil Sharma 2 or 2 panch nahi saanch koi aanch nahi …….sir
Kailash Koranga Gundaraj band karo
Chandra Shekhar Joshi वरिष्ठ पत्रकार राजेन टोडरिया के परिवार के साथ इस तरह की घटना की हम भर्त्सना व निंदा करते हैं- चन्द्रशेखर जोशी केन्द्रीय महासचिव- केन्द्रीय कूर्माचल परिषद, देहरादून
Rajesh Bharti dukad suchna hai bhai sahab. ye sarkar to pichhali se bhi jyada giri hui hai. jo Iske galat kamo par bolega use yah darayegi. ap chinta na kare Iska bhi aant hona hai.
Sushil Dobhal हम सब आपके साथ है भाई साहब !
Prabhat Upreti fine
Lmohan Kothiyal We condemn this act.





