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सुख-दुख...

हां सर…वो आजकल तो डांडिया टीवी भी ख़बर पेले हुए है… (मयंक सक्सेना रचित चम्पादक कथा का अगला अध्याय)

चैनल के बाहर चाय की दुकान पर चम्पादक जी और शाउटपुट हेड बैठे चाय पी रहे थे या ऐसे कह सकते हैं कि चम्पादक बैठे थे और शाउटपुट हेड एक कार की टेक लिए बैठने का मन बनाए, खड़े होने सी मुद्रा लिए हुए थे…शाउटपुट हेड ने चम्पादक की ओर बिस्किट बढ़ाते हुए कहा…

चैनल के बाहर चाय की दुकान पर चम्पादक जी और शाउटपुट हेड बैठे चाय पी रहे थे या ऐसे कह सकते हैं कि चम्पादक बैठे थे और शाउटपुट हेड एक कार की टेक लिए बैठने का मन बनाए, खड़े होने सी मुद्रा लिए हुए थे…शाउटपुट हेड ने चम्पादक की ओर बिस्किट बढ़ाते हुए कहा…

शाउटपुट हेड – सर…अब तो कैम रेटिंग (चीपनेस आडियंस मीसरमेंट) फिर से चालू होने वाला है…एक दो हफ्ते बचे हैं…इधर तो थोड़ी बहुत ख़बर चलाई है…अब क्या करना है…मतलब सीआरपी (चीपनेस रेटिंग प्वाइंट) डाउन न हो जाए…

चम्पादक – हां…कल मालिक भी फोन पर कह रहे थे…वैसे डिस्ट्रीब्यूशन तो फ़िट ही है अपना लेकिन इधर कहीं पब्लिक को न्यूज़ देखने की लत लग गई तो क्या होगा…

(बात कहने और सुनने के चक्कर में शाउटपुट हेड का आधा बिस्किट गल कर चाय में ही जल समाधि ले चुका है…खिसियाए शाउटपुट हेड इसके लिए फेसबुक पर चम्पादकों को गाली देने वाले उस लौंडे को ज़िम्मेदार मानना चाहते हैं…लेकिन सवाल पूछते हैं…)

शाउटपुट हेड – हां सर…वो आजकल तो डांडिया टीवी भी ख़बर पेले हुए है…कब तक पर भी अब तक ख़बर ही चल रही है डेढ़ महीने से…एबीसीडी न्यूज़ भी न्यूज़ ही टिका रहा है…और वो साला एलडीबीवी डांडिया तो पहले ही माहौल खराब किए थे…

(चम्पादक दरवाज़े पर खड़ी मालिक की कार को मन ही मन प्रणाम करते)

चम्पादक – हां वही लग रहा है…कहीं व्यूअर की आदत बिगड़ गई तो अपना तो मामला बिगड़ जाएगा…सिनेमा सिरदर्द कोई नहीं देखेगा…लेकिन वैसे मुझे लगता है कि दो महीने होते ही पब्लिक को अगर नॉन न्यूज़ दिखा दी तो साली फिर लौट आएगी औकात पर…वैसे भी कब तक सोनिया-राहुल-मोदी और केजरीवाल देखेगी…पक गई होगी…

(बेमन से आधा बिस्किट खा कर जल्दी में चाय पीते हुए शाउटपुट हेड जल्दी निकलने के बहाने के बारे में सोच रहे हैं…)

शाउटपुट हेड – लेकिन सर कुछ प्लानिंग भी तो करनी ही होगी कि कुछ नया भी शुरु किया जाए…या वापसी की जाए…नहीं तो बाकी की देखादेखी मजबूरी में कब तक न्यूज़ चैनल पर न्यूज़ ही दिखाते रहेंगे…दो महीने पूरे ही होने वाले हैं….

(चाय खत्म हो चुकी है…और दोनों दफ्तर में घुस रहे हैं…तभी रास्ते में सेल्स का एक कर्मचारी चम्पादक जी को आवाज़ देता है…)

सेल्स मिसमैनेजर – अरे चम्पादक सर…वो एक डील आई है…निर्बल बाबा ने फोन करवाया था…कह रहे थे कि दरबार दोबारा शुरु करवाना चाहते हैं…पैसा दोगुना कर दिया है…स्लॉट भी सही चाहते हैं…

चम्पादक (दांत कुरेदते हुए) – यार वो बड़ा बवालिया आइटम है…अभी बहुत ऐसी तैसी हुई थी…उधर बिज़नेस डील में दो नपे हैं…फेसबुक से लेकर एसएमएस तक सब डंडा कर देंगे…आज कल एक आध चू*ए वैसे भी अपना सारा फ्रस्ट्रेशन हम लोगों पर ही निकाल रहा है…

सेल्स मिसमैनेजर – अरे लेकिन पैसा बढ़ा कर दे रहा है…ऊपर से ड्यूरेशन भी खूब…और हां अभी और कहीं निर्बल का दरबार सजा भी नहीं है…

चम्पादक (चश्मा साफ़ करते हुए) – साहब आखिरकार है तो न्यूज़ चैनल…आजकल बाबा वाबा नहीं चल रहा कहीं…

सेल्स मिसमैनेजर – देख लीजिए…मालिक को भी बता दिया है…और हां इसकी टीआरपी आप लोगों के बनाए न्यूज़ बुलेटिन से ज़्यादा आती है…अपने चैनल के बुलेटिन की क्वालिटी सबको पता है…पब्लिक बाबाओं के पीछे जाती है…ओह माई लग के उतर गई…बाबा का ढाबा कभी बंद नहीं होता…

चम्पादक (शाउटपुट हेड को देखते हुए इस बार सिर खुजाते हैं…) – उफ़…मालिक को भी बता दिया…मरवाओगे…बताओ क्या है…कौन सा स्लॉट चाहिए…और डील कितने की है…वैसे टीआरपी तो लाता ही है…

(उसी रात चम्पादक के सपने में निर्बल बाबा अचानक आ जाते हैं…चम्पादक दरबार में खड़े हैं…बाबा अपने दिव्य सिल्क के कुर्ते पायजामे में मुस्कुरा रहे हैं…बाउंसर सिकुड़ कर छोटे और दुबले हो गए हैं…)

बाबा – हां जी…लौट आए हमारी शरण में…

चम्पादक (गिड़गिड़ा कर)- बाबा…मैं आपसे दूर कभी गया ही नहीं था…वो तो कोर्ट के फैसले का इंतज़ार कर रहा था… बस बचा लीजिए इस बार….

बाबा – क्या समस्या है…

चम्पादक (खिसियानी हंसी से) – बाबा…बाबा…(ब्लैक शीप) के चरणों में मेरा कोटि कोटि…पंच कोटि प्रणाम… हें हें हें हें…वो दरअसल दो महीने के लिए सीआरपी मशीने बंद थी साफ़ सफ़ाई के लिए…अब खुल जाएंगी…वो टीआरपी के लिए क्या करें बाबा…आपकी बड़ी कृपा होगी…

बाबा – दरबार चला रहे हो…

चम्पादक – हां बाबा…बस चलाने ही वाले हैं…वो भी नए रूप में…आपको तो पता ही है…हें हें हें…

बाबा – और कोई चलाए…इससे पहले चलाओ…और हां आजकल क्या चला रहे हो…?

चम्पादक – वो बाबा…आजकल तो मजबूरी में न्यूज़…

बाबा – अब से निर्बल दरबार चलाओ…रोज़ चलाओ…और भक्ति भाव से चलाओ…कोई कितना ही मज़ाक बनाए डरनामत…जवाब मत देना…क्या ताने सुन कर शर्म आती है…

चम्पादक – हां बाबा, कभी कभी आती तो है…

बाबा – बेशर्म हो जाओ…चम्पादक हो…

चम्पादक – जी बाबा ….

बाबा – वैसे चाय के साथ क्या खाते हो दफ्तर के बाहर दुकान पर…

चम्पादक – वो बाबा…मठरी या बिस्किट…

बाबा – अब बगल की दुकान से समोसा खाया करो…लहसुन की चटनी के साथ….

चम्पादक – बाबा की जय हो…बाबा आप महान हैं…बाबा की किरपा बनी रहे…बाबा की किरपा बनी रहे…सीआरपी आती रहे…बाबा की एक बार और जय हो…

*************************************************

(इस कहानी का किसी जीवित या मृत व्यक्ति से कोई लेना देना नहीं है….अगर लेना देना हो तो वो उसकी खुद की ज़िम्मेदारी है….और अगर ऐसा भविष्य में घटता है तो लेखक को बाबा मान कर पूजा करनी चाहिए)


युवा पत्रकार मयंक सक्सेना रचित इस सीरिज की अन्य कथाओं के लिए यहां क्लिकियाएं- चम्पादक कथा

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