: प्रेस क्लब की मेंबरशिप मैनेज कर रहे हैं संदीप दीक्षित : प्रेस क्लब की सदस्यता की दूसरी लिस्ट बाहर आ गई है। इसमें एक तरफ से संदीप दीक्षित के खासमखास और खासतौर पर ब्राह्मणों को जगह दी गई है। इस लिस्ट में 90 फीसदी ब्राह्मण हैं और ये वे ब्राह्मण हैं जो दीक्षित जी के गुट के हैं। संदीप दीक्षित प्रेस क्लब के महासचिव हैं। पिछले एक साल के कामकाज की पूरी चाभी संदीप दीक्षित के ही हाथ में रही है। प्रेस क्लब की नई लिस्ट में संदीप दीक्षित की ही मनमानी चली है।
मिश्रा, तिवारी, शुक्ला, उपाध्याय जैसे लोगों को खासतौर पर जगह दी गई है। वजह संदीप दीक्षित की असुरक्षा की भावना है। वह दुबारा चुनाव जीतना चाहते हैं। मगर फटी कमीज के धब्बे सामने आ चुके हैं। दिसंबर में चुनाव कराने की तैयारी और उसके पहले यह लिस्ट निकालना इसी का हिस्सा है। प्रेस क्लब के मौजूदा समीकरण में जीत पाना उनके लिए टेढ़ी खीर हो चुका है। ऐसे में तेजी के साथ एक के बाद दूसरी लिस्ट जारी करके दीक्षित जी अपने लोगों को प्रेस क्लब का मेंबर बनाकर अपने सपने को साकार करना चाहते हैं।
साफगोई और पारदर्शिता के नाम पर जीतकर आए दीक्षित जी ने कोई भी क्राइटेरिया नहीं रखा। प्रेस क्लब का मेंबर किसी पत्रकार को क्यूं बनाया जा रहा है, क्यूं उसे बाहर किया जा रहा है, इसका कोई क्राइटेरिया नहीं है। यही वजह है कि राष्ट्रीय चैनलों और अखबारों के पत्रकारों को इस लिस्ट में जगह नहीं मिल सकी है, दूसरी ओर दमदम टाइम्स जैसे पत्रकारों की पौ बारह है जो दीक्षित जी की चरण परिक्रमा करने को तैयार हैं।
इस तानाशाह रवैए के खिलाफ विद्रोह भड़कने की शुरुआत हो चुकी है। संदीप दीक्षित की जातिवादी, संकीर्ण राजनीति के खिलाफ लोकतांत्रिक हल्लाबोल की पूरी तैयारी है। अब दीक्षित जी धमकाने में जुटे हैं। भड़ास पर जल्द ही दीक्षित जी के काल रिकार्ड और मोबाइल पर दी गई, उनकी धमकियों का खुलासा किया जाएगा, जो रिकार्ड हो चुकी हैं। इस खुलासे से साबित हो जाएगा कि वे किस तरह अपनी बिरादरी के लोगों को सदस्य बना रहे हैं और गैर बिरादरी के लोगों को बाकायदा धमका रहे हैं।
एसोसिएट मेंबरशिप की आड़ में भी दीक्षित जी ने निराला खेल खेला है। ऐसे ऐसे लोगों को एसोसिएट मेंबरशिप दे दी है जिनका नाम सामने आते ही हाथों से तोते उड़ जाएंगे। खास बात यह भी है कि दीक्षित जी ने प्रेस क्लब मेंबरशिप चयन कमेटी का मुखिया भी अपनी ही ब्राहमण बिरादरी से चुना था ताकि बिरादरी के हितों का पूरा ख्याल रखा जा सके।
लेखक भगत शेखर पत्रकारिता से जुड़े हुए हैं.





