: कम्पनी का पैसा निजी बालू-सीमेंट पर लगाने के आरोप पर हुई कार्रवाई : जौनपुर: राष्ट्रीय सहारा के ब्यूरो चीफ रहे रविकांत शुक्ला लगता है कि अब फिर अपना पुराना बालू का धंधा शुरू करेंगे। आज अचानक हुई इस फेरबदल के बाद यहां ब्यूरोचीफ का ओहदा अब हसनैन कमर 'दीपू को सौंप दिया गया है। इस पद से हटाये गये रविकांत शुक्ला को विज्ञापन के बकायों की वसूली के काम के लिए भेजा गया है। मतलब यह कि राष्ट्रीय सहारा में विज्ञापन और पत्रकारिता का घालमेल खुलेआम शुरू हो गया है।
हालांकि पिछले दो बरसों में यहां राष्ट्रीय सहारा में उठापटक जोरों से चल रही थी। हसन दीपू यहां सहारा-टीवी में पिछले 10 साल से काम कर रहे हैं। लेकिन पिछले साल की शुरूआत में रविकांत शुक्ल को ब्यूरो चीफ बना दिया गया था। लेकिन शिकायतें उठीं तो कार्रवाई करते हुए दीपू कमर हसनैन को ब्यूरो चीफ बनाया दिया गया। रविकांत शुक्ला पर आरोप लगा था कि अखबार में विज्ञापन के लिए आने वाली नकदी का इस्तेमाल वे अपने बालू-गिट्टी के बिजनेस में लगा रहे हैं। तत्कालीन मीडिया हेड स्वतंत्र मिश्र से जुगाड़ लगा कर कुछ स्थानीय नेताओं वाले के गुट ने उन्हें विज्ञापन का काम दायित्व सम्भाल लिया था।
अभी यह सब चल ही रहा था कि अचानक इस अखबार के संवाददाता राजन मिश्र ने इस घोटाले की सारी बातचीत अपने मोबाइल पर टेप कर लीं और फिर शिकायत अखबार के बड़े अधिकारियों तक पहुंचा दिया। लेकिन यहां भी मामला उल्टा हो गया और बजाय घोटाले का खुलासा करने पर प्रशंसा के स्थान पर उलटे राजन को ही सहारा से निकाल बाहर कर दिया गया। राजन पर आरोप लगा कि उन्होंने सहारा में अनुशासन तोड़ा है। वाराणसी में मौजूद कुछ अफसरों ने यहां के फोटोग्राफर दीपक को भी बाहर का रास्ता दिखा दिया।
लेकिन वाराणसी के यूनिट मैनेजर मुमताज़ अहमद ने आखिरकार मामले पर हस्तक्षेप किया और रविकांत शुक्ला की गोपनीय जांच करवानी शुरू की। पता चला कि रविकांत ने करीब 12 लाख रुपये की विज्ञापन की रकम का इस्तेमाल अपने सीमेंट व बालू के धंधे में लगाने के साथ ही अपने लिए एक बुलेरो गाड़ी भी खरीद डाली है। तय हुआ कि रविकांत शुक्ला को वसूली में काम में लगाया जाए और कमर हसनैन को अखबार की कमान सौंप दी गयी। रवीकांत अपने बकाया वसूली की रिपोर्ट अब कमर दीपू को ही करेंगे।
कुमार सौवीर की रिपोर्ट.





