ओबरा-सोनभद्र : चलो, अब आखिरकार खुलासा तो हो ही गया कि ओबरा हाईफाई गेस्टहाउस में रंगरेलियां मनाने वाले पत्रकार कौन थे। हालांकि शुरू में ही लोगों को ऐसे पत्रकारों का नाम-पता चल गया था कि लेकिन पुख्ता प्रमाण और दस्तावेज की नामौजूदगी के चलते यह कारनामा केवल कानाफूसी तक ही सीमित रहा। मिले प्रमाणों के मुताबिक एक राष्ट्रीय स्तर के अखबार के स्थानीय प्रमुख ने तीन पत्रकार साथियों के साथ यहां अपना मुंह काला किया था। इस पूरे आयोजन की व्यवस्था इसी अखबार के एक फोटोग्राफर को इसी पत्रकार ने सौंपी थी। कुछ भी हो, इस पूरे कांड में एक पत्रकार के नाम का खुलासा हो जाने के बाद अब बाकी दुराचारी पत्रकारों की पहचान आसान होती जा रही है।
उधर पत्रकारों के रंगरेलियां-कांड के एक महीना के बाद अब जिला प्रशासन ने अपनी आंखें मलना शुरू कर दिया है। ओबरा के हाइडिल वीआईपी गेस्टहाउस में इस कांड पर अपनी जमकर छीछालेदर होने के बाद जिला प्रशासन ने तय किया है कि जांच की जाएगी। लेकिन हैरत की बात है कि इस जांच में ऊल-जुलूल आधारों को लपेटा जा रहा है। जानकार बताते हैं कि जांच के नाम पर इस मामले में लिप्त रहे लोगों को साफ-साफ बचाने लेने के लिए प्रशासन ने कमर कस ली है।
उपलब्ध प्रमाण के मुताबिक पिछले 4 नवम्बर को एक बड़े अखबार के फोटोग्राफर प्रवीण कुमार ने वीआईपी गेस्ट हाउस का 26 नम्बर का वीआईपी सुईट बुक कराया था। बुकिंग रजिस्टर के क्रमांक-2208 पर दर्ज इस ब्योरे के मुताबिक 4 नवम्बर को ही इस पत्रकार के सारे अतिथि इस कमरे में जुट गये थे। यह कमरा सीधे सड़क के सामने था, जबकि इन सारे अतिथियों की गतिविधियों की सार्वजनिक हो सकती थीं, इसलिए गेस्ट हाउस के एक दूसरे वीआईपी के कोने पर स्थित 14 नम्बर वाले कमरे में इन लोगों ने खुद को स्थानांतरित करा लिया। अगले चार दिनों तक यह सारे पत्रकार तब तक यहीं पर जमे रहे, जब तक कि उनकी करतूतों से आजिज गेस्टहाउस के दूसरे कमरों में रह रहे लोगों ने पुलिस को खबर कर दी।
बताते चलें कि बिजली-उत्पादन की राजधानी ओबरा में 8 नवम्बर-12 को सोनभद्र के तीन पत्रकारों ने एक कॉलगर्ल के साथ रंगरेलियां मनायीं थीं। अचानक पुलिस ने छापा मारा। रंगेहाथ ही नहीं, नंगे-नंगे यह सारे लोग पकड़े गये। लोगों ने इनको जमकर पीटा। लेकिन इसी बीच एमएलए से लेकर लखनऊ के बड़े पत्रकारों की सिफारिशें पहुंची। और नतीजा, मामला हमेशा-हमेशा के लिए खत्म कर दिया गया। ये तीनों पत्रकार हैसियत के तौर पर करोड़ों रूपयों के मालिक हैं। इनमें से वे लोग भी हैं जो कई क्रशर और खनन व्यवसाय से जुड़े हैं। बहरहाल, प्रवीण कुमार के नाम का खुलासा हो जाने के बाद अब इस पूरे मामले में शामिल रहे पत्रकारों की पहचान अब आसान हो गयी है।

पहले तो इस पूरे मामले को दबाने की कोशिशें शुरू हो गयी थीं, लेकिन बाद में ओबरा उत्पादन-गृह प्रबंधन ने मामले की जांच शुरू कर दी। उधर पुलिस कप्तान ने स्थानीय थानाध्यक्ष को लाइन हाजिर कर दिया। उधर बिजली कर्मचारियों के संगठन के एक वरिष्ठ नेता विजय सिंह ने ओबरा प्रशासन और सीजीएम को पत्र लिख कर मामले पर कड़ी कार्रवाई और छात्र नेता विजय शंकर यादव ने मुख्यमंत्री समेत जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक को पत्र लिख कर ऐसे पतित पत्रकारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
लेखक कुमार सौवीर यूपी के वरिष्ठ और बेबाक पत्रकार हैं.





