मेरे द्वारा लोकायुक्त, उत्तर प्रदेश को कुंवर फ़तेह बहादुर, प्रमुख सचिव, गृह, उत्तर प्रदेश शासन और आरएन सिंह, एडीजी, ईओडब्ल्यू के विरुद्ध एक परिवाद दायर किया गया है. यह परिवाद दो आपराधिक मुकदमों में जानबूझ कर सोची-समझी साजिश के तहत पूर्व में नियमानुसार किये गए समस्त विवेचनाओं को एक सिरे से दरकिनार करते हुए उन अभियुक्तों की गलत ढंग से मदद पहुंचाये जाने सम्बंधित है जिन्हें इससे पूर्व स्वयं ईओडब्ल्यू विभाग ही लगातार मुल्जिम बता रहा था.
इनमें पहला प्रकरण मे. श्री एसिड एंड केमिकल्स लि०, गजरौला, से सम्बंधित अन्वेषण संख्या 83/04 है जो इस कंपनी के डाइरेक्टरों के विरुद्ध धारा 420/467/468/471/477ए भा०द०वि० में वर्ष 1998-99 तथा 1999-2000 में भारी मात्र में रॉक फोस्फेट फर्जी बिलों के आधार पर क्रय करने और उससे फर्जी एस०एस०पी० खाद का उत्पादन दिखा कर भारत सरकार से फर्जी सब्सिडी हासिल करने के बारे में है. ईओडब्ल्यू विभाग ने विवेचना के बाद दिनांक 24 दिसंबर 2009 को गृह विभाग को अपनी रिपोर्ट सौंपी, जिसके अनुसार मे. श्री एसिड लि. द्वारा वर्ष 1998-99 में एक प्राइवेट फर्म श्री राम ट्रेडिंग कंपनी, ललितपुर से 2269.81 मै. टन रॉक फोस्फेट केवल कागज़ पर ख़रीदा गया और इन फर्जी प्रविष्टियों के आधार पर 4203 मै. टन एस०एस०पी० खाद का उत्पादन फर्जी रूप से दिखाया कर करीब 32.61 लाख रुपये की सब्सिडी हड़प लिया. अतः इसके लिए श्री एसिड लि० के एमडी रवि मित्तल और उनके सगे भाई कंपनी के ज्वायंट एमडी संदीप मित्तल को धारा 420/467/468/ 471/ 477ए का दोषी पाया गया. इनमें से संदीप मित्तल ने कुंवर फ़तेह बहादुर, प्रमुख सचिव (गृह) से अपने रिश्तों के बल पर कई बार शासन को प्रार्थना पत्र दिये जिनमें बार-बार ईओडब्ल्यू विभाग ने यही बात कही गयी कि दोनों भाई रवि मित्तल और संदीप मित्तल कंपनी के कार्यों के लिए समान उत्तरदायी थे. अंत में जून 2011 में एसपी, ईओडब्ल्यू मेरठ द्वारा एक बार फिर दोनों भाइयों को मुज्लिम बताते हुए रिपोर्ट भेजी गयी लेकिन आरएन सिंह, एडीजी, ईओडब्ल्यू ने अब तक की गयी समस्त विवेचनाओं और जांचों को बिना समुचित आधार के बदलते हुए गलत रूप से यह निष्कर्ष निकाल लिया गया कि इस मामले में संदीप मित्तल दोषी नहीं हैं और इस गलत रिपोर्ट को उतनी ही तत्परता से गृह विभाग द्वारा अनुमोदित कर दिया गया.
दूसरे मामले में मे० अमरोहा ट्रेडफिन लि० कंपनी, जे पी नगर के डाइरेक्टरों अशोक कुमार जैन, अजय कुमार टंडन, पंकज मित्तल एवं अजय कुमार चौहान द्वारा लुभावने वायदे कर के निवेशकों से पैसा जमा कराया गया और जमा धनराशि की अवधि पूरी होने के बाद पैसा वापस नहीं किये गए जिस सम्बन्ध में ईओडब्ल्यू विभाग द्वारा अन्वेषण संख्या- 81/07 पर विवेचना की गयी और इन चारों निवेशकों को दोषी मानते हुए धारा 406/420 का अभियुक्त पाते हुए ईओडब्ल्यू के तत्कालीन एडीजी द्वारा इन्हें रु. 45,99,893 के गबन करने के आरोप में गृह विभाग को अपनी रिपोर्ट दिनांक 21 अगस्त 2009 को प्रेषित की. यहाँ अजय कुमार टंडन ने कुंवर फ़तेह बहादुर, प्रमुख सचिव, गृह, से सम्बन्ध के बल पर कई बार गृह विभाग में प्रार्थना पत्र दिये जिनमें बार-बार ईओडब्ल्यू विभाग ने चारों निवेशकों को अभियुक्त बताया. आर एन सिंह ने ईओडब्ल्यू के एडीजी के रूप में दवाब बना कर अंतिम रिपोर्ट लगवाने का प्रयास किया और मेरठ सेक्टर में असफल रहने पर यह विवेचना मेरठ सेक्टर से मुख्यालय सेक्टर स्थानांतरित कर दी और आनन-फानन में इस मामले में अंतिम रिपोर्ट लगाने की संस्तुति उत्तर प्रदेश शासन को कर दी, जिसे गृह विभाग ने तुरंत अनुमोदित भी कर दिया. आरएन सिंह ने फाइनल रिपोर्ट धारा 45 क्यू, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया एक्ट के आधार पर इस तर्क से लगवाया कि धारा 45 क्यू, आरबीआई एक्ट भारतीय दंड संहिता के अपराध को रोकता है, जबकि धारा 45 क्यू, आरबीआई एक्ट के अंतर्गत इस तरह से फाइनल रिपोर्ट प्रेषित करना कानूनी रूप से गलत है, क्योंकि धारा 45 क्यू, आरबीआई एक्ट कहीं से भी भारतीय दंड संहिता के अपराध को नहीं रोकता है.
जिस किसी अधिकारी ने इन कार्यों का विरोध किया उसे ठिकाने पर लगा दिया गया. ईओडब्ल्यू मेरठ सेक्टर के एसपी अमिताभ ठाकुर को बीच सत्र में ही अचानक बिना कारण के दिनांक 12 अक्टूबर 2011 को ईओडब्ल्यू विभाग से हटा कर एकपक्षीय ढंग से रिलीव भी कर दिया गया. मे. श्री एसिड कंपनी प्रकरण के विवेचक कालू राम शर्मा को दिनांक 19 अक्टूबर को अचानक इस विवेचना से हटाते हुए उन्हें बलिया खाद्यान्न घोटाले से संबद्ध कर दिया गया. इसी मामले में ईओडब्ल्यू मुख्यालय के लिपिक संजय श्रीवास्तव को दिनांक 29 अक्टूबर को निलंबित कर दिया गया. मैंने लोकायुक्त को ये सभी तथ्य प्रस्तुत करते हुए उनसे इनमे गहराई से जांच करा कर दोषी पाए गए सभी लोक सेवकों के विरुद्ध कठोर दंडात्मक कार्यवाही करने की मांग की है.
डॉ. नूतन ठाकुर
सामाजिक कार्यकर्ता एवं कन्वेनर,
नेशनल आरटीआई फोरम





