देहरादून। दूसरों को आईना दिखाने वाला चौथा खम्बा अगर खुद फर्जी तरीके से अधिकारियों को गुमराह कर लाखों डकाराने शुरू कर दे तो उसकी विश्वसनीयता कितनी होगी इसका आंकलन खुद ही किया जा सकता है। इतना ही नहीं उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में इसी सम्पादक मंडल द्वारा डीएवीपी रेट गलत तरीके से प्रस्तुत कर लाखों का घोटाला किया जा चुका है, जिसके चलते समाचार पत्र से अधिक वसूल किए गए धन की रिकवरी भी हो चुकी है।
उत्तर प्रदेश में ब्लैक लिस्ट होने के बाद देवभूमि उत्तराखण्ड में समाचार पत्र दैनिक निष्पक्ष समाचार ज्योति एवं उर्दू दैनिक हालात-ए-वतन के प्रकाशक/सम्पादक द्वारा फर्जी प्रकाशन स्थल बताकर डीएवीपी के अधिकारियों को गुमराह कर लाखों रुपये का भुगतान हासिल कर लिया गया। इतना ही नहीं उत्तराखण्ड के देहरादून में जब इस प्रकरण की एसएसपी देहरादून द्वारा 27 मार्च 2011 को एलआईयू जांच कराई गई तो पता चला कि उर्दू दैनिक समाचार पत्र हालात-ए-वतन का प्रकाशन स्थल 14 डी मीडो प्लाजा दर्शाया गया है, जबकि वहां से इस नाम का कोई भी समाचार पत्र प्रकाशित नहीं होता। पुलिस की एलआईयू जांच रिर्पोर्ट में 14डी मीडो प्लाजा से दैनिक/साप्ताहिक नजरिया खबर के प्रकाशित होने की बात कही गई है, जिसके बाद निष्पक्ष समाचार ज्योति समाचार पत्र का प्रकाशन स्थल भी पूरी तरह से फर्जी पाया गया है, जिस पर सूचना एवं लोकसम्पर्क विभाग के संयुक्त निदेशक राजेश कुमार द्वारा बीती 29 सितम्बर 2011 को निष्पक्ष समाचार ज्योति के सम्पादक सुमन गुप्ता एवं उर्दू दैनिक हालात-ए-वतन के सम्पादक डा0 रामलखन गुप्ता को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
शिकायतकर्ता गीता जायसवाल ने महानिदेशक विज्ञापन एवं दृश्य प्रसार निदेशालय, नई दिल्ली को शिकायती पत्र भेजकर सम्पादक द्वारा फर्जी प्रकाशन स्थल बताकर डीएवीपी के अधिकारियों को गुमराह किये जाने का आरोप लगाने के साथ-साथ डीएवीपी से दैनिक निष्पक्ष समाचार ज्योति के नाम पर एक लाख से अधिक एवं उर्दू दैनिक हालात-ए-वतन के नाम पर 10 लाख से अधिक का भुगतान हासिल किए जाने की बात कही है। उक्त सभी भुगतान की वसूली रामलखन गुप्ता से किए जाने के साथ साथ डीएवीपी में गलत व झूठे अभिलेख प्रस्तुत कर समाचार पत्रों को डीएवीपी में सूचीबद्व किए जाने के खिलाफ कानूनी कार्रवाई किए जाने की मांग भी की गई है। प्रकाशन स्थल का जिस तरह से पता गलत दर्शाया गया है, उससे समाचार पत्र की निष्पक्षता के साथ साथ जमीनी हकीकत का भी पता चल जाता है। वहीं रामलखन गुप्ता द्वारा कई अन्य राज्यों से भी समाचार पत्रों को चलाया जा रहा है। लेकिन उत्तराखण्ड में जिस तरह से उक्त सम्पादक द्वारा फर्जी प्रकाशन स्थल के सहारे लाखों रुपये डीएवीपी से विज्ञापन के रूप में हासिल किए गए हैं वह निश्चित रूप से शर्मनाक पहलू है।
वर्तमान में दोनों ही समाचार पत्रों के प्रकाशन स्थल दूसरी जगह दर्शाकर समाचार पत्र को प्रकाशित किया जा रहा है। इसके अलावा दैनिक निष्प़क्ष समाचार ज्योति पर 13 मई 2011 को अंक संख्या 306 के पृष्ठ संख्या 16 में स्वास्थ्य विभाग का विज्ञापन प्रकाशित किया गया है, जबकि 17 मई 2011 को अंक संख्या 310 के पृष्ठ संख्या 16 में प्रकाशित किया गया। एक ही तिथि में प्रकाशित अंको में 1 अंक में प्रकाशित किया गया जबकि दूसरे अंक में प्रकाशित नहीं किया गया। उक्त संबंध में सूचना विभाग के संयुक्त निदेशक राजेश कुमार द्वारा समाचार पत्र से कारण स्पष्ट करने का नोटिस जारी किया गया था लेकिन दो महीने बाद भी अभी तक इस मामले में क्या कार्रवाई की गई इसका जवाब स्वास्थ्य विभाग के साथ-साथ सूचना विभाग के पास भी मौजूद नहीं है।


एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.





