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शोभना भरतिया, शशि शेखर समेत एचटी ग्रुप के कइयों को अरेस्ट करने की मांग उठी

बिहार के चर्चित आरटीआई एक्टिविस्ट, वरीय अधिवक्ता और पत्रकार काशी प्रसाद ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतिश कुमार और पुलिस महानिदेशक अभ्यानन्द से मुंगेर कोतवाली कांड संख्या- 445। 2011 के सभी अभियुक्तों की गिरफ्तारी और उनकी चल-अचल सम्पत्तियों की जब्ती की मांग कर दी है। उनका कहना है कि 200 करोड़ का दैनिक हिन्दुस्तान विज्ञापन फर्जीवाड़ा कांड बड़ा आर्थिक अपराध है। मुंगेर पुलिस ने भी अपनी पर्यवेक्षण-टिप्पणी में इस कांड को एक बड़ा आर्थिक अपराध घोषित किया है ।

बिहार के चर्चित आरटीआई एक्टिविस्ट, वरीय अधिवक्ता और पत्रकार काशी प्रसाद ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतिश कुमार और पुलिस महानिदेशक अभ्यानन्द से मुंगेर कोतवाली कांड संख्या- 445। 2011 के सभी अभियुक्तों की गिरफ्तारी और उनकी चल-अचल सम्पत्तियों की जब्ती की मांग कर दी है। उनका कहना है कि 200 करोड़ का दैनिक हिन्दुस्तान विज्ञापन फर्जीवाड़ा कांड बड़ा आर्थिक अपराध है। मुंगेर पुलिस ने भी अपनी पर्यवेक्षण-टिप्पणी में इस कांड को एक बड़ा आर्थिक अपराध घोषित किया है ।

काशी प्रसाद का कहना है कि बिहार पुलिस ने हाल के दिनों में शस्त्र-तस्करों और शराब के अवैध कारोबारियों की सम्पत्ति जब्त करने की कार्रवाई शुरू कर दी है, इसलिए बिहार पुलिस अब 200 करोड़ के दैनिक हिन्दुस्तान विज्ञापन फर्जीवाड़ा के नामजद अभियुक्तों की सम्पत्ति जब्त करने को स्वतंत्र है। उनका कहना है कि पटना उच्च न्यायालय में अभियुक्तों के द्वारा मुकदमा हार जाने के बाद बिहार पुलिस के लिए अभियुक्तों के विरूद्ध गिरफ्तारी  और उनकी सम्पत्तियों की जब्ती की काररवाई के लिए कानूनी रास्ता साफ हो गया है।

गत 17 दिसंबर को पटना उच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति माननीय अंजना प्रकाश ने अभियुक्तों के एफ0आई0आर0 रद्द करने के आवेदन पर संज्ञान लेने से साफ इन्कार कर दिया और मुंगेर पुलिस को इस कांड का अनुसंधान तीन माह में पूरा कर लेने का स्पष्ट आदेश जारी  कर दिया। पटना उच्च न्यायालय के इस ऐतिहासिक आदेश से बिहार पुलिस का मनोबल काफी बढ़ गया है और उम्मीद की जाती है कि बिहार  पुलिस अभियुक्तों के विरूद्ध ठोस काररवाई में पीछे नहीं हटेगी।

मुंगेर कोतवाली कांड संख्या-445। 2011 में नामजद अभियुक्तों में शामिल हैं-

श्रीमती शोभना भरतिया। अध्यक्ष, मेसर्स हिन्दुस्तान मीडिया वेन्चर्स लिमिटेड, नई दिल्ली।

अमित चोपड़ा।  मुद्रक और प्रकाशक, मेसर्स हिन्दुस्तान मीडिया वेन्चर्स लिमिटेड, नई दिल्ली।

शशि शेखर। प्रधान संपादक, दैनिक हिन्दुस्तान, नई दिल्ली।

अकू श्रीवास्तव। स्थानीय संपादक, दैनिक हिन्दुस्तान, पटना संस्करण, पटना।

बिनोद बंधु। स्थानीय संपादक, दैनिक हिन्दुस्तान, भागलपुर और मुंगेर संस्करण, भागलपुर।

सभी अभियुक्त भारतीय दंड संहिता की धाराएं 420, 471 और 476 और प्रेस एण्ड रजिस्ट्रेशन आफ बुक्स एक्ट,1867 की धाराएं 8 ।बी।,14 और 15 के अन्तर्गत आरोपित हैं। प्राथमिकी में सभी नामजद अभियुक्तों पर आरोप लगाया गया है कि उनलोगों ने फर्जी कागजात प्रस्तुत कर केन्द्र और राज्य सरकारों से लगभग दो सौ करोड़ रूपया  का सरकारी विज्ञापन प्राप्त कर लिया ।

इस कांड के नामजद अभियुक्तों के साथ-साथ भागलपुर स्थित प्रिंटिंग प्रेस के मालिक, दैनिक हिन्दुस्तान के मुंगेर और लखीसराय जिला मुख्यालयों में अनाधिकृत रूप से कार्यरत हिन्दुस्तान कार्यालयों के प्रबंधकों और ब्यूरों प्रमुखोंकी भी गिरफ्तारी की जा सकती है । इसके साथ-साथ अवैध ढंग सेप्रकाशित दैनिक हिन्दुस्तान के मुंगेर और लखीसराय संस्करणों को  मुंगेर और लखीसराय जिलों में वितरित करनेवाली  न्यूज एजेंसियों के मालिकों की भी गिरफ्तारी हो सकती है। वरीय अधिवक्ता बिपिन कुमार मंडल ने उच्च न्यायालय के आदेश आने के बाद अपना कानूनी तर्क दिया है कि -‘‘चूंकि पटना उच्च न्यायालय को प्रेषित जांच रिपोर्ट में मुंगेर के जिलाधिकारी कुलदीप नारायण ने स्पष्ट कर दिया है कि मुंगेर और लखीसराय जिलों में वितरित हो रहे दैनिक हिन्दुस्तान के अलग-अलग  संस्करण अवैध हैं और उन संस्करणों को अलग-अलग निबंधन नम्बर होना चाहिए था। जिलाधिकारी की इस रिपोर्ट के आलोक  में मुंगेर और लखीसराय जिलोंमें बिना निबंधन के वितरित हो रहे दैनिक हिन्दुस्तान अखबार के संस्करणों से जुड़े किसी भी  व्यक्ति को पुलिस किसी भी समय गिरफ्तार करने के लिए  अब स्वतंत्र है।’’

इस सनसनीखेज आर्थिक अपराध कांड में पुलिस उपाधीक्षक एके पंचालर और पुलिस अधीक्षक पी. कन्नन ने अपनी-अपनी ‘‘पर्यवेक्षण-टिप्पणियां’’ जारी कर दी हैं और पर्यवेक्षण -टिप्पणियों में अभियुक्तों के विरूद्ध लगाए गए सभी आरोपों को ‘‘ प्रथमदृष्टया सत्य’’ घोषित कर दिया है। अब मुंगेर पुलिस को नामजद अभियुक्तों के विरूद्ध न्यायालय में आरोप -पत्र समर्पित करना और उनकी गिरफ्तारी करना बांकी रह गया है।

मुंगेर से श्रीकृष्ण प्रसाद की रिपोर्ट.

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