कानाफूसी ये है कि भले ही उपेंद्र राय से मीडिया का काम छीन लिया गया हो लेकिन सहारा समूह में उनकी हैसियत कम नहीं हुई है. कुछ रोज पहले उपेंद्र राय के सगे भाई की शादी हुई. इस शादी में सहाराश्री सुब्रत राय सहारा ने करोड़ों रुपये पानी की तरह बहाए. शादी का आयोजन बनारस के ताज होटल में किया गया. बनारस का एक और स्टार होटल बुक था. गांव के लोग फाइव स्टार होटलों में रुकवाए गए. जमकर आवभगत की गई.
शादी होने के बाद रिसेप्शन का आयोजन दिल्ली में किया गया. इसमें लालकृष्ण आडवाणी, राजीव शुक्ला समेत दर्जनों बड़े नेता, नौकरशाह, उद्यमी शरीक हुए. शैंपेन की नदियां बही. खुद सहाराश्री सुब्रत राय सहारा यहां घंटों बैठे रहे. विरोधियों के एक गुट ने प्रचार करना शुरू किया कि शादी-रिसेप्शन पर इतना खर्च कहां से हुआ, इसकी जांच होनी चाहिए. लेकिन जब उन्हें पता चला कि यह सब सहारा की तरफ से ही प्रायोजित था, तो सबको सांप सूंघ गया.
कहने वाले कहते हैं कि सहाराश्री सुब्रत राय सहारा की यही अदा उन्हें औरों से अलग करती है. वे कभी किसी को कमतर नहीं आंकते. सबको पटा कर और चढ़ा कर रखते हैं. सहारा के समक्ष जितने तरह की चुनौतियां हैं, उससे निपटने के लिए उन्हें ढेर सारे उपेंद्र राय चाहिए. तो, मीडिया की जिम्मेदारी छीन लिए जाने से किसी को यह नहीं सोचना चाहिए कि उपेंद्र राय की हैसियत कम हो गई. उपेंद्र राय का जलवा कायम है, उनके भाई की शादी से यही एहसास हुआ. उपेंद्र राय के भाई की शादी में सहाराश्री ने करोड़ों रुपये बहाए!





