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मैं व्यर्थ ही ‘कई सम्मान से सम्मानित महान साहित्यकार विभूति नारायण राय’ के खिलाफ लिखता-बोलता हूं

Sanjeev Chandan : कभी-कभी लगता है कि मैं व्यर्थ ही "कई सम्मान से सम्मानित महान साहित्यकार विभूति नारायण राय' के खिलाफ लिखता -बोलता हूँ। सूत्रों की माने तो तब जबकि युवाओं की बेरोजगारी चरम पर है उन्होंने अपने वि वि के सहायक कुलसचिव पद पर होने वाला साक्षात्कार इसलिए टलवा दिया कि आगे उसे पुनः विज्ञापित कर वे एक बेरोजगार युवा को नियुक्त कर सकें और उसकी शादी के मार्ग में आने वाली बाधा दूर कर सकें।

Sanjeev Chandan : कभी-कभी लगता है कि मैं व्यर्थ ही "कई सम्मान से सम्मानित महान साहित्यकार विभूति नारायण राय' के खिलाफ लिखता -बोलता हूँ। सूत्रों की माने तो तब जबकि युवाओं की बेरोजगारी चरम पर है उन्होंने अपने वि वि के सहायक कुलसचिव पद पर होने वाला साक्षात्कार इसलिए टलवा दिया कि आगे उसे पुनः विज्ञापित कर वे एक बेरोजगार युवा को नियुक्त कर सकें और उसकी शादी के मार्ग में आने वाली बाधा दूर कर सकें।

सूत्र बताते हैं कि स्क्रूटिनी कर्ता नागपुर के एक पूर्व प्रोफ़ेसर ने उसका नाम साक्षात्कार के योग्य नहीं पाया था। इससे युवक को अपना दामाद बनाने के लिए तत्पर एक प्राध्यापक स्क्रूटिनीकर्ता से नाराज हो गए। विभूति ने उन प्राध्यापक महोदय को दो साल पहले ही प्रोफ़ेसर बनाया है और अब उनके घर और बेटी की भी चिंता कर रहे हैं– है न महानता ! अब भाई लोग इसमें भी विभूति, प्रोफ़ेसर और युवक की जाति देखने लगें , उनकी कुण्डली मिलाने लगें तो यह उनकी निकृष्टता होगी। निकृष्ट तो वे तब भी थे जब ' छिनाल प्रकरण' के दौरान विभूति के पक्ष में बाहर -भीतर सक्रिय लोगों की वे जाति देखते रहे।

विभूति महान हैं , तो हैं, मुझे और मेरे जैसों को मान लेना चाहिए। हम व्यर्थ ही कुलसचिव महोदय की चिंता में मरे जा रहे हैं, जो फरवरी में रिटायर हो रहे हैं और अपने अमरावती कनेक्शन से 'छिनाल प्रकरण ' के दौरान विभूति की जान बचाने की कीमत के तौर पर अपने बेटे की नियुक्ति इस पद पर चाह रहे थे और सूत्रों के अनुसार बेरोजगार युवक का नाम स्क्रूटिनी से हटवाने की साजिश में शामिल थे। विभूति अपने ऊपर किये गए उपकार का बदला उन्हें जरूर चुकायेंगे . उन्होंने क्या अपने ऊपर पी एच डी करने वाली महिला के पति को प्रोफ़ेसर नहीं बनाया है ! क्या अपने किताब का असमिया अनुवाद करने वाले को उन्होंने सहायक कुलसचिव नहीं बनाया है …! विभूति कृतज्ञ है, विभूति महान हैं, हम जैसे उनके विरोधी ही उनके खिलाफ व्यर्थ साजिश करने में लगे रहते हैं। जाते साल में मेरा आत्मज्ञान कैसा लग रहा है आपको ….. देर आयद दुरुस्त आयद ……

संजीव चंदन के फेसबुक वॉल से साभार. लेफ्ट अंबेडकराइट विचारधारा रखने वाले संजीव चंदन वर्धा में ही रहते हैं. उनके संपर्क 09850738513 के जरिए किया जा सकता है. फेसबुक पर उन्हें www.facebook.com/sanjeev.chandan के जरिए पा सकते हैं.

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