: कानाफूसी : इन दिनों सहारा मीडिया के नए नए साहब और सर्वेसर्वा बनकर आए संदीप बाधवा की सहाराइटों में खूब चर्चा है. उनके बारे में बताया जा रहा है कि वे सहाराश्री सुब्रत राय सहारा के पुत्र सुशांतो राय की पत्नी के सगे या दूर के भाई हैं. यानि मामला घर का है. दूसरे, बाधवा विदेशों में कारोबार और विदेशी पूंजी के मामले के अच्छे एक्सपर्ट भी है. सहाराश्री की प्रियारिटी इन दिनों ज्यादा से ज्यादा बाहरी पैसा अपने समूह में लगवाने की है ताकि कई तरह के संकटों से निपटा जा सके.
इस कारण विदेशी पूंजी व विदेशी कारोबार के विशेषज्ञ संदीप वाधवा को मीडिया की कमान दे दी गई है. चूंकि उनके पास विदेशी पूंजी और विदेशी टाइअप समेत ढेर सारे झमेले होंगे इसलिए वे सीधे तौर पर मीडिया के रोजाना व नीतिगत कार्यों को नहीं देख पायेंगे. सो, उनके हवाले से सारा कामधाम राव वीरेंद्र सिंह देखा करेंगे. जो सर्कुलर जारी हुआ है उसमें कहा गया है कि राव वीरेंद्र सिंह को संदीप वाधवा को असिस्ट करने की जिम्मेदारी दी गई है.
मतलब ये कि मीडिया का काम कहने को संदीप वाधवा देखेंगे लेकिन असल में राव वीरेंद्र सिंह देखेंगे और संदीप वाधवा पूरा जोर सहारा मीडिया में विदेशी पूंजी लाने में लगायेंगे. चर्चा है कि सहारा मीडिया के साथ इंग्लैंड के एक मीडिया हाउस का टाइअप होने जा रहा है. इस टाइअप के माध्यम से भारत में एक अंग्रेजी चैनल और बिजनेस चैनल सहारा मीडिया की तरफ से लांच किया जा सकता है. ऐसे ही सहारा के प्रिंट व टीवी के चल रहे बिजनेस के लिए विदेशी पार्टनर तलाशने पर जोर दिया गया है ताकि नगद पैसा सहारा के पास आ सके.
इन्हीं सब कारणों के चलते सहाराश्री ने उपेंद्र राय को सहारा के मीडिया सेक्शन से अप्रत्यक्ष तौर पर हटाकर सहारा समूह के भारत के कामधाम के सामने आने वाली चुनौतियों से निपटने की जिम्मेदारी दी है. चूंकि उपेंद्र राय अपनी उर्जा मीडिया हेड होने के नाते पाते हैं, इसलिए बतौर एडिटर इन चीफ उनका नाम हर जगह जाता रहेगा, उनके कालम वगैरह छपते रहेंगे ताकि उपेंद्र राय की मार्केट में स्थिति पहले जैसी मजबूत बनी रहे. हालांकि सहारा के अंदर एक लाबी कोशिश में है कि उपेंद्र राय को मीडिया के कामधाम में किसी भी तरह से हस्तक्षेप करने से रोका जाए और उनका नाम भी अखबार आदि से हटवा दिया जाए. देखना है कि ये कोशिश सफल होती है या नहीं.





