मुकेश भारतीय : आज साल-2012 का अंतिम दिन है। यह मेरे लिये आत्म-चिंतन का दिन है। 2012 मानसिक-शारीरिक तौर पर बड़ा पीड़ादायक रहा, फिर भी चेहरे पर मायूसी को फटकने न दिया। 2012 में व्यवस्था के प्रति मन में अविश्वास उत्पन्न हुआ। सत्ता-माफिया-पुलिस-मीडिया के धुरंधरों ने जबरन 15 लाख का रंगदार बना कर जेल भिजवाया। क्या ये लोग किसी को कभी भी कुछ भी बना सकते सकते हैं ? मलाल की बात है कि रांची की मीडिया ने अपना काम ईमानदारी से नहीं किया। उसने सच की परिभाषा ही बदल दी।
आईपीएस अफसर भी माफियाओं के आदेशपाल बने दिखे। सब कुछ हौच-पौच लगा। अब 2013 सामने है। अब न किसी से गिला और न किसी से कोई शिकवा। अब बस दिलोदिमाग में एक ही जुनून- हर उस लकीर के सामने बड़ी लकीर खींचने की, जो मेरे मार्ग में बाधक बने। अब सभी मित्रों के साथ नव वर्ष की ढेर सारी मंगलकारी शुभकामनाओं के साथ कल नये वर्ष में बात-मुलाकात होगी।
मुकेश भारतीय के फेसबुक वॉल से. मुकेश भारतीय वेब पत्रकारिता के जरिए झारखंड की भ्रष्ट मीडिया से लेकर अफसरों, नेताओं की पोल खोलते रहे और इसी कारण उन्हें साजिशन गिरफ्तार किया गया और प्रताड़ित किया गया.





