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जाने-माने पत्रकार पुण्य प्रसून बाजपेयी ने जी न्यूज को अलविदा कहा

साल के आखिरी दिन मीडिया जगत में धमाके पर धमाका हो रहा है. ताजी सूचना जी न्यूज से है. अंदरुनी सूत्रों के मुताबिक जी न्यूज से करीब चार वर्षों से ज्यादा समय के अपने जुड़ाव को खत्म करते हुए मशहूर पत्रकार पुण्य प्रसून बाजपेयी ने अपना इस्तीफा प्रबंधन को सौंप दिया है. समकालीन पत्रकारिता में पुण्य प्रसून बाजपेयी को खर बोलने और सरोकार पत्रकारिता के लिए अडिग रहने वाला पत्रकार माना जाता है.

साल के आखिरी दिन मीडिया जगत में धमाके पर धमाका हो रहा है. ताजी सूचना जी न्यूज से है. अंदरुनी सूत्रों के मुताबिक जी न्यूज से करीब चार वर्षों से ज्यादा समय के अपने जुड़ाव को खत्म करते हुए मशहूर पत्रकार पुण्य प्रसून बाजपेयी ने अपना इस्तीफा प्रबंधन को सौंप दिया है. समकालीन पत्रकारिता में पुण्य प्रसून बाजपेयी को खर बोलने और सरोकार पत्रकारिता के लिए अडिग रहने वाला पत्रकार माना जाता है.

सुधीर चौधरी और समीर अहलूवालिया की गिरफ्तारी के प्रसंग के बाद जब जी न्यूज प्रबंधन ने पुण्य को पूरे प्रकरण को मीडिया की आजादी से जोड़ने और सरकार द्वारा मीडिया पर अंकुश लगाकर इमरजेंसी जैसे हालात पैदा करने का स्टैंड लेते हुए एंकरिंग करने को कहा तो पुण्य ने जी न्यूज से खुद को अलग कर लिया और अवकाश पर चले गए थे. आज पुण्य ने विधिवत रूप से अपना इस्तीफा सौंप दिया है. ऐसा कम देखा गया है जब कोई पत्रकार अपने स्टैंड व सरोकार को लेकर खुद को मीडिया हाउस से अलग कर ले. पुण्य प्रसून बाजपेयी से जुड़े लोगों का कहना है कि पुण्य पूरे प्रकरण पर किताब भी लिख सकते हैं ताकि जी न्यूज में पर्दे के पीछे चले घटनाक्रमों को दुनिया के सामने ला सकें.

पुण्य प्रसून बाजपेयी टीवी के ऐसे पत्रकार हैं जो अपने सरोकारी व वैचारिक पत्रकारिता को जीते हुए भी खूब टीआरपी लाते हैं. उनका प्रोग्राम चाहे आजतक में चला हो या जी न्यूज में, उसे खूब दर्शक व टीआरपी मिलते हैं. कह सकते हैं कि पुण्य अपने दम पर अपने शो को न सिर्फ हिट करा ले जाते हैं बल्कि दर्शकों को सोचने व समझने के लिए कई सवाल छोड़ जाते हैं. वे अपने कार्यक्रमों के जरिए दर्शकों को सत्ता-सिस्टम के खेलों के प्रति शिक्षित करते हैं, सचेत करते हैं.

जी न्यूज के साथ पुण्य ने अपनी पारी वर्ष 2008 में एक मई यानि मजदूर दिवस के दिन शुरू की थी. उसी साल 8 मई को जी न्यूज रि-लांच हुआ था. जी न्यूज में 'बड़ी खबर' पेश करते थे पुण्य. इस प्रोग्राम को देखने के लिए लोग इंतजार करते थे. पुण्य आजतक में रहे तो 'दस्तक', सहारा में रहे तो 'मास्टर स्ट्रोक', एनडीटीवी में रहे तो 'खबरों की खबर' पेश करते थे. इन चारों चैनलों में उनके इन वैचारिक कार्यक्रमों की टीआरपी चैनल के एवरेज टीआरपी से ज्यादा होती थी. मतलब ये कि टीआरपी के लिए आपको पतित होना ही पड़ेगा, इस नारे को न सिर्फ पुण्य ने चुनौती दी बल्कि यह करके दिखाया कि आप मिशन और सरोकार के बल पर भी अच्छी टीआरपी ला सकते हैं. आप गंभीर विषयों पर चर्चा-विश्लेषण-परिचर्चा-संबोधन करके भी चैनल को अच्छी टीआरपी दिला सकते हैं.

पुण्य प्रसून बाजपेयी के करियर, सोच, जीवन आदि के बारे में आप ज्यादा जानकारी कई वर्ष पहले लिए गए इस इंटरव्यू से पा सकते हैं…

पुण्य इंटरव्यू

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