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हनी सिंह के खिलाफ एफआईआर की ये है कॉपी

: Copy of FIR against Honey Singh : सेवा में, थाना प्रभारी, थाना गोमतीनगर, जनपद लखनऊ, विषय- श्री हनी सिंह नामक एक गायक द्वारा गाये गए और खुलेआम प्रसारित होने वाले अत्यंत भद्दे, अश्लील, स्त्री की लज्जा का अनादर करने वाले गानों के सम्बन्ध में प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करने हेतु…

: Copy of FIR against Honey Singh : सेवा में, थाना प्रभारी, थाना गोमतीनगर, जनपद लखनऊ, विषय- श्री हनी सिंह नामक एक गायक द्वारा गाये गए और खुलेआम प्रसारित होने वाले अत्यंत भद्दे, अश्लील, स्त्री की लज्जा का अनादर करने वाले गानों के सम्बन्ध में प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करने हेतु…

महोदय, कृपया अनुरोध है कि मैं अमिताभ ठाकुर (स्थायी पता- निवासी 5/426, विराम खंड, गोमती नगर, लखनऊ) पेशे से एक आईपीएस अधिकारी हूँ. मैं आपके समक्ष एक पंजाबी गायक श्री हनी सिंह द्वारा अन्य लोगों, जिनके नाम श्री बादशाह, श्री दिलजीत दोसांझ बताए जाते हैं, के साथ मिल कर गाये कुछ ऐसे गानों के बोल इस प्रार्थनापत्र के साथ संलग्न पर प्रस्तुत कर रहा हूँ जो अश्लीलता, भद्देपने, ओछेपन, गंदेपन की समस्त सीमाओं को पार करते हैं. इनमे एक गाना “मैं हूँ बलात्कारी” तथा दूसरा “केंदे पेचायिया पिन्दान ने तेरी मारी” है. इन दोनों गानों के बोल को पढ़ने मात्र से यह साबित हो जाता है कि ये अत्यंत अश्लील, गंदे और अशिष्ट हैं और इस प्रकार आपराधिक कृत्य के अंतर्गत आते हैं.

मैंने स्वयं इन गानों के बोल देखे हैं और इनमें कुछ गानों को सुने भी हैं जिनके आधार पर मैं कहता हूँ कि ये गाने अत्यंत अश्लील, उत्तेजक और अभद्र होने के कारण आईपीसी की विभिन्न धाराओं 292, 293,294 तथा 509 आईपीसी के अंतर्गत अपराध की श्रेणी में आते हैं. इस प्रकार के गाने समाज में महिलाओं के प्रति असम्मान तथा गंभीर अपराध बढाने के उत्प्रेरक का भी कार्य करते हैं और सामाजिक रूप से पूर्णतया वर्जित प्रकार के हैं जिनका समाज पर मात्र बुरा असर ही पड़ता है.

अतः इस प्रकार महिलाओं के प्रति घृणित शब्दावली का प्रयोग कर महिलाओं के प्रति अपराध को उत्प्रेपित करने वाले अश्लील गाना गाने और अन्य प्रकार से संबद्ध हो कर लाभ कमाने वाले लोग किसी भी प्रकार की सहानुभूति के पात्र नहीं हो सकते और इनके विरुद्ध कठोरतम कानूनी कार्यवाही किया जाना नितांत आवश्यक है.

अतः मैं आपसे प्रार्थना करता हूँ कि उपरोक्त आपराधिक कृत्य के संज्ञेय अपराध होने के कारण धारा 154 सीआरपीसी के अंतर्गत इनके सम्बन्ध में उपयुक्त तथा विधिसम्मत धाराओं में प्रथम सूचना रिपोर्ट अंकित कर आवश्यक कार्यवाही करने की कृपा करें. मैं विशेषकर निवेदन करूँगा कि महिलाओं के प्रति किये गए इस इस अत्यंत गंभीर अपराध के सम्बन्ध में एफआईआर दर्ज नहीं किया जाना संभवतः स्वयं भी एक गंभीर अपराध होगा.

भवदीय,

पत्र संख्या- AT/HS/Song/01
(अमिताभ ठाकुर)
दिनांक- 31/12/2012 5/426, विराम खंड,
गोमती नगर ,
लखनऊ
94155-34526

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