Connect with us

Hi, what are you looking for?

No. 1 Indian Media News PortalNo. 1 Indian Media News Portal
Local News Community

प्रिंट-टीवी...

आज शाह सर (रवींद्र शाह) का जन्मदिन है : कुछ किस्से, कुछ यादें

दिन आज-कल के ही थे। ठीक एक साल पहले ठण्ड भी कुछ ऐसी ही थी। इंदिरा नगर के पत्रकार विहार का मकान नम्बर 702। रात के आठ-साढे आठ बज रहे थे। शाह सर मिक्सी में हरी मिर्च-धनिया-देसी टमाटर की चटनी पीस चुके थे। आधा नींबू काटकर निचोड़ रहे थे। थोड़ा उचक्कर उन्होंने रसोई की अलमारी से नीले कांच के दो गिलास निकाले और टीचर्स उड़ेलते हुए बोले-

दिन आज-कल के ही थे। ठीक एक साल पहले ठण्ड भी कुछ ऐसी ही थी। इंदिरा नगर के पत्रकार विहार का मकान नम्बर 702। रात के आठ-साढे आठ बज रहे थे। शाह सर मिक्सी में हरी मिर्च-धनिया-देसी टमाटर की चटनी पीस चुके थे। आधा नींबू काटकर निचोड़ रहे थे। थोड़ा उचक्कर उन्होंने रसोई की अलमारी से नीले कांच के दो गिलास निकाले और टीचर्स उड़ेलते हुए बोले-

हुंम्म… देखो ठीक है या थोड़ा और…

मैंने बथुआ के परांठे पर घी छोड़ते हुए कहा, क्या सर अभी तो तीस एमएल भी नहीं हुआ है…

नहीं-नहीं चालीस से ज्यादा है, तुम कहो तो तुम्हारा बड़ा बना दूं…

यह कहते हुए उन्होंने एक गिलास मेरे आगे बढ़ाया और तवे से परांठा उतारा कर झट से दो हिस्सों मे बांट दिया। प्लेट सरकाते हुए बोले बथुआ का परांठा तो गरमगरम ही अच्छा लगता है…यार, खाते जाओ और सिप करते जाओ…

चीयर्स और पहला सिप  अंदर…वाह मजा आ गया…उन्हें जैसे कुछ याद आया बोले-यार फ्रिज में दही भी रखा है…वो दही निकाल कर लाए… काली मिर्च नमक मसाला डाला, चम्मच से थोड़ा फेंट कर बोले, लो इसके साथ खाओ…और मजा आ आएगा…

मैंने पूछा और आप !

नहीं यार मुझे तो जुकाम है, और वो फिर सलाद काटने में लग गए…

सिप करते हुए हम लोग किस्सागोई में खो गए… किस्से, मालिकों के दीमागी हरम के थे …गोकि हम खुद ही उस हरम का एक हिस्सा थे लेकिन एमसीबीसी उन मालिककुन लोगों की कर रहे थे…टीचर्स के सुरूर में किस्से और कह-कहों का स्वाद भी सबसे निराला होता है।

चार-पांच परांठे बन चुके थे। पहला पैग भी खत्म, पैंमाने साकी को और मैं सलाद बना रहे की शाह सर की लय को देख रहा था।

हरी मिर्च को बीच  से चीर कर, उसमें नमक-मसाला  भरना और फिर उसको नींबू  के रस में डुबो कर रखना…खीरा, गाजर, मूली और अदरक को करीने  से छीलना-काटना, प्लेट में सजा कर रखना फिर उसके ऊपर बारीक कटे हुए हरे धनिये की पत्तियों से गारनिशिंग करना…उनके ये काम ऐसे कि जो देखे बस एकटक देखता रह जाए…

नमक मसाले में लिपटी  और नींबू के रस में डूबी हरी मिर्च शाह सर खास  तौर पर मेरे लिए तैयार  करते थे। मक्खन-कालीमिर्च के स्वाद वाले पॉपकार्न, खास इंदौरी सेव, दाल मुरादाबादी और भी कई तरह की नमकीन हमारी कालीन पर थी।

परांठे हॉटकेस से निकालते हुए बोले, भई अमित का जन्मदिन तो बीत गया…लेकिन  कुछ और भी तैयारियां करनी हैं… ‘बालिया’ से ही पैसे मिल जाते तो काम बन जाता…वो साला मामला हर बार अगले शनिवार को टल जाता है…इस बार मैंने तुमसे कहा था न कि शनिवार को मैं व्यस्त हूं। बस, सुबह से शाम तक फोन लगाता रहा…फोन ही नहीं उठाया…पूरा दिन बर्वाद हो गया।

दूसरे पैग  का आखिरी सिप लेते हुए  बोले,  तुम बताओ क्या कह रहे हैं दीक्षित जी ? कौन सा नया प्रोजेक्ट शुरु कर रहे हैं…अपनी अय्याशी करने के लिए पैसे हैं साले लेकिन किसी और को न मिल जाएं…हुंम्म्, क्यों, पार्टी-शार्टी नहीं दी इस बार नये साल की…

क्या पार्टी सर…बिजली का कनेक्शन नहीं है और जनरेटर में डीजल डलवाने के लिए पैसे नहीं हैं। दो हजार के डीजल से आठ घण्टे रोशनी हो जाती है…रोजाना इंतजार करना पड़ता है कब बसंतकुंज से दो हजार आएं तो डीजल आए, फिर जनरेटर चले और फिर ऑफिस में बैठा जाए…वैसे भी अधिकांश लोगों ने आना बंद कर दिया है, जो आते हैं वो हाजिरी भरते हैं गाली-गलौज करते हैं, सुननी मुझे पड़ती है… दिन में कभी-कभार एक आध बुलेटिन करवा लेता हूं सर…

मेरी बात पूरी होने से पहले बोले, यही चूतियापा करते हो…यही वजह कि उसे लग रहा है कि चैनल तो चल ही रहा है। स्टाफ की सेलरी भले ही अट्ठारह महीने की रुक जाए…लेकिन साला चैनल चलता रहे…

मैंने भी झुंझलाते हुए कहा- कहां चैनल चल रहा है… चैनल बंद हो गया है… इसरो ने भी अपलिंकिंग-डाउनलिंकिंग बंद कर दी है…बार-बार पॉवर सप्लाई ऑन-ऑफ होने से सारे सर्वर खराब हो गए हैं…फीड, एफटीपी है नहीं, यूनिट निकले एक जमाना हो गया है…सुरेश को बुलाकर एक जुगाड़ करवाया है, बस उसी से थोड़े-थोड़े विजुवल अलग चैनलों के सीधे एफसीपी पर इंजस्ट करवा देता हूं…उन्हीं को देख-सुन कर स्क्रिप्ट लिखवानी पड़ती है, कोई एंकर भी नहीं है…जरीन भी साधना जा चुकी है। कभी-कभी तो नेहा को बैठाकर बुलेटिन करवाना पड़ता है…

इशारों ही इशारों में सहमति ले-देकर अगला पैग बनाते और खाना परोसते हुए बोले- अरे, भई ! ऐसा तो होता नहीं है, जब तुम्हारे पास कुछ है नहीं तो क्यों निकाल रहे हो बुलेटिन…बिना तनख्वाह लोगों से काम करवाओगे तो गालियां खाओगे ही… और फिर आदतन जोर से हंसे।

उनकी उस हंसी में कोई कटाक्ष नहीं बल्कि वो दर्द छुपा था, जिसे वो खुद भी जानते थे और मैं  भी…फिर हम दोनों साथ-साथ  हंसे…हमने बिना कुछ कहे-सुने ही समझ लिया कि हमारी स्थिति उस भेड़ जैसी है जिसके शरीर पर बाल उगते ही हैं तमाम दूसरे लोगों की जरूरत पूरी करने के लिए…

गहरी ठण्डी  लंबी सांस छोड़ते हुए पूछा- एक और बनाऊं क्या… और फिर  मेरा जबाब सुने बिना ही बोले देख लो, तुम्हें घर भी जाना है कार चलाकर…

मैं भी घाग था, बोला बना ही दीजिए लेकिन अपना भी बनाइए…

नहीं-नहीं मैं अब नहीं लूंगा यार, तुमने सुना नहीं, जबाब देना पड़ेगा कितने पैग पिये…

माइक लेकर हाथ उठाए बोलते रवींद्र शाह : फाइल फोटो


(हमारे बनाने-पीने-खाने के बीच फोन कॉल्स भी  आ रही थीं…कभी वो मुझे  चुप रहने का इशारा करते  तो कभी दूसरी कॉल पर  मजाक में कहते, वही तो आया है दढियल उसी की वजह से पीनी पड़ रही है, लेकर आ गया तो क्या करता। जबकि सच्चाई यह है कि अपनी पसंदीदा शराब के अलावा न जाने कितनी तरह की देसी-विदेशी व्हिस्की, वाइन, रम, शैमपेन को मैंने शाह सर के घर पर ही चखा)

फोन पर कौन  सा एल्कोहल मीटर लगा होता है सर… कहते हुए टीचर की बोतल मैंने अपने हाथ में ली और उनके गिलास में उडेल दी, इससे पहले वो कुछ और कहते पानी भर दिया।

हंसते हुए बोले-तेरी ही शामत आएगी।

कोई बात नहीं सर… मैंने और उन्होंने एक साथ लंबा सिप लिया….।

प्लेट में  नींबू के रस में डूबी एक हरी मिर्च अभी बाकी थी। मैंने सिप लेने के बाद काजू, अदरक, इंदौरी सेव और नींबू की पत्तियों का कॉकटेल बनाया और जैसे ही मुंह में डाला शाह सर बोले-

क्यों आज लग गई सुबह से पहले ही, इसे खत्म नहीं करोगे… मिर्च की प्लेट की तरफ इशारा करते हुए बोले.

मुझे तीखी हरी मिर्च बहुत अच्छी  लगती है…शरारतन वो सबसे तीखी मिर्च ढूंढकर लाए थे और मौके की तलाश में थे कि कब मेरा धुआं निकले और वो चुटकी लें…

सच में, मिर्च, मेरी सोच से ज्यादा तीखी थी, इसलिए मैं सलाद-नमकीन का ऐसा कॉम्बिनेशन ले रहा था जिससे मेरा स्वाद बना हुआ था…उनकी चुटकी पर मैंने तपाक से कहा- अररे सर, अभी पैग तो पूरा बाकी है। अगला सिप लेने के बाद पूरी मिर्च एक साथ कचर-कचर चबा गया…

इस तरह  मुझे मिर्च चबाते देख, उनके चेहरे के भाव बदल गए, गिलास  कालीन पर रखने के बजाए वो हाथ ही में पकड़े रह गए, उन्हें लगा कि मैं उनकी चुटकी से आहत हो गया, या मेरे अहंकार को तोड़ कर उनसे कोई गलती हो गई…

गलती तो वास्तव में  मुझसे हुई थी…मैं अपने अहंकार को और मजबूत करने के लिए स्वाद से ज्यादा तीखी मिर्च एक साथ चबा गया था…

बहरहाल, शाह सर 47-48 साल की उम्र में भी 18-20 साल के लड़कों जैसी शरारात कर लेते थे। वर्षा मैम, जब भी दिल्ली आती और घर पर बोतलें देख कर पूछती तो वो बड़े ही सहज भाव से कहते-

“दढियल की हैं सब…बहुत बड़ा ज्ञानी-ध्यानी बनता है न सबके सामने, घर ले जाएगा तो जूते खाएगा। इसलिए यहां रख जाता है। दोस्तों के पास राजीव शर्माइसलिए नहीं छोड़ता कि वो खुद पी जाएंगे। यहां सुरक्षित मिल जाती है। ‘दोस्तों’ के लिए उनका इशारा सुधीर और अरुण तिवारी की तरफ होता था”

बकौल वर्षा मैम, पिछले लगभग पांच साल से तो शाह सर दढ़ियल के नाम से पीते-पिलाते आ रहे थे…। बाकी फिर कभी…..

लेखक राजीव शर्मा कई अखबारों और चैनलों में वरिष्ठ पदों पर रहे हैं. इन दिनों साधना न्यूज के हिस्से हैं.


यादों में रवींद्र शाह

Pahad Ki Dada: Hill Mail Uttarakhand
CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

… अपनी भड़ास [email protected] पर मेल करें … भड़ास को चंदा देकर इसके संचालन में मदद करने के लिए यहां पढ़ें-  Donate Bhadasमोबाइल पर भड़ासी खबरें पाने के लिए प्ले स्टोर से Telegram एप्प इंस्टाल करने के बाद यहां क्लिक करें : https://t.me/BhadasMedia 

Advertisement

You May Also Like

विविध

Arvind Kumar Singh : सुल्ताना डाकू…बीती सदी के शुरूआती सालों का देश का सबसे खतरनाक डाकू, जिससे अंग्रेजी सरकार हिल गयी थी…

विविध

: काशी की नामचीन डाक्टर की दिल दहला देने वाली शैतानी करतूत : पिछले दिनों 17 जून की शाम टीवी चैनल IBN7 पर सिटिजन...

विविध

पहली बार चुनाव हमने 1967 में देखा था. तेरह साल की उम्र में. और अब पहली बार ऐसा चुनाव देख रहे हैं, जो इससे...

विविध

राजस्थान, कांग्रेस और सेक्स. ये तीन शब्द लगता है आपस में अच्छे से घुल मिल गए हैं. भंवरी कांड में ये तीनों शब्द जुड़े...