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बनारस के कई पत्रकारों ने सस्ते दर पर मिले प्लाट को बेच कर लाखों कमाया

वाराणसी के पत्रकारों के लिए लम्बे संघर्ष के बाद चुप्पेपुर पत्रकारपुरम आवासीय योजना के तहत सैकड़ों पत्रकारों को प्लाट आवंटित हुए। पत्रकार संघ के निवर्तमान अध्यक्ष विकास पाठक, प्रदीप कुमार आदि ने इसे मूर्त रूप देने के लिए लम्बी लड़ाई लड़ी और अंतत: लोगों को महज लगभग 4 लाख में दो सौ वर्गफीट के प्लाट आवंटित हुए। आवंटन के समय ही लोगों को यह महसूस हो चुका था कि तमाम लोग पत्रकारों की आड़ में सस्ते प्लाट लेकर महंगे दामों पर बेचने के जुगाड़ में हैं। इसे रोकने के लिए बाकायदा रजिस्ट्री के समय बीस वर्षों तक प्लाट न बेचने का अनुबंध भी खरीदारों से हुआ था पर इसकी खुलेआम धज्ज्यिां उड़ रही हैं।

वाराणसी के पत्रकारों के लिए लम्बे संघर्ष के बाद चुप्पेपुर पत्रकारपुरम आवासीय योजना के तहत सैकड़ों पत्रकारों को प्लाट आवंटित हुए। पत्रकार संघ के निवर्तमान अध्यक्ष विकास पाठक, प्रदीप कुमार आदि ने इसे मूर्त रूप देने के लिए लम्बी लड़ाई लड़ी और अंतत: लोगों को महज लगभग 4 लाख में दो सौ वर्गफीट के प्लाट आवंटित हुए। आवंटन के समय ही लोगों को यह महसूस हो चुका था कि तमाम लोग पत्रकारों की आड़ में सस्ते प्लाट लेकर महंगे दामों पर बेचने के जुगाड़ में हैं। इसे रोकने के लिए बाकायदा रजिस्ट्री के समय बीस वर्षों तक प्लाट न बेचने का अनुबंध भी खरीदारों से हुआ था पर इसकी खुलेआम धज्ज्यिां उड़ रही हैं।

4 लाख का प्लाट आज 35 लाख में बेचकर लोग मालामाल हो रहे हैं और पत्रकार कालोनी में लगभग 1 दजर्न से ज्यादा गैर पत्रकारों ने कब्जा जमा लिया है। यह बात अलग है कि निवर्तमान अध्यक्ष योगेश गुप्त जनसूचना से ऐसे पत्रकारों की सूची ले चुके हैं जिन्होंने अपना प्लाट बेच दिया है। आज तक पत्रकारों के नाम पर विकास के लिए सांसद निधि, विधायक निधि तथा अन्य स्रोतो से करोड़ों रुपये सीवर, सड़क, पानी, बिजली आदि के लिए आवांटित कराया गया पर हर समस्या ज्यों की त्यों बनी है। पत्रकारों ने महसूस किया कि पत्रकारपुरम विकास के नाम पर करोड़ों रुपये मिले तो जरूर पर कहां खर्च हुए। कहीं अन्य घोटलों की तरह यहां भी बन्दर बांट तो नहीं हो गया। आज भी विकास के नाम पर न तो सीवर चालू है और न ही विद्युतीकरण हुआ है। पार्क भी खाली पड़े हैं।

इन तमाम समस्याओं से निजात पाने के लिए वरिष्ठ पत्रकार व कांग्रेसी नेता धर्मेन्द्र सिंह ने पत्रकारों की एक बैठक बुलायी जिसमें विकास कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए एक समिति का गठन हुआ। इसका संयोजक राकेश चतुर्वेदी को बनाया गया। समिति की रूपरेखा तय करने के लिए उपजा के अध्यक्ष विनोद बागी, धर्मेन्द्र सिंह, अजय राय, चेतन उपाध्याय को शामिल किया गया। बैठक में वरिष्ठ पत्रकार डॉ. दयानन्द, संघ व प्रेस क्लब के पूर्व अध्यक्ष विकास पाठक, सुरेश प्रताप, अरविन्द सिंह, प्रमिला तिवारी आदि लोग उपस्थित रहे।

इस बैठक से इतना तो स्प्ष्ट हो गया कि पत्रकार संघ के वर्तमान पदाधिकारियों से अब वरिष्ठ पत्रकारों का भरोसा व विश्वास लगभग समाप्त हो चुका है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पत्रकारों के नाम पर आवंटित 4 लाख का प्ला‍ट 35 लाख में बेचे गये। इस बारे में वाराणसी विकास प्राधिकरण के कर्मचारी श्री काशी बाबू ने बताया कि इनकी संख्या अब तक लगभग 15 के आस-पास है जिनमें बड़े प्लाटों के अलावा छोटे व बीच वाले भी हैं। जिनके नाम अब तक प्रकाश में आये उनमें राजीव अरोड़ा (संपादक गाण्डीव), डॉ. राधारमण चित्रांशी (उपजा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष व वाराणसी इकाई के अध्यक्ष तथा पूर्व पत्रकार गाण्डीव), पदमपति शर्मा (पूर्व खेल पत्रकार व पत्रकारिता के गुरु श्री योगेश के पत्रकारिता गुरु), स्नेह रंजन (पूर्व आरई सहारा), अनूप कुमार शील ‘पिन्टू’ (फोटो पत्रकार), विक्रांत दूबे (IBN7 कोलकाता), नरेश रुपानी, एस. के. शर्मा, बालजीत सिंह, कुमार अजय (दैनिक जागरण), बृजेश चन्द यादव, शैलेन्द्र नाथ श्रीवास्तव, पुरुषोत्तम चतुर्वेदी (लाइव इण्डिया) आदि नाम प्रमुख हैं।

इनपुट – क्लाउन टाइम्स

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