लखनऊ से खबर है कि राज्य संपत्ति विभाग की तरफ से करीब 53 पत्रकारों को नोटिस जारी किया गया है. नोटिस में उनसे मकान खाली करने को कहा गया है. पहले तीस लोगों को नोटिस जारी किया गया. फिर तेइस लोगों को. इनमें से दर्जन भर से ज्यादा पत्रकारों ने जवाब देकर बता दिया है कि वे अवैध रूप से नहीं बल्कि सही तरीके से मकान पर काबिज हैं. पर करीब 45 ऐसे पत्रकार हैं जिन्होंने अभी कोई जवाब नहीं दिया है और ये गैर-कानूनी तरीके से मकान पर काबिज हैं.
इनमें से कई ऐसे लोग हैं जो अभी पत्रकार नहीं रह गए हैं, किसी अखबार या मैग्जीन या टीवी में कार्यरत नहीं हैं, लखनऊ में नहीं रहते हैं. ऐसे लोगों से सरकार मकान खाली कराने के मूड में है. कई तो ऐसे हैं जिन्हें एक या दो साल के लिए मकान आवंटित किया गया था लेकिन अवधि पूरी होने के बाद भी वे बिना रिनुवल के मकान में जमे हुए हैं. कुछ लोगों को मान्यता खत्म हो चुकी है पर मकान उन्हीं के कब्जे में है. एक खास बात यह है कि नोटिस पाने वाले कुल 53 पत्रकारों में से मुस्लिम पत्रकार कोई नहीं है. इसे सरकार की तुष्टिकरण व वोटबैंक की नीति माना जा रहा है.
बताया जा रहा है कि सरकार के पास अभी कोई खाली सरकारी मकान नहीं है जिसे किसे जरूरतमंद व जिनुइन पत्रकार को दिया जा सके. सूत्रों का कहना है कि पिछले दिनों आवास आवंटन समिति की बैठक थी. इस समिति की चेयरमैन मुख्यमंत्री की सचिव अनीता सिंह हैं. इसमें राज्य संपत्ति अधिकारी और सूचना निदेशक सदस्य होते हैं. बैठक में अनीता सिंह ने खाली मकानों के बारे में पूछा तो जवाब ना में मिला. तब उन्होंने बैठक की उपादेयता के बारे में सवाल खड़ा किया कि अगर कोई कोई मकान खाली ही नहीं है तो आवंटन समिति की बैठक का क्या मतलब. उन्होंने अवैध तरीके से काबिज लोगों से मकान खाली कराने के आदेश दिए.






