इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने फैजाबाद रोड स्थित विराज कांस्ट्रक्शन द्वारा ग्रीन सिटी के नाम से इंटीग्रेटेड टाउनशिप विकसित करने के लिए किसानों से ली गई जमीन पर निर्माण किए जाने के बाबत रोक लगा दी है। अदालत ने कहा है कि इस भूमि पर यथास्थिति बरकरार रहेगी और कोई निर्माण कार्य नहीं किया जाएगा। इस आदेश से ग्रीन सिटी का काम खटाई में पड़ गया है।
याचिकाकर्ता सच्चिदानंद गुप्ता व नीलम सिंह सहित अन्य की ओर से अधिवक्ता डॉ. एलपी मिश्रा व अन्य द्वारा दायर याचिकाओं पर न्यायमूर्ति उमानाथ सिंह व वीके दीक्षित की पीठ ने सुनवाई के बाद यह आदेश दिए। याचिकाएं दायर कर 29 सितंबर 2011 व 31 अक्टूबर 2012 के आदेशों को चुनौती देते हुए कहा गया कि सैकड़ों किसानों की जमीनें सरकार व एलडीए ने अधिग्रहीत कर लीं। 29 सितंबर 2011 के आदेश से लखनऊ विकास प्राधिकरण द्वारा मेसर्स विराज कांस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड द्वारा प्रस्तावित टाउनशिप के लिए ग्राम सराय शेख सेमरा, शाहपुर में जमीन अधिग्रहीत की गई। अधिग्रहण के विरुद्ध किसानों की आपत्तिायों को दरकिनार करते हुए विधि विरुद्ध तरीके से कब्जा लिया गया।
याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि यदि कंपनी के नाम से अधिग्रहण किया जाता है तो यह केंद्र सरकार की नियमावली के तहत होता है। एक साथ कंपनी व जनहित में अधिग्रहण की कार्रवाई काननू के विपरीत है। 11 जुलाई 2008 को एलडीए ने स्वयं विराज कंपनी की हैसियत का कम मूल्यांकन किया था। फिर भी बाद में विराज कांस्ट्रक्शन के लिए सैकड़ों किसानों की जमीनों को गैरकानूनी तरीके से अधिग्रहीत किया गया। सुनवाई के दौरान अधिवक्ता डॉ. एलपी मिश्रा ने पीठ को बताया कि ग्रीन सिटी के निर्माण के लिए पर्यावरण विभाग सहित अन्य जरूरी विभागों से अनापत्तिप्राप्त नहीं की गई। मामले में अगली सुनवाई 11 फरवरी को होगी। ज्ञात हो कि बाबू बनारसी दास ग्रीन सिटी उर्फ बीबीडी ग्रीन सिटी के मालिक उद्यमी और नेता अखिलेश दास गुप्ता हैं।





