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साध्‍वी चिदर्पिता ने स्‍वामी चिन्‍मयानंद पर लगाया रेप का आरोप

शाहजहांपुर से एक बड़ी तथा चौंकाने और हतप्रभ करने वाली खबर आ रही है। भाजपा के शासन काल में गृहराज्‍य मंत्री रहे तथा मुमुक्ष आश्रम (परमार्थ आश्रम हरिद्वार के अध्यक्ष) के अधिष्‍ठाता स्‍वामी चिन्‍मयानंद सरस्‍वती के खिलाफ उनकी शिष्‍या साध्‍वी चिदर्पिता ने बलात्‍कार का आरोप लगाया है। पूर्व गृह राज्यमंत्री के विरुद्ध शाहजहांपुर कोतवाली में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। मुमुक्षु आश्रम शाहजहांपुर की प्रबंधक साध्वी चिदर्पिता के सनसनीखेज संगीन आरोपों की तहरीर एक सप्‍ताह पहले ही पुलिस को दी थी, जिसकी जांच एसपी सिटी कर रहे थे,  बुधवार को साध्‍वी के बयान दर्ज करने के बाद कई धाराओं में रिपोर्ट लिखने की कार्रवाई की गई।

शाहजहांपुर से एक बड़ी तथा चौंकाने और हतप्रभ करने वाली खबर आ रही है। भाजपा के शासन काल में गृहराज्‍य मंत्री रहे तथा मुमुक्ष आश्रम (परमार्थ आश्रम हरिद्वार के अध्यक्ष) के अधिष्‍ठाता स्‍वामी चिन्‍मयानंद सरस्‍वती के खिलाफ उनकी शिष्‍या साध्‍वी चिदर्पिता ने बलात्‍कार का आरोप लगाया है। पूर्व गृह राज्यमंत्री के विरुद्ध शाहजहांपुर कोतवाली में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। मुमुक्षु आश्रम शाहजहांपुर की प्रबंधक साध्वी चिदर्पिता के सनसनीखेज संगीन आरोपों की तहरीर एक सप्‍ताह पहले ही पुलिस को दी थी, जिसकी जांच एसपी सिटी कर रहे थे,  बुधवार को साध्‍वी के बयान दर्ज करने के बाद कई धाराओं में रिपोर्ट लिखने की कार्रवाई की गई।

तहरीर में साध्वी चिदर्पिता ने आरोप लगाये हैं कि परिवार में आते-जाते रहने वाले स्वामी चिन्मयानन्द सरस्वती राजनैतिक व आध्यात्मिक ज्ञान लेने को प्रेरित करने का वादा कर वर्ष 2001 में अपने दिल्ली स्थित सांसद निवास में रखने लगे। इस दौरान उनके साथ कई कमेटी दौरे और धार्मिक स्थलों की यात्रा कर ज्ञान और अनुभव भी पाया। वह वर्ष 2004 तक वह गुरु की ही तरह सिखाते रहे और वह उन्हें संरक्षक मानते हुए शिष्या की ही तरह सीखती रही, जिससे उन पर प्रार्थिनी को भाई या पिता से भी अधिक विश्वास हो गया, तभी वर्ष 2004 में प्रार्थिनी को जप-तप और धार्मिक अनुष्ठान कराने के बहाने हरिद्वार स्थित परमार्थ आश्रम में ले आये। यहां उन्होंने कुछ ज्ञान बर्धक बातें सिखाई भीं, लेकिन अचानक प्रार्थिनी को उनकी नियत में परिवर्तन दिखने लगा, जिससे प्रार्थिनी किसी तरह से निकलकर भागने की मन ही मन युक्ति सोच ही रही थी कि तभी वह वर्ष 2005 में अपने व्यक्तिगत अंगरक्षकों के बल पर अपनी गाड़ी में कैद कर शाहजहाँपुर स्थित मुमुक्षु आश्रम ले आये और आश्रम के अंदर बने दिव्य धाम के नाम से बुलाए जाने वाले अपने निवास में लाकर बंद कर दिया।

साध्‍वी ने तहरीर में आरोप लगाया है कि यहाँ कई दिनों तक शारीरिक सम्बन्ध बनाने का दबाव बनाया गया, जिसका उन्‍होंने ने विरोध किया, तो उन्होंने अज्ञात असलाहधारी लोगों की निगरानी में दिव्यधाम में ही कैद कर दिया, पर प्रार्थिनी शारीरिक सम्बन्ध बनाने को किसी भी कीमत पर तैयार नहीं थी, लेकिन अपने रसोईये के साथ साजिश कर खाने में किसी तरह का पदार्थ मिलवा कर उन्होंने प्रार्थिनी को किसी तरह अन्‍न ग्रहण करा दिया, जिससे प्रार्थिनी शक्तिहीन हो गयी। उसी रात शराब के नशे में धुत्त स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती कामयाब हो गये, लेकिन उनके दिव्य धाम स्थित निवास में कैद होने के कारण प्रार्थिनी कुछ नहीं कर पायी। बलात्कार करते समय उन्होंने वीडियो फिल्म बना ली थी, जिसे दिखा कर बदनाम करने व परिवार सहित जान से मारने की धमकी भी दी, तभी दहशत के चलते उनके कुकृत्य की किसी से चर्चा तक नहीं कर पाई।

साध्‍वी ने तहरीर में कहा है कि इस बीच प्रार्थिनी दो बार गर्भवती भी हुई। वह बच्चे को जन्म देना चाहती थी, लेकिन स्वामी चिन्मयानन्द सरस्वती ने प्रार्थिनी की इच्छा यह कहते हुए ख़ारिज कर दी कि उन्हें संत समाज बहिष्कृत कर देगा, जिससे सार्वजनिक तौर पर मृत्यु ही हो जायेगी। ऐसा होने से पहले या तो वह आत्महत्या कर लेंगे या फिर प्रार्थिनी को मार देंगे। इतने पर भी प्रार्थिनी गर्भपात कराने को तैयार नहीं हुई तो उन्होंने अपने ऊँचे राजनैतिक कद का दुरुपयोग करते हुए पहले बरेली स्थित अज्ञात अस्पताल में और दूसरी बार लखनऊ स्थित अज्ञात अस्पताल में जबरन गर्भपात करा दिया, जिससे दोनों बार प्रार्थिनी को बेहद शारीरिक और मानसिक कष्ट हुआ और महीनों बिस्तर पर पड़ी रही। उस समय प्रार्थिनी की देखभाल करने वाला तक कोई नहीं था। स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती प्रार्थिनी को अपने लोगों की निगरानी में छोडक़र हरिद्वार स्थित परमार्थ आश्रम में जाकर रहने लगे। प्रार्थिनी कुछ समय बाद स्वत: ही स्वस्थ हो गयी और स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती के वापस आने पर दोनों बार प्रार्थिनी ने जबरन कराये गये गर्भपात का जवाब माँगा तो उन्होंने प्रार्थिनी को दोनों बार बुरी तरह लात-घूंसों से मारा-पीटा ही नहीं, बल्कि एक दिन गले में रस्सी का फंदा डालकर जान से मारने का भी प्रयास किया और कनपटी पर रायफल रख कर यह चेतावनी देकर जान बख्शी कि जीवन में पुन: किसी बात को लेकर सवाल-जवाब किया तो लाश का भी पता नहीं चलने देंगे, तो दहशत में प्रार्थिनी मौन हो गयी और डर के कारण उसी गुलामी की जिंदगी को पुन: जीने का प्रयास करने लगी, तो पता चला कि उनके अन्य दर्जनों बालिग, नाबालिग व विवाहित महिलाओं से नाजायज संबंध हैं।

तहरीर में आगे कहा गया है कि प्रार्थिनी को सामान्य देखकर स्वामी चिन्मयानन्द सरस्वती ने प्रार्थिनी को कुछ समय पश्चात मुमुक्षु आश्रम के साथ दैवी सम्पद संस्कृत महाविद्यालय का प्रबंधक व एसएस विधि महाविद्यालय में उपाध्यक्ष बनवा दिया और पुन: प्रार्थिनी का भरपूर दुरुपयोग करने लगे, क्योंकि वह प्रार्थिनी से एक बार में लगभग सौ-डेढ़ सौ कोरे कागजों पर जबरन हस्ताक्षर करवाते और उनका अपनी इच्छानुसार प्रयोग करते, जिस पर प्रार्थिनी को आशंका है कि उन्होंने हस्ताक्षरों का भी दुरुपयोग किया होगा, लेकिन प्रार्थिनी ने सभी दायित्वों का निष्ठा से निर्वहन किया। इसके साथ ही स्वयं को व्यस्त रखने व मानसिक संतुलन बनाये रखने के लिये प्रार्थिनी ने आगे की शिक्षा भी ग्रहण की। प्रार्थिनी को हालात से समझौता करते देख वर्ष 2010 में श्री शंकर मुमुक्षु विद्यापीठ का प्रधानाचार्य भी नियुक्त कर दिया गया। प्रार्थिनी मन से दायित्व का निर्वहन करने लगी थी तो अब उनके असलाहधारी लोगों की निगरानी पहले की तुलना में कम हो गयी और प्रार्थिनी मोबाइल आदि पर इच्छानुसार व्यक्तियों से बात करने लगी। इस बीच प्रार्थिनी ने विवाह कर लिया, जिससे स्वामी चिन्मयानन्द सरस्वती बेहद आक्रोशित हैं, जिसके चलते वह प्रार्थिनी को धमका रहे हैं और उसका बकाया वेतन भी नहीं दे रहे हैं।

प्रार्थिनी ने जब उनसे मोबाइल पर वेतन देने की बात कही तो काफी दिनों तक वह आश्वासन देते रहे, लेकिन बाद में स्पष्ट मना करते हुए धमकी भी देने लगे कि वह उसकी जिंदगी बर्बाद कर देंगे और पति को सब कुछ बताकर वैवाहिक जीवन तहस-नहस करा देंगे, साथ ही चेतावनी दी कि किसी से उनके बारे में चर्चा तक की तो चाहे तुम धरती के किसी कोने में जाकर छिप जाना, छोडेंगे नहीं। आरोप है कि स्वामी चिन्मयानन्द सरस्वती के पास आपराधिक प्रवृति के लोगों का भी आना-जाना है, जिससे प्रार्थिनी उनकी धमकी से बेहद डरी-सहमी है, क्योंकि वह कभी भी कुछ भी करा सकते है। उक्त तहरीर पर एक सप्ताह पर पूर्व एसपी शाहजहांपुर ने एसपी सिटी को मामले की जांच करने के निर्देश दिये, जिस पर आज साध्वी चिदर्पिता ने बयान दर्ज कराये।

गौरतलब है कि स्‍वामी चिन्‍मयानंद सरस्‍वती जौनपुर लोकसभा से भाजपा के सांसद बने तथा केंद्र में गृहराज्‍य मंत्री बनाए गए। तमाम विवादों में भी रहे। साध्‍वी चिदर्पिता के बिल्‍सी से चुनाव लड़ने चर्चाओं के बीच खबर थी कि चिन्‍मयानंद इनसे काफी खफा हैं तथा राजनीति में न जाने का दबाव बना रहे हैं। इसी बीच साध्‍वी चिदर्पिता से बदायूं के जाने माने पत्रकार बीपी गौतम से विवाह कर लिया, जिसके बाद से गुरु एवं शिष्‍या के संबंध काफी तनावपूर्ण हो गए थे। हालांकि इन आरोपों को लेकर तरह तरह की चर्चाएं हैं। कुछ समय पहले तक साध्‍वी और स्‍वामी के संबंध अच्‍छे बताए जा रहे हैं। इधर, इन आरोपों के बाद राजनीतिक भूचाल आने की भी संभावना बढ़ गई है।

इधर शाम को एसपी रमित शर्मा ने प्रेस वार्ता आयोजित कर बताया कि उन्होंने इस मामले में एफआईआर करने के आदेश जारी कर दिये हैं। सदर कोतवाली में धारा 342, 376, 504, 307, 323 व 313 तहत के दर्ज कराया जा रहा है, जिसकी विवेचना कोतवाली प्रभारी को ही दी जा रही है। इस दौरान साध्वी चिदर्पिता ने मीडिया को बताया कि उनकी जान को खतरा है, लेकिन उन्हें कानून और पुलिस पर पूरा विश्वास है, साथ ही न्याय न मिलने तक वह कानूनी लड़ाई जारी रखेंगी। सुरक्षा की दृष्टि से एसपी के निर्देश पर इंस्पेक्टर ने उन्हें शाहजहांपुर की सीमा से बाहर पहुंचाया। एसपी ने बताया कि जांच निष्‍पक्षता से की जाएगी।

वरिष्‍ठ पत्रकार कुमार सौवीर की रिपोर्ट.

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