सूचना और प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी ने कहा कि मंत्री ने कहा सोशल मीडिया में इतनी अधिक गतिविधियां होती हैं कि उसका नियमन असंभव है। नए मीडिया में कई करोड़ युवा भारतीय हैं और उनमें से हरेक ब्राडकास्टर हैं क्योंकि सबके अपने प्रशंसक हैं। इसलिए आज आप एक ब्राडकास्टर से नहीं, यहां तक कि 852 ब्राडकास्टर से भी नहीं बल्कि संभावित तौर पर आठ करोड़ ब्राडकास्टरों से निपट रहे हैं। तिवारी ने कहा, बाघों को पालतू बनाना ना ही मेरा काम है और ना ही मेरा शौक है और इसे लेकर मुझे कोई भ्रांति नहीं है।
सरकार नए मीडिया में अपनी मौजूदगी बढ़ाने की रणनीति तैयार करने की योजना बना रही है। यह एक मंच है, अत: अगर आपमें इसे इस्तेमाल करने की सलाहियत है तो सरकार में भी है और यह सरकार की मूर्खता होगी अगर वह इस अवसर को हाथ से जाने दे।
तिवारी ने कहा कि भारतीय मीडिया बाहरी नियंत्रण नहीं चाहता है इसलिए इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट तथा सोशल मीडिया को अपनी समस्याओं का हल खुद तलाशना चाहिए। तिवारी ने कहा, क्या भारतीय मीडिया नियमन के लिए तैयार है? मेरा मानना है कि जवाब ना है। जिस पल सरकार कोई कदम, यहां तक कि वित्तीय मामलों में भी कोई वाजिब प्रयास करेगी तो प्रेस क्लब से लेकर साउथ ब्लॉक परिसर तक प्रदर्शन शुरू हो जाएगा। मंत्री से पूछा गया था कि क्या बाजारों से जुड़ी खबरों का नियमन होना चाहिए क्योंकि इससे जुड़ी किसी भी तरह की गलत सूचना कई लोगों को प्रभावित करती है।
उन्होंने कहा कि सरकार और मीडिया की भूमिका पूरक की होती है लेकिन साथ ही उनके बीच एक खास तरह का विरोधात्मक संबंध भी रहता है। तिवारी ने कहा, अब आप दोनों के बीच संतुलन कैसे बनाकर रखते हैं। जिस पल मैं रेखा को पार करूंगा आप मुझ पर धौंसपट्टी का आरोप लगाएंगे। भले ही यह मेरा इरादा नहीं हो। सूचना प्रसारण मंत्री ने कहा, इसलिए हमें उस संतुलन को बनाए रखना होगा और हम दोनों को अपनी 'लक्ष्मण रेखाओं' में रहना होगा। मीडिया को वास्तव में आत्मनिरीक्षण करने और दोषों का समाधान तलाशने की जरूरत है।





