Anand Pradhan : आजकल न्यूज मीडिया खासकर चैनलों पर छाए अंध-राष्ट्रवादी युद्धोन्माद को भड़काने में सबसे बड़ी भूमिका ‘टाइम्स नाऊ’ की है जिसपर हर रात प्राइम टाइम में एंकर-संपादक अर्नब गोस्वामी के साथ भारतीय सेना के कुछ रिटायर्ड जनरल और रक्षा विशेषज्ञ पाकिस्तान को सबक सिखाने की हुंकार भरते रहते हैं. उनकी बातचीत से ऐसा लगता है कि जैसे युद्ध के अलावा और कोई विकल्प नहीं है.
लेकिन क्या आपको मालूम है कि चैनलों और अखबारों में छाए इन जनरलों और रक्षा विशेषज्ञों में से कई के संबंध देशी-विदेशी हथियार निर्माता कंपनियों से हैं? इनमें से कई उनके लिए काम करते हैं और उनके कंसल्टेंट और एजेंट हैं. लेकिन चैनल और अखबार आपको यह सच्चाई कभी नहीं बताते हैं जो साफ़ तौर पर न सिर्फ हितों के टकराव (कनफ्लिक्ट आफ इंटरेस्ट) का मामला है बल्कि दर्शकों-पाठकों के साथ धोखा है.
ऐसे ही एक रक्षा विशेषज्ञ मारूफ रज़ा हैं जो ‘टाइम्स नाऊ’ पर लगभग बिना नागा एक स्वतंत्र रक्षा विशेषज्ञ के बतौर मौजूद रहते हैं. लेकिन चैनल उनके बारे में यह नहीं बताता कि वे और उनकी कंपनी मारूफ रज़ा एंड एसोशिएट्स कई हथियार निर्माताओं, आपूर्तिकर्ताओं और डीलरों के लिए कंसल्टेंट या प्रतिनिधि के बतौर काम करते हैं.
इस बारे में एक दर्शक ने न्यूज ब्राडकास्टर्स एसोशियेशन को शिकायत की और एन.बी.ए की जस्टिस जे.एस वर्मा के नेतृत्ववाली एन.बी.एस.ए ने इस शिकायत को सही पाया. जस्टिस वर्मा के फैसले को आप यहाँ पढ़ सकते हैं.
जागो दर्शक-पाठक, जागो !!!
आनंद प्रधान के एफबी वॉल से साभार.