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जागरण के संपादक आशुतोष को गुस्सा क्यों आया?

बनारस में पिछले दिनों दलाई लामा की प्रेस कांफ्रेंस चल रही था. इसमें बनारस के तमाम अखबार एवं चैनलों के पत्रकार मौजूद थे. दलाई लामा पत्रकारों के सवालों का जवाब दे रहे थे.  पर इस बीच कुछ ऐसा हो गया कि दलाई लामा भी भौचक्‍क रह गए. दलाई लामा पत्रकारों के सवालों का जवाब दे रहे थे और यह लगातार लंबा होता चला जा रहा था. उब रहे दलाई लामा ने कहा कि प्‍लीज लास्‍ट क्‍यूश्‍चन.

बनारस में पिछले दिनों दलाई लामा की प्रेस कांफ्रेंस चल रही था. इसमें बनारस के तमाम अखबार एवं चैनलों के पत्रकार मौजूद थे. दलाई लामा पत्रकारों के सवालों का जवाब दे रहे थे.  पर इस बीच कुछ ऐसा हो गया कि दलाई लामा भी भौचक्‍क रह गए. दलाई लामा पत्रकारों के सवालों का जवाब दे रहे थे और यह लगातार लंबा होता चला जा रहा था. उब रहे दलाई लामा ने कहा कि प्‍लीज लास्‍ट क्‍यूश्‍चन.

इसके बाद एएनआई के वरिष्‍ठ रिपोर्टर गिरीश दुबे ने दलाई लामा से आखिरी सवाल पूछा. वो जवाब दे रहे थे तो बाकी लोग खड़े हो गए. इसी बीच जागरण के संपादक आशुतोष शुक्‍ला भी आगे आकर गिरीश दुबे के कैमरे के सामने आ गए. कवरेज करने की कोशिश में गिरीश ने आशुतोष को प्‍लीज कहते हुए हाथ के सहारे उन्‍हें कैमरे से दूसरी तरफ हटा दिया.

इतना ही करना था कि आशुतोष को गुस्‍सा आ गया. बताया जाता है कि उन्‍होंने दलाई लामा के सामने ही गिरीश दुबे को मारने के लिए हाथ उठा लिया. हालांकि माहौल देखकर वे सयंमित हुए तथा दलाई लामा के साथ-साथ बाहर तक निकल गए. इसके बाद गिरीश भी वहीं लाइब्रेरी में इस फीड को भेजने की कोशिश में जुट गए. दलाई लामा के जाने के बाद आशुतोष शुक्‍ला फिर अपने दो सहयोगियों रिपोर्टर अनिल सिंह एवं फोटोग्राफर पप्‍पू मिश्रा के साथ वापस आए तथा गालियां देते हुए पूछने लगे कि कौन था, जिसने मुझे धक्‍का दिया था. वे लगातार गालियां दिए जा रहे थे.

प्रत्‍यक्षदर्शी पत्रकारों ने बताया कि वे लगातार अभद्र भाषा और गालियों का प्रयोग करते जा रहे थे. इसके बाद उनके सिपाहियों ने गिरीश दुबे की पहचान कराई तो वहां भी वे अपनी असंयमित भाषा में बात करने लगे. जिस पर गिरीश भी थोड़ी नाराज हुए पर उन्‍होंने कहा कि मैंने आपको धक्‍का नहीं दिया, बल्कि कवरेज में दिक्‍कत हो रही थी इसलिए आपको कैमरे के सामने से हटाया था. मुझे पता भी नहीं है कि आप दैनिक जागरण के संपादक हैं. अगर आपको तकलीफ हुई है तो इसके लिए आपको सॉरी बोलता हूं.

गिरीश के सॉरी बोलने के बाद भी आशुतोष का गुस्‍सा शांत नहीं हो रहा था. हालांकि कुछ ने चुटकी लेते हुए कहा कि ये इसलिए नाराज हैं क्‍योंकि ये दैनिक जागरण के संपादक हैं. लगातार गालियों की वजह से गिरीश भी जब तैश में आने लगे और माहौल बिगड़ने की संभावना बनने लगी तो वहां मौजूद पत्रकारों ने किसी तरह बीच बचाव करके मामला शांत कराया.

इस बारे में जब भड़ास4मीडिया ने दैनिक जागरण वाराणसी के संपादक आशुतोष से बात की तो उन्होंने आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया. उन्होंने कहा कि गाली देने और बदतमीजी करने जैसे आरोप बिलकुल गलत हैं. उनके मुताबिक वहां मिस-अंडरस्टैंडिंग हुई, इससे ज्यादा कुछ नहीं. आशुतोष ने बताया कि उन्होंने सबसे प्यार से बात की और किसी को कुछ नहीं कहा. केवल थोड़ी सी आपसी अनबन हुई वह भी अनजाने में, जो कि बाद में सब ठीक हो गया. आशुतोष ने इस छोटी व मामूली बात को तूल न दिए जाने की भी बात कही.

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