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अमर उजाला, बरेली के संपादक और बदायूं के ब्‍यूरोचीफ फंसे

अमर उजाला का बदायूं कार्यालय भ्रष्टाचार, व्यक्तिगत स्वार्थों की पूर्ति के लिए मनमानी ख़बरें प्रकाशित करने को लेकर पहले से ही कुख्यात है। इस तरह की ख़बरों से अब तक आम आदमी, नौकरशाह और राजनेता ही प्रभावित होते रहे हैं, जिससे अमर उजाला के संबंधित पत्रकारों का दुस्साहस लगातार बढ़ता जा रहा है। तभी, खुद को सर्वोपरि समझने वाले अमर उजाला के पत्रकारों ने न्यायालय को भी नहीं बख्शा। आम आदमी अपमानित होकर शांत बैठ जाता है, लेकिन इस बार अमर उजाला के पत्रकारों का पाला न्यायालय से पड़ गया है।

अमर उजाला का बदायूं कार्यालय भ्रष्टाचार, व्यक्तिगत स्वार्थों की पूर्ति के लिए मनमानी ख़बरें प्रकाशित करने को लेकर पहले से ही कुख्यात है। इस तरह की ख़बरों से अब तक आम आदमी, नौकरशाह और राजनेता ही प्रभावित होते रहे हैं, जिससे अमर उजाला के संबंधित पत्रकारों का दुस्साहस लगातार बढ़ता जा रहा है। तभी, खुद को सर्वोपरि समझने वाले अमर उजाला के पत्रकारों ने न्यायालय को भी नहीं बख्शा। आम आदमी अपमानित होकर शांत बैठ जाता है, लेकिन इस बार अमर उजाला के पत्रकारों का पाला न्यायालय से पड़ गया है।

 

खबर है कि अवमानना के आरोप में न्यायालय ने अमर उजाला बदायूं के ब्यूरो चीफ और बरेली के संपादक को 23 जनवरी प्रातः 11 बजे अदालत में हाज़िर होने का सम्मन जारी कर दिया है। न्यायालय ने चेतावनी देते हुए लिखा है कि नीयत तिथि और समय पर ब्यूरो चीफ और संपादक व्यक्तिगत तौर पर उपस्थित नहीं हुए तो प्रथम दृष्टया न्यायालय की अवमानना का दोषी मानते हुए समस्त प्रकरण माननीय उच्च न्यायालय के संज्ञान में लाया जायेगा।

उल्लेखनीय है कि 16 जनवरी के अंक में अमर उजाला ने एडीजी-6 कोर्ट के वकीलों द्वारा बहिष्कार करने की खबर प्रकाशित की थी, साथ ही इसी अंक में इसी कोर्ट के अपर जिला जज माननीय एसएन त्रिपाठी द्वारा एक मुकदमे में सज़ा सुनाने की खबर भी प्रकाशित की, जिससे कोर्ट के बहिष्कार की खबर स्वतः ही फ़र्ज़ी सिद्ध हो गयी। इसके अलावा एडीजीसी श्री ज्ञानप्रकाश ने जिला बार एसोसियेशन के अध्यक्ष व सचिव से बहिष्कार की प्रकाशित खबर के सम्बन्ध जानकारी ली तो अध्यक्ष व सचिव ने इस तरह की विज्ञप्ति जारी करने से इनकार कर दिया, तो श्री ज्ञान प्रकाश ने कोर्ट के समक्ष आपत्ति दर्ज करा दी।

वादकारियों में भ्रम फैलाने, बार की सत्यता पर सवाल खड़ा करने के साथ न्यायालय की अवमानना का आरोपी मानते हुए सम्मन जारी किया है, जिससे अमर उजाला में ऊपर तक हडकंप मच गया है। यहाँ यह भी बताना ठीक रहेगा कि अपर जिला जज माननीय एसएन त्रिपाठी मुकद्दमों की तेजी से सुनवाई करते हुए दोषियों को लगातार सज़ा सुना रहे हैं। उनकी ईमानदारी के चलते अपराधियों और भ्रष्टाचारियों में दहशत है, जिससे एकमात्र अमर उजाला में प्रकाशित बहिष्कार की खबर ऐसे ही किसी षड्यंत्रकारी के दिमाग की उपज नज़र आ रही है। फिलहाल मामला मीडिया के साथ समस्त वकीलों में भी चर्चा का विषय बना हुआ है और सबकी नज़रें 23 तारीख पर टिकी हुई हैं।

पत्रकार बीपी गौतम की रिपोर्ट.

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