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लखनऊ

वाह रे यूपी : कानून के रखवाले ही करने लगे हैं कानून का दुरुपयोग

बाराबंकी। कानून बनते हैं अपराध और अपराधियों पर लगाम लगाने के लिए लेकिन उसका दुरुपयोग अगर आम आदमी करे तो बात अलग है, अगर प्रशासनिक अधिकारी कानून का खुला उल्लंघन कर बेकसूर को जेल तक पहुंचाये तो अवाम में इस बेइंसाफी के खिलाफ आवाज उठना भी लाजमी है। वर्ष 2013 की शुरुआत में ही जिलाधिकारी के निर्देश पर एसडीएम सदर ने यश व सिटी डायग्नोस्टिक सेंटर पर स्टिंग आपरेशन कर अल्ट्रासाउण्ड करवाया और भ्रूण परीक्षण का इल्जाम लगाकर सीजीएम कोर्ट में परिवाद दर्ज कराकर वृहस्पतिवार को दो बेकसूरो को जेल भिजवा दिया।

बाराबंकी। कानून बनते हैं अपराध और अपराधियों पर लगाम लगाने के लिए लेकिन उसका दुरुपयोग अगर आम आदमी करे तो बात अलग है, अगर प्रशासनिक अधिकारी कानून का खुला उल्लंघन कर बेकसूर को जेल तक पहुंचाये तो अवाम में इस बेइंसाफी के खिलाफ आवाज उठना भी लाजमी है। वर्ष 2013 की शुरुआत में ही जिलाधिकारी के निर्देश पर एसडीएम सदर ने यश व सिटी डायग्नोस्टिक सेंटर पर स्टिंग आपरेशन कर अल्ट्रासाउण्ड करवाया और भ्रूण परीक्षण का इल्जाम लगाकर सीजीएम कोर्ट में परिवाद दर्ज कराकर वृहस्पतिवार को दो बेकसूरो को जेल भिजवा दिया।

 

दहेज उत्पीड़न हो या हरिजन एक्ट का या एनडीपीएस एक्ट का इसका उपयोग कम हुआ है, लेकिन दुरुपयोग ज्यादा और वह भी दुश्मनी में किया गया है। लेकिन जब प्रशासन ही इस दुश्मनी को अंजाम देने के लिए भ्रूण लिंग परीक्षण कानून का दुरुपयोग कर बेकसूरों को जेल दे तो आम आदमी को तकलीफ होना लाजमी है। कहा जाता है कि निगाहे कहां है निशाना किधर है, और घायल किसे होना है। बात सियासत की हो या रंगमंच की या प्रशासन के स्टिंग आपरेशन की। सब कुछ पहले से लिखा होता है। लेकिन कभी कभी ऐसी गलतियां भी कर दी जाती है। जो किये कराये पर पानी फेर देती है और कानून के रखवाले कानून का ही दुरुपयोग कर बेकसूर को जेल की सलाखों की हवा तक पहुंचा देते हैं।

31 दिसम्बर 2012 को जिले में अचानक भ्रूण परीक्षण के नाम पर चलने वाले धन्धे की जांच के लिए टीमें बना दी गयीं। सीडीओ विजय किरन आनन्द ने प्रेस नोट जारी कर चेतावनी भी दे दी। पीसीपीएनडीटी अधिनियम 1994 की धारा 30 एवं नियम 11 व 12 के तहत जिलाधिकारी ने एसडीएम सदर को जिला बाराबंकी का जिला निरीक्षक एवं अनुश्रवण अधिकारी नामित किया गया। उन्‍हें पीसीपीएनडीटी अधिनियम के अन्तर्गत आने वाले अल्ट्रासाउण्ड केन्द्रों का निरीक्षण करने हेतु अनाधिकृत किया गया। एसडीएम सदर ने सीधे चेकिंग के बजाय स्टिंग आपरेशन का सहारा लेते हुए पांच हजार रुपये डीएम से डेक्वाय आपरेशन के लिए ले लिये। पहुंचे बगैर जिले की पीसीपीएनडीटी अधिनियम के तहत अल्ट्रासाउण्ड का लाइसेंस देने वाली कमेटी के डिप्टी सीएमओ को लिये बगैर यश डायग्नोस्टिक सेंटर, कृष्णा नगर नाका सतरिख बाराबंकी और यहां भ्रूण परीक्षण के लिए खुले आम कानून का दुरुपयोग करते हुए खुद की टीम को 3200 रुपये जमा करा देने की बात कही।

डायग्नोस्टिक सेंटर वाले ने इनके अनुसार रसीद टीम के सदस्यों को नहीं दी। और उसने अल्ट्रासाउण्ड भी नहीं किया। बल्कि एसडीएम सदर के अनुसार उसने कहा कि यह जांच सिटी डायग्नोस्टिक सेंटर सी-164 मुगलदरबार परिसर रेलवे स्टेशन पर होगी। यहां पर सरिता नाम की औरत को दर्द से कराहते हुए भेजा गया। आम अल्ट्रासाउण्ड हुआ, जिसमें पांच सौ रुपये दिये गये। इसमें से तीन सौ कैशियर ने वापस किया। मरीज की हालत सीरियस को देखते हुए जल्दी से अल्ट्रासाउण्ड कर दिया गया। रिपोर्ट जब तक बने सरिता फरार हो गई। उसके पति रिपोर्ट लेकर चला गया। इस दरम्यान जल्दबाजी में फार्म एफ भरना रह गया। तभी एसडीएम पहुंच गये और उन्होंने इस अल्ट्रासाउण्ड मशीन को सील कर दिया। यह कहते हुए कि यहां पर भ्रूण परीक्षण कराया जाता है। कहानी जो सीजीएम कोर्ट में पेश की तो उसमें लिखा कि अल्ट्रासाउण्ड रिपोर्ट यहां नहीं दी गयी। बल्कि यश डायग्नोस्टि में मिलने की बात गढ़ी गयी। उन पांच हजार में पांच सौ रुपये का नोट उनके कैश से मिलने का दावा किया गया। सारे डाक्यूमेंट सही पाये गये। लेकिन इसके बाद भी एक्ट का उल्लंघन बताकर सीजीएम कोर्ट में भेज दिया गया। लेकिन कोर्ट में जिस महिला ने अपना भ्रूण परीक्षण कराया उसको मुल्जिम नहीं बनाया बल्कि सिटी डायग्नोस्टि सेंटर के हुसैन रजा और डा. सौरभ सिन्हा समेत यश डायग्नोस्टिक सेंटर के खिलाफ परिवाद दर्ज कर दिया गया।

इसके बाद हुसैन रजा द्वारा जिलाधिकारी को पत्र देकर गुहार भी लगायी गयी कि उनका सेंटर कोई भ्रूण लिंग परीक्षण नहीं करता है। और यह सब सिटी डायग्नोस्टिक सेंटर की मकबूलियत को देखते हुये कुछ प्रतिद्वन्दियों द्वारा एक साजिश के तहत किया गया है। रिपोर्ट में कहीं पर भी भ्रूण लिंग परीक्षण का तस्करा नहीं है। और हम लोग गरीबों की मदद करने और उनको फ्री जांच करते हैं। हमारी साख और हमारी ईमानदारी पर बट्टा न लगाया जाये। बल्कि हमारे साथ इंसाफ किया जाये। हमारी सीज अल्ट्रासाउण्ड मशीन को खोला जाये। डीएम द्वारा पूरी बात संज्ञान में आने के बाद भी इस मिलीभगत के खेल जिसमें सियासी नेताओं के साथ-साथ अधिकारियों की भी मिलीभगत जग उजागर है। इसके बाद इन्हीं अधिकारियों की टीम ने इन लोगों से अदालत में समर्पण कर जमानत करा लेने का दबाव बनाया। बेचारे लाखों रुपये के अल्ट्रासाउण्ड मशीन के कर्जे को देखते हुए कल वृहस्पतिवार को अदालत में हाजिर हुये। एसपीओ ने बहस की सीजीएम ने जमानत अर्जी खारिज कर जेल भेज दिया।

बाराबंकी से रिजवान मुस्‍तफा की रिपोर्ट.

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