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इलाहाबाद

”तोहका हॉकी मा हिरोइन के नाच देखय के फुर्सत बा, ढांढस बंधावय का दुइयो मिनट के टैम नाही बा”

: शहीद बाबूलाल के पिता ने सुनाई सीएम को खरी-खरी : 25 को शहीद के घर पहुंचेंगे अखिलेश : इलाहाबाद। शहीद बाबूलाल पटेल के परिजनों का आंदोलन रंग लाया। सरकार को अनशनकारियों के आगे पूरी तरह नतमस्तक होना पड़ा। शहीद के पिता और अदने से किसान परिवार की जिद के आगे मुख्यमंत्री को आने की सहमति देनी पड़ी। शहीद के पिता मुन्नीलाल से डायरेट मुख्यमंत्री ने मोबाइल पर बात की। डीएम राजशेखर ने पंद्रह मिनट कोशिश करने के बाद अपने मोबाइल का स्पीकर ऑन कर दिया। मुन्नीलाल को मोबाइल थमाते हुए बोले-लीजिए, मुख्यमंत्री आपसे बात करना चाहते हैं। गांव के अदने किसान ने अनमयस्क तरीके से मोबाइल अपने कान में लगाते हुए कहा-हैल्लो। अब बारी थी मुख्यमंत्री के बोलने की।

: शहीद बाबूलाल के पिता ने सुनाई सीएम को खरी-खरी : 25 को शहीद के घर पहुंचेंगे अखिलेश : इलाहाबाद। शहीद बाबूलाल पटेल के परिजनों का आंदोलन रंग लाया। सरकार को अनशनकारियों के आगे पूरी तरह नतमस्तक होना पड़ा। शहीद के पिता और अदने से किसान परिवार की जिद के आगे मुख्यमंत्री को आने की सहमति देनी पड़ी। शहीद के पिता मुन्नीलाल से डायरेट मुख्यमंत्री ने मोबाइल पर बात की। डीएम राजशेखर ने पंद्रह मिनट कोशिश करने के बाद अपने मोबाइल का स्पीकर ऑन कर दिया। मुन्नीलाल को मोबाइल थमाते हुए बोले-लीजिए, मुख्यमंत्री आपसे बात करना चाहते हैं। गांव के अदने किसान ने अनमयस्क तरीके से मोबाइल अपने कान में लगाते हुए कहा-हैल्लो। अब बारी थी मुख्यमंत्री के बोलने की।

सीएम ने कहा-बाबूजी मैं, मुख्यमंत्री अखिलेश बोल रहा हूं…मुन्नीलाल की आंखें डबडबा आईं। रूंधे गले से बोले-बाबूजी कहने वाला तो चला गया, साहेब, ऊ इकलौता बेटा रहा हमार… शहीद होई गवा, तोहका हाकी मॉ हिरोइन के नाच देखय के फुर्सत बा, देश के बदे जान गंवावे वाले के बूढ़े माता-पिता को ढांढस बंधावय का दुइयो मिनट टैम नाहीं बा। उधर से आने वाली आवाज नहीं सुनी जा सकी। शहीद के पिता मुन्नीलाल ने ठेठ गंवई अंदाज में कहा- जब बाबूजी और चाचा कहि रहे हो तो एतना बात माने के पड़ी। उधर से आवाज कट गई। मोबाइल दुबारा डीएम के हाथ में आ गया। जिंदाबाद-मुर्दाबाद के नारे की आवाज थम गई थी। माहौल में सन्नाटा था। करीब पांच मिनट बाद मोबाइल की घंटी बजी। डीएम ने हैलो कह फोन रिसीव किया। उनकी आवाज केवल इतनी ही सुनी जा सकी। भीड़ से थोड़ी दूर अलग हटे डीएम फोन पर सर-सर कहते सुने जाते रहे। इसके बाद डीएम वापस शहर लौट गए। करीब सवा तीन बजे अनशन स्थल पर दुबारा आए। मोबाइल पर वार्ता करने के बाद डीएम ने कहा कि मुख्यमंत्री अखिलेश सिंह यादव 25 जनवरी को शहीद के घर आएंगे। शासन से बीस लाख रुपए की मदद भी दी जाएगी। इस घोषणा के बाद शहीद के परिवार वालों ने चार दिनों से चल रही भूख हड़ताल को खत्म करने का ऐलान किया।

रविवार को दिनभर चली लंबी कवायद के बाद शाम चार बजे अनशन समाप्‍त कर दिया। जिलाधिकारी ने शहीद के परिजनों को फलों का जूस पिलाया। अनशन खत्म होने के बाद प्रशासन ने राहत की सांस ली। झारखंड के लातेहार जिले के जंगल में सात जनवरी को नक्सलियों और सुरक्षाबलों के बीच हुई मठभेड़ में सुरक्षा बल के कई जवान शहीद हो गए। शहीद हुए जवानों में इलाहाबाद का सीआरपीएफ का सिपाही बाबूलाल पटेल भी शामिल था। नक्सलियों ने बाबूलाल पटेल को मौत के घाट उतार दिया। इतना ही नहीं नक्सलियों ने बाबूलाल का पेट फाड़कर उसमें हाई पावर बम प्लांट कर रखा था। रांची में पोस्टमार्टम के दौरान डॉक्टरों की टीम ने संदेह होने पर पेट का आपरेशन किया तो दंग रह गए। गृहमंत्रालय तक हिल गया। केंद्रीय गृहमंत्री को भी बयान देना पड़ा। यह घटना कई दिनों तक मीडिया की सुर्खियां बनीं। ग्यारह जनवरी को शहीद बाबूलाल की अंत्येष्टि पैतृक गांव शिवलाल का पूरा के पास श्रृंग्वेरपुर गंगातट कर दिया गया। जहां पूरा इलाका गांव की माटी के ‘लाल’ बाबूलाल के शहीद होने पर गमगीन था, विभिन्न दलों के जनप्रतिनिधि शहीद के परिजनों को सांत्वना देने उनके घर पहुंच रहे थे, वहीं केंद्र और प्रदेश सरकार का कोई नेता इस औपचारिकता को भी पूरा नहीं कर सका।

शहीद का शव तीन दिन के बाद घर आने पर भी मौजूदा सांसद, विधायक शहीद की अंत्येष्टि तक में शामिल होना जरूरी नहीं समझा। चिढ़ तब बढ़ गई जब शहीद के घर के बगल बमुश्किल आधा किमी दूर बेरावांरोड चौराहा और नवाबगंज के हाइवे पुल के पास सपा के बड़े नेता-मंत्री बेशर्मी से स्वागत समारोह करा के फूल-माला पहनकर हंसते-मुस्कराते, हाथ हिलाकर बॉय कर निकल गए पर शहीद के दरवाजे तक नहीं आए। मुख्यमंत्री के बलिया और मथुरा जाकर शोक संवेदना व्यक्त करने के बाद भी यहां न आने पर हालात और बिगड़े। इन घटनाओं ने आग में घी डालने का काम किया। 17 जनवरी को शहीद के परिजन ग्रामीणों के साथ अनशन पर बैठ गए। दो दिनों तक शासन ने अनदेखी की। तीसरे दिन शहीद की गर्भवती पत्नी और बूढ़ी माता की हालत बिगड़ने के बाद मीडिया के काफी खिंचाई करनी शुरू कर दी। तीन दिन बाद प्रदेश सरकार की आंख खुली। सपा नेताओं का जमघट परिजनों से मिलने पहुंचा तो अनशनकारियों ने विरोध में नारेबाजी कर उन्हें वापस लौटने को मजबूर कर दिया। चौथे दिन रविवार को सुबह आठ बजे जिलाधिकारी ने अनशन स्थल पर पहुंचकर मुख्यमंत्री से शहीद के पिता की फोन पर बात कराई। मुख्यमंत्री से वार्ता के बाद भी मामला नहीं सुलझा। शाम को जिलाधिकारी ने काफी मशक्कत की। मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव राकेश गर्ग के यह बताने पर कि मुख्यमंत्री 25 जनवरी को शहीद के घर जाएंगे, अनशनकारियों ने भूख हड़ताल खत्म कर दिया।

शहीद के गांव से लौटकर शिवाशंकर पांडेय की रिपोर्ट.

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