न्यूज़रूम में अचानक से बकबैक पर आकाशवाणी गूंजती है…. "अरे ये पैकेज किसने चलाया…कौन है धनडाउन पर…"
धनडाउन प्रोड्यूसर सकपकाते हुए जवाब देता है… "सर…वो मैं हूं चम्पकलाल…मैंने लिया है पैकेज…"
बकबैक से वापस आवाज़ आती है…. "चम्पक नहीं…महाचम्पक हो साले तुम सब…किसने कहा था ये पैकेज लेने को…मरी हुई स्टोरी है…अभी आता हूं, वहीं बात करता हूं…"
धनडाउन प्रोड्यूसर के गाल सफेद हो जाते हैं, और घूम कर शाउटपुट हेड को देखता है…
शाउटपुट हेड – "मैं आता हूं ज़रा…कोई मिलने आया है…"
केबिन का दरवाज़ा खुलने की आवाज़ आती है…और तेज़ी से एक आदमी आता दिखाई देता है…धनडाउन प्रोड्यूसर को लगता है कि कहीं थप्पड़ ही न जड़ दें…
चम्पादक – "तुम लोगों को अगर टीवी में काम करने का शउर नहीं है…तो नौकरी छोड़ दो और कहीं जाकर घास काटो…ये स्टोरी चली कैसे आखिर…हद है यार…ख़बर मर चुकी है तो कब तक अगरबत्ती जलाए बैठे रहोगे…"
धनडाउन प्रोड्यूसर (थूक निगलते हुए) “सर…कल आप ने कहा था कि ये फॉलोअप स्टोरी चलनी है…पत्रकारिता ज़रूरी है…मतलब मीटिंग में आप ने…”
चम्पादक (बौखलाते हुए) – यार…पत्रकारिता करनी है तो अखबार में जाओ…कल के हालात अलग थे…आज अलग हैं…कल शाम को ही इस गैंगरेप से बड़ी ख़बर आई थी, पाकिस्तान से मैच हारने की तो बुलेटिन तोड़ा ही था न…जो ज़रूरी ख़बर है वो ही चलेगी…अब लड़की का क्रियाकर्म हो गया…उसके घरवाले भी आराम से हैं…जंतर मंतर पर मोम बह बह के सूख गया…तुम अभी वहीं पड़े हुए हो…बाहर आ जाओ हैंगओवर से…
धनडाउन प्रोड्यूसर – लेकिन सर कोई और बड़ी ख़बर भी नहीं थी…इसलिए ले लिया…
चम्पादक (गरज कर) – क्यों…मैच नहीं था…और वो जो सांड़ छत पर चढ़ गया था…और अभी मैं देख रहा था सुबह स्टोरी फ्लैश हुई थी चमत्कारी बाबा वाली…तुम लोगों को ख़बर ही नहीं दिखती है…मैं कैसे देख लेता हूं…
धनडाउन प्रोड्यूसर (खीझकर) – सर यहां एक काम तो है नहीं…कि लगातार फ्लैश देखते रहें…
चम्पादक – मैं कैसे देख लेता हूं…मेरे पास भी काम हैं (तमाम मैगज़ीन्स निपटानी हैं…और चैनल देखना है…ग्रीन टी पीनी है…शाम को शॉपिंग भी जाना है…नेतागीरी भी करनी है…और छुट्टी पर पहाड़ भी…)
(धनडाउन प्रोड्यूसर चुप हो जाता है…सिर नीचे झुकाए अपने काम में लग जाता है…)
उसी वक्त कसाईनमेंट से आवाज़ आती है…
कसाईनमेंट हेड – अरे सुनो चम्पकलाल….पड़ोसी देश से तनाव हो गया है…दो जवान मार दिए हैं…पीएम का बयान आ सकता है…
चम्पादक – हां…ब्रेकिंग ले लो टिकर पर…रोज़ होता है ये सब…
कसाईनमेंट हेड – सर…वो प्राइम्स भाउं इसी पर खेल रहा है…धरनब इसी पर भाऊं भाऊं कर रहा है…बाकी भी इसी पर आ गए हैं…
चम्पादक – अरे अरे…बड़ी ख़बर है…तोड़ दो बुलेटिन…एक दो रक्षा विशेषज्ञ के फोनो लो…मैं न्यूज़रूम से खड़ा होता हूं…और हां क्रोमा पर लिखवाओ हमला…
धनडाउन प्रोड्यूसर – लेकिन सर…हमला कहां हुआ है…
चम्पादक – अरे यार दिल्ली भी कहां लुटी थी…हमला हम करवा देंगे…नहीं हुआ है तो…यार तुम्हारी मेंटल एबिलिटी पर मुझे शक है…जितना कहा जा रहा है उतना करो…देशभक्ति की सीआरपी सबसे ज़्यादा है…
धनडाउन प्रोड्यूसर – लेकिन सर सीआरपी तो बंद चल रही है आजकल…
(तभी शाउटपुट हेड का एसएमएस चम्पकलाल के मोबाइल पर फ्लैश होता है…)
“बेटा बहुत पत्रकारिता कर ली दो महीने…अब भूल जाओ, आज सुबह सुबह सीआरपी (चीपनेस रेटिंग प्वाइंट्स) आई है…आज से खेल शुरु है…अपन पीछे हैं…गैंगरेप…जंतर मंतर…हार्ड न्यूज़ अब नैप्थलीन बॉल्स डाल कर रख दो…कभी मौसम आया तो फिर निकाल कर चला लेंगे…”
चम्पकलाल सिर पर हाथ रखे एसएमएस स्क्रॉल कर रहा है…चम्पादक जी कैमरे पर खड़े चीख रहे हैं….
“देखिए, ये देश पर हमला है…देश के स्वाभिमान पर हमला है…हमको इसका सख्त से सख्त जवाब देना चाहिए…सरकार को चाहिए कि वो कुछ कड़ा एक्शन ले…देश देखना चाहता है कि क्या सरकार में कोई इच्छाशक्ति है…”
दो साल पुराना इंटर्न याद कर कर के चम्पादक जी की लाइनों में नए शब्दों को गैंगरेप से रीप्लेस कर रहा है…उसे लग रहा है कि ये वही लाइनें हैं जो चम्पादक जी 10 दिन पहले बोल रहे थे…
“देखिए, ये देश का बलात्कार है…देश की इज़्ज़त पर हमला है…हमको इसका सख्त से सख्त जवाब देना चाहिए…सरकार को चाहिए कि वो कुछ कड़ा एक्शन ले…देश देखना चाहता है कि क्या सरकार में कोई इच्छाशक्ति है…”
इंटर्न 30 सेकेंड में ही टीवी पत्रकारिता सीख गया था…वो समझ रहा था कि कक्षा 5 के साइकिल, स्कूटर, कार…बेस्ट फ्रेंड, माई फादर और माई मदर के निबंध कैसे लिखे जाते हैं…और टीवी पत्रकारिता कैसे की जाती है…
(इसका किसी जीवित या मृत व्यक्ति से कोई लेना देना नहीं है…और अगर है तो ये उसकी ख़ुद की ज़िम्मेदारी है…)
चम्पादक सीरीज के जनक हैं पत्रकार, राइटर और एक्टिविस्ट मयंक सक्सेना जो कई चैनलों में कई संपादकों के साथ काम कर चुके हैं. चम्पादक सीरीज की अन्य ब्रेकिंग कथाएं-रचनाएं पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें-





