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अमिताभ को जागरण ने बनाया ‘बब्लू’, अब खुद बनने की बारी

: कानाफूसी : देश के नंबर वन अखबार ने देश के नंबर वन अभिनेता पर नंबर वन कमेंट किया है।इसने सबसे ज्यादा बिकने वाले अखबार जागरण की शाख पर एक और बट्टा लगा दिया है। उसने देश के नंबर वन अभिनेता अमिताभ बच्चन को 'बब्लू' बताने की धता कर दी है। इस घटना से बिग बी इतने नाराज हैं कि उन्होंने साफ कह दिया है कि हम उसे पकड़ेंगे और धरेंगे…? अब चर्चा तो यही है कि खफा अमिताभ जागरण और संबंधित खबर के लेखक पर पांच करोड़ रूपये के मानहानि का दावा ठोंकने की तैयारी में हैं। खैर कोई कुछ भी करे, लेकिन इस एपीसोड से सबसे ज्याता परेशान हैं- जागण के मालिक संजय गुप्ता, एसोसिएट एडिटर- विष्णु त्रिपाठी, फीचर एडिटर- संतोष तिवारी और नेशनल अखबार के हेड राजीव सचान।

: कानाफूसी : देश के नंबर वन अखबार ने देश के नंबर वन अभिनेता पर नंबर वन कमेंट किया है।इसने सबसे ज्यादा बिकने वाले अखबार जागरण की शाख पर एक और बट्टा लगा दिया है। उसने देश के नंबर वन अभिनेता अमिताभ बच्चन को 'बब्लू' बताने की धता कर दी है। इस घटना से बिग बी इतने नाराज हैं कि उन्होंने साफ कह दिया है कि हम उसे पकड़ेंगे और धरेंगे…? अब चर्चा तो यही है कि खफा अमिताभ जागरण और संबंधित खबर के लेखक पर पांच करोड़ रूपये के मानहानि का दावा ठोंकने की तैयारी में हैं। खैर कोई कुछ भी करे, लेकिन इस एपीसोड से सबसे ज्याता परेशान हैं- जागण के मालिक संजय गुप्ता, एसोसिएट एडिटर- विष्णु त्रिपाठी, फीचर एडिटर- संतोष तिवारी और नेशनल अखबार के हेड राजीव सचान।

चलिए जानते है पूरा माजरा आखिर है क्या? क्यों, कब, कहां, किसने और कैसे अमित जी को 'बब्लू' बना दिया। वैसे तो रोज अखबार छपते हैं और उनमें चश्मा लगाकर देखो तो गलतियां भी हजारों होती हैं। पकड़ में आ जाएं तो गर्दन फंसा दें और न आएं तो फिर अगली बार की तैयारी रहती है। बढ़ते हैं मुद्दे की तरफ। आप ने "कौन बनेगा करोड़पति" का 50वां एपीसोड देखा था या नहीं। देखा तो ठीक, नहीं भी देखा लो यहां पर। उस दिन एक करोड़ जीतने की खुशी में हॉट सीट पर बैठे विजेता ने अमिताभ से सवाल दाग दिया।

पूछ लिया कि आखिर बाबू जी (यानी स्व हरिवंश राय बच्चन जी) आप को बब्लू कह कर घर में बुलाया करते थे। एक संदर्भ की चर्चा करते हुए उनसे पूछा कि क्या कभी परिवार में ऐसी चर्चा हुई कि बाबू जी ने कहा हो कि बब्लू (अमिताभ) की फिल्म लगी है, देख आओ जाकर… इतना सुनते ही अमित जी के चेहरे की हवाइयां उड़ गईं। कुछ पलों के लिए अमिताभ सन्न रह गए। ऐसा लगा कि जैसे मुंह से अल्फाज ही गायब हो गए। स्तब्ध अमिताभ चंद लम्हों के बाद सामान्य हुए और फिर पूछा कि आखिर उन्हें यह किसने बताया? सामने से जवाब आया कि अखबार में पढ़ा। अमिताभ ने फिर सवाल दागा कि किस अखबार में ऐसा छपा…? विजेता ने जवाब दिया नाम (अखबार का) लेना तो ऐसे उचित नहीं होगा…! संबंधित वीडियो देखिए- http://mrpopat.com/video_detail.php?id=7649

लेकिन, इस सवाल ने सूखे अमिताभ के मन को अंदर तक भिगो दिया। शांत और हंसमुख अमिताभ के चेहरे पर नाराजगी की लकीरें साफ नजर आने लगीं। तमतमाए बिग बी से आखिर रहा नहीं गया। कह बैठे कि जिस भी अखबार ने लिखा है, उसका नाम बताइये… पकड़ेंगे और धरेंगे। उसने बिल्कुल गलत छापा है। खैर कार्यक्रम खत्म हुआ और उस विजेता के श्रीमुख से निकल ही पड़ा कि देश के नंबर वन अखबार जागरण ने ही उनके बारे में ऐसा भौण्डा मजाक किया है।

बात तो आई-गई हो गई। लेकिन अमित जी का गुस्सा शांत नहीं हुआ। बाद में उन्होंने सीधे जागरण प्रबंधन को ही निशाने पर ले लिया। एसएमएस कर सीधे जागरण के मालिक और संपादक- श्री संजय गुप्ता को ही संदेश अपनी तीखी प्रतिक्रिया के साथ दे मारा। पूरे मामले की जानकारी दी और पता लगाने को कहा कि आखिर कब, कहां और किसने यह गुस्ताखी की।

फिर क्या संजय गुप्ता को तो ऐसा लगा कि किसी ने उन्हें अंगारों पर बिठा दिया हो। फौरन मिटिंग बुलाई गई। बैठक में आला अफसरान एसोसिएट एडिटर- विष्णु त्रिपाठी, फीचर एडिटर- संतोष तिवारी और नेशनल अखबार के हेड राजीव सचान पहुंच गए। एक-एक कर संजय जी ने सभी के कान गर्म करने शुरू कर दिये। फौरन मामले की जांच के आदेश मिले।

सबने दल-बल के साथ अखबार के पन्नों को पलटना शुरू कर दिया। पहली नजर में किसी को कुछ नजर ही नहीं आया। सब खुश हो गए। बात संजय जी तक को बता दी गई की कुछ भी नहीं है सर जी। फिर जांच का रूख बदला गया। बताया गया कि एक लेख छपा है जिसमें अमिताभ जी के दिल्ली के घर का जिक्र है, उसी में कुछ गड़बड़ हुई है।

फिर अखबार के पन्ने पलटने का दौर शुरू हुआ। कोई कुछ कह रहा था, तो कोई कुछ। बाद में न जाने किसी की नजर झंकार के सोपान पर पड़ गई। उसी में जिक्र किया गया था कि अमिताभ ने अपने बचपन के कुछ दिन मां और बाबू जी के साथ गुलमोहर पार्क वाले घर में बिताये थे। इसी में यह भी छपा था कि बाबू जी उन्हें बब्लू कहा करते थे। पड़ताल के अगले पड़ाव में लेखक की मूल कॉपी निकालने का काम शुरू हुआ।

फिर क्या, संतोष तिवारी की पेशी संजय गुप्ता के सामने लेखक की मूल कॉपी के साथ हुई। दोनों लेखों को संजय गुप्ता ने बड़े कायदे से पढ़ा। फिर संतोष जी को जो फटकार लगाई की वो, कमरे की दीवारें या फिर साथ में बैठे लोग ही बेहतर तरीके से बता सकते हैं। हिदायत दी गई की अगर जागरण के किसी भी संस्करण में उक्त लेखक की कॉपी छप गई तो हश्र वो खुद ही समझ लें।

अब आप की भी जानने की इच्छा होंगे की आखिर वह महान लेखक कौन है, जिसने यह महान काम किया…. जानने के लिए करिए थोड़ा सा इंतजार….!

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित. कानाफूसी कैटगरी की खबरें पढ़ते वक्त हमेशा ध्यान रखें कि ये गासिप को इर्दगिर्द बुनी जाती हैं जिसमें सच्चाई का अंश भी हो सकता है और नहीं भी.

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