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सुख-दुख...

पत्रकार पंकज मिश्रा के भाई की भुखमरी से मौत

पश्चिम बंगाल के चितरंजन- मिहिजाम के एक हिंदी अख़बार के पत्रकार पंकज मिश्रा के मानसिक विकलांग भाई नीरज की मौत ईलाज व भोजन का अभाव में होने की खबर है। पत्रकार पंकज मिश्र के बचपन में ही मां की मौत हो गई। पिता रेलवे की नौकरी में थे तो किसी तरह से दोनों भाइयों को पाला, लेकिन पंकज का बड़ा भाई मानसिक रोगी था, जिसका इलाज पिता के रहते सही से नहीं हो पाया। माँ की मौत के बाद पिता हमेशा दुखी रहते थे, लिहाजा 2008 में उनका भी निधन हो गया।

पश्चिम बंगाल के चितरंजन- मिहिजाम के एक हिंदी अख़बार के पत्रकार पंकज मिश्रा के मानसिक विकलांग भाई नीरज की मौत ईलाज व भोजन का अभाव में होने की खबर है। पत्रकार पंकज मिश्र के बचपन में ही मां की मौत हो गई। पिता रेलवे की नौकरी में थे तो किसी तरह से दोनों भाइयों को पाला, लेकिन पंकज का बड़ा भाई मानसिक रोगी था, जिसका इलाज पिता के रहते सही से नहीं हो पाया। माँ की मौत के बाद पिता हमेशा दुखी रहते थे, लिहाजा 2008 में उनका भी निधन हो गया।

पंकज किसी तरह चितरंजन जैसे छोटे शहर में एक दैनिक अख़बार में एक हजार की नौकरी पा ली। साथ ही इस उम्‍मीद में जीता रहा कि पिता के अनुकंपा के आधार पर रेलवे में नौकरी मिल जाएगी। इसलिए वो शहर छोड़कर दूसरे शहर की ओर भी नहीं जा सकता था। चितरंजन रेल प्रशासन ने भी उसे भरोसा-दिलासा दिया कि नौकरी व पेंशन का लाभ उन्हें जरूर मिलेगा, परन्तु पंकज के अनुसार कभी भी किसी अधिकारी ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। कहीं पैसे की मांग तो कही पैरबी की मांग। बिना माँ-बाप के इस पत्रकार की सुध किसी समाज सेवीसंस्था या पत्रकार समाज ने भी नहीं ली। और न ही कोई रेल मजदूर संघ ने इसे गंभीरता से लिया, जबकि पंकज अपनी फरियाद लेकर सबके दरवाजे जाता रहा।

पिता की मौत के चार साल बाद भी उनके विकलांग भाई को न तो पेंशन ही मिली और न ही अनुकंपा के आधार पर पंकज को नौकरी। चिरेका प्रशासन की लापरवाही का ही नतीजा बताया जा रहा है कि पारिवारिक पेंशन उनके विकलांग पुत्र को न मिलने के कारण उनके समक्ष भुखमरी की स्थिति पैदा हुई और नीरज की मौत हो गई। घटना के बाद चिरेका नगरी कर्मियों में शोक का माहौल व्याप्त है। चिरेका के स्ट्रीट नंबर 35 के क्वार्टर संख्या 9 बी में चिरेका कर्मी स्वर्गीय वासुदेव मिश्रा के दोनों पुत्र- बड़ा नीरज और छोटा पंकज रहते थे। नीरज मिश्रा (36 वर्ष) की मौत शनिवार को हो गई।

पंकज का कहना है कि पत्रकारिता से बहुत ज्‍यादा आमदनी न होने से उन दोनों को आए दिन भूखे रहना पड़ता था। जिससे विकलांग भाई काफी कमजोर हो गया था। उसे बेहतर इलाज की भी जरूरत थी। चिरेका प्रशासन के पास नौकरी तथा पेंशन की गुहार लगाई तो चिरेका प्रशासन ने उनकी कुछ न सुन कर एक अन्य महिला के नाम फेमिली पेंशन चालू करवा दिया। जबकि दोनों भाई को कुछ भी नहीं मिला। इस संबंध में चिरेका स्टॉफ काउंसिल के सदस्य नेपाल चक्रवर्ती ने बताया कि एक रेलवे कर्मचारी का पुत्र होते हुए भी नीरज को भुखमरी का दंश झेलते-झेलते उसे मरना पड़ा, यह बड़े दुर्भाग्य की बात है।

स्‍थानीय लोगों का कहना है कि चिरेका प्रशासन ने जिस महिला को फेमिली पेंशन जारी किया तो उसके घर के सदस्य के सामने भुखमरी की स्थिति क्यों आई और उसे अभाव में मरना पड़ा। उक्त महिला ने क्यों नहीं एक दिन भी दोनों पुत्रों को पेंशन मिलने पर उनका भरण- पोषण किया। इस संबंध मे चिरेका स्टाफ काउंसिल के सदस्य इंद्रजीत सिंह ने बताया कि जिसे जरूरत है, सुविधाएं उसे नहीं मिल रही है। नौकरी की मांग एवं विकलांग भाई को सुविधा दिलाने के लिए पंकज को वर्षों से दर-दर की ठोकरें खानी पड़ रही है। लेकिन उसकी सुनने वाला कोई नहीं है। आखिर विकलांग भाई को पेंशन क्यों नहीं मिला यह जांच का विषय है। चिरेका के वेलफेयर इंस्पेक्टर जयशंकर सिंह ने बताया की नीरज की मौत बड़ी दु:खद घटना है। उसकी रिपोर्ट कल्याण विभाग को सौंपेंगे।

दिवंगत नीरज के भाई पंकज मिश्रा ने बताया कि गत 24 दिसबंर 2012 को चिरेका प्रशासन से सूचना के अधिकार के तहत यह मांग की है कि किस प्रकार एक महिला को उनका फेमिली पेंशन दिया गया। उसके विकलांग भाई को पेंशन से वंचित रखा गया और न ही नौकरी दी गई। इस संबंध में चिरेका के सीपीओ साहब को फोन करने पर कोई उत्तर नहीं मिला। जबकि चिरेका के वरीय जनसंपर्क अधिकारी मंतार सिंह से इस विषय पर पूछे जाने पर उन्होंने बताया कि पिता की मौत के बाद अनुकंपा के आधार पर पंकज मिश्रा ने नौकरी के लिए आवेदन दिया था जो अबतक अधर में लटका है।

चितरंजन से शंकर यादव की रिपोर्ट. शंकर से संपर्क मोबाइल नम्‍बर 8860941633 के जरिए किया जा सकता है.

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