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स्ट्रिंगरों के पेट पर एएनआई की लात!

देहरादून। देश भर में इलेक्‍ट्रानिक चैनलों के स्टिंगरों के पेट पर एएनआई न्यूज एजेन्सी लात मारती हुई दिख रही है, जिसके कारण कई इलेक्‍ट्रानिक चैनलों के स्ट्रिंगर पत्रकार चौराहे पर खड़े होने की हालात में जा पहुंचे हैं। पिछले दो महीने से इलेक्‍ट्रानिक चैनलों के स्ट्रिंगरों से चैनल द्वारा कोई खबर नहीं ली जा रही। खबर नहीं लिए जाने से चैनल स्ट्रिंगरों को पेमेंट भी नहीं कर रहे हैं, जिससे उनके परिवार पर आर्थिक संकट के बादल मंडराते हुए नजर आ रहे हैं।

देहरादून। देश भर में इलेक्‍ट्रानिक चैनलों के स्टिंगरों के पेट पर एएनआई न्यूज एजेन्सी लात मारती हुई दिख रही है, जिसके कारण कई इलेक्‍ट्रानिक चैनलों के स्ट्रिंगर पत्रकार चौराहे पर खड़े होने की हालात में जा पहुंचे हैं। पिछले दो महीने से इलेक्‍ट्रानिक चैनलों के स्ट्रिंगरों से चैनल द्वारा कोई खबर नहीं ली जा रही। खबर नहीं लिए जाने से चैनल स्ट्रिंगरों को पेमेंट भी नहीं कर रहे हैं, जिससे उनके परिवार पर आर्थिक संकट के बादल मंडराते हुए नजर आ रहे हैं।

पिछले काफी समय से देशभर के इलेक्‍ट्रानिक चैनलों में एएनआई न्यूज एजेन्सी द्वारा ही खबरें दी जा रही हैं, जिससे चैनल में काम करने वाले पत्रकारों पर आर्थिक संकट के बादल मंडरा गए हैं। देहरादून में न्‍यूज चैनलों में काम करने वाले कई पत्रकारों का कहना है कि पिछले दो महीने से संस्थान उनकी कोई भी खबर नहीं ले रहा है, जबकि चैनलों पर देहरादून की कई खबरें एएनआई न्यूज एजेन्सी के सौजन्‍य से लगातार चल रही हैं। ऐसे में उनकी खबरों को लिए जाने के एवज में मिलने वाली धनराशि नहीं मिल पा रही है। उनका आर्थिक स्थिति बदतर हो रही है।
 
देहरादून के सचिवालय स्थित मीडिया सेंटर में इन दिनो कई इलेक्‍ट्रानिक चैनलों के स्ट्रिंगर हाथ पर हाथ धरे बैठे रहते हैं, जबकि एएनआई एजेन्सी के कर्मचारी रोजाना कई समाचारों को भेजते हुए नजर आ रहे हैं। सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या इलेक्‍ट्रानिक चैनलों की माली हालत गड़बड़ा गई है, जो वह एजेन्सी से कम दामों पर खबरों को खरीद रहे हैं, जबकि उनके रिपोर्टरो को उन्हीं खबरों की एवज में ज्यादा धनराशि देनी होगी। वर्तमान में इलेक्‍ट्रानिक चैनलों में हो रहे परिवर्तन के कारण कई स्ट्रिंगरों को बाहर का रास्ता दिखाने की कसरत भी पूरी की जा चुकी है।

देहरादून से नारायण की रिपोर्ट.
 

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