: विजेंदर त्यागी की जुबानी, मीडिया के अंदर की 4 कहानी : विजेंदर त्यागी देश के जाने-माने फोटोग्राफर हैं. उन्होंने अपने कैमरे से नेहरू से लेकर मनमोहन तक की तस्वीरें खींची हैं. मतलब, देश की आजादी के पूरे दौर का बहुत करीब से देखा है. वे कैमरे के जरिए भले काम करते रहे लेकिन उनकी आंखें और दिमाग कई सारी कहानियों को देख-समझ रही थीं, जो अकथ कही जाती हैं. पर विजेंदर त्यागी का साहस देखिए कि वे उन सचों का साफ-साफ बता रहे हैं जिसे अक्सर लोग बताने की कभी हिम्मत नहीं कर पाते. जाहिर है, विजेंदर त्यागी के इस लिखे से बहुतों को दिक्कत हो रही होगी और होगी, लेकिन हम यहां कहना चाहेंगे कि भड़ास एक खुला मंच है, जहां दूसरे पक्ष का भी पूरे खुले दिल से स्वागत किया जाता है. विजेंदर त्यागी के लिखे पर अगर किसी को कोई आपत्ति या दिक्कत हो तो वह अपनी बात विस्तार के साथ भड़ास [email protected] को भेज सकता है और उसे पूरे सम्मान के साथ प्रकाशित किया जाएगा. -यशवंत, एडिटर, भड़ास4मीडिया
xxx
…शैतान साधुओं ने जब दौड़ाया तो देवी ने खुद को बाथरूम में बंद कर लिया…
कुम्भ के मेले में कुछ साधुओं को चिलम पीते देखा था. साधु लोग आग जलाकर धूनी रमाये समूह में बैठे थे. एक साधू ने गांजा भरी सुल्फी दूसरे को थमा दी. इस साधू ने चिलम को पकड़ कर ऊपर आसमान की तरफ देखा और रट लगाई… 'काली कलकत्ते वाली, तेरा वचन न जाए खाली, जा बैठी ब्रह्मा की डाली, पलट तेरा ध्यान किधर है'. फिर उसने सुल्फी में दम खींचा और थोड़ी देर बाद धुंआ बाहर निकाल दिया.
काली कलकत्ते वाली का जब एक दिन ध्यान आया तो इण्डिया टुडे की एक महिला फोटोग्राफर शिप्रा दास की याद आई. वह भी उसी कलकत्ते की है. उसके शोषण के लिए दो फोटोग्राफर भुवान सिंह और प्रमोद पुष्करना झुलस रहे थे. परन्तु शिप्रा दास इनके काबू में नहीं आ रही थी. वह फोटोग्राफी के माध्यम से कलकत्ता में बीमार पड़े बूढ़े बाप का इलाज़ करवा रही थी. उसके छोटे भाई भी कुछ नहीं करते थे. एक भाई तो साथ ही दिल्ली में उसके पास रहता था. भुवान सिंह और प्रमोद पुष्करणा ने उसकी परेशानी का फायदा उठाकर उसे अपनी काम पिपासा का निशाना बनाने की कोशिश की. दोनों ही शिप्रा दास को प्रताड़ित करते थे. जब यह देवी इन शैतान साधुओं के चंगुल में नहीं फंसी तो इन लोगों ने उसे इण्डिया टुडे के हैदराबाद के कार्यालय में भिजवा दिया. परन्तुवि फिर भी भुवान सिंह की काम पिपासा शांत नहीं हुई.
भुवान सिंह ने इण्डिया टुडे के हैदराबाद कार्यालय में फोन करना शुरू किया. एक दिन जब शिप्रा दास फोन पर बात कर रही थी, तो वहां के ब्यूरो प्रमुख ने उनकी बात सुन ली. शिप्रा दास ने फोन पर कहा कि, "सर अच्छा मैं आप के साथ सोने के लिए तैयार हो जाऊंगी, चाहे आप बूढ़े हैं या कैसे भी हैं. आप मुझसे शादी कर लें." इस बात को सुनकर उसके ब्यूरो प्रमुख शिप्रा दास के पास आये और सब कुछ बताने को कहा. पहले तो वह झिझकी लेकिन बाद में सब कुछ बता दिया.
थोड़े दिनों के पश्चात गोवा में इण्डिया टुडे समूह की वार्षिक बैठक थी. हैदराबाद से शिप्रा दस और दिल्ली से भुवान सिंह और उनका चेला, प्रमोद पुष्करणा भी पहुंचे. दिन भर की सभाओं और खानपान से निवृत्त होकर रात में इन दोनों ने शिप्रा दास का पीछा करने का फैसला किया. वह भाग कर कमरे में पहुंच गयी. इन दोनों के डर से वह बाथरूम में छुप गयी और कमरे को अंदर से बंद कर लिया. यह दोनों बाथ रूम के दरवाज़े को तोड़ने का प्रयास कर रहे थे. स्थिति नाजुक थी. शिप्रा दास दूसरे दरवाज़े से बाहर निकल गयी और शोर मचाया. होटल के कर्मचारियों ने इन दोनों पुरुषों को पकड़ लिया और खूब पिटाई की. उसी समय वहां इण्डिया टुडे समूह के संपादक इन्दर बधवार भी पंहुच गए. जब उन्हें पूरे प्रकरण का पता चला तो उन्होंने इन दोनों लोगों को सस्पेंड कर दिया. इन्दर बधवार ने शिप्रा दास से कहा कि तुम निश्चिन्त होकर काम करो. किसी से डरने की ज़रूरत नहीं है. कुछ दिन बाद उन्होंने उसे दिल्ली बुला लिया. प्रमोद पुष्करणा अक्सर पिटते रहते हैं. अभी पिछले दिनों प्रेस क्लब के चुनाव के बाद प्रेस क्लब के कर्मचारियों ने भी उन्हें पीटा था, जिसके बाद से उन्होंने क्लब आना बंद कर दिया है.
xxx
अखबार मालिक के बेटों का चरित्र भी दयाल साहब जैसा ही था
दिल्ली की बहादुर शाह ज़फर रोड पर दैनिक समाचार पत्रों के कुछ कार्यालय हैं. वहीं पर लिंक हाउस में पहले अंग्रेज़ी अखबार पैट्रियट का दफ्तर भी था. वहां ईसाई समुदाय के आधुनिक पोप जान दयाल ब्यूरो प्रमुख थे. उसी कार्यालय में शिवानी नामक महिला भी काम करती थी. शिवानी लोकल रिपोर्टिंग से ब्यूरो में आना चाहती थी. उसने अपने ब्यूरो प्रमुख जान दयाल से संपर्क साधा. पहले तो जान दयाल उसको टालते रहे परन्तु बाद में एक दिन जान दयाल ने उसके साथ संपर्क में आने का प्रस्ताव रख दिया. एक दिन वहां के कर्मचारियों ने जान दयाल को शिवानी के साथ बाथरूम में आपत्तिजनक स्थिति में पकड़ लिया. फिर इन दोनों की वहां खूब पिटाई की गयी. जान दयाल तो वहां से भाग गए परन्तु यह आयोजन तो सार्वजनिक हुआ था. इसके पश्चात उन्होंने कलकत्ते के एक समाचार पत्र अमृत बाज़ार पत्रिका से संपर्क साधा क्योंकि उस समाचार पत्र के मालिक के दोनों बेटों का चरित्र भी जान दयाल की भांति ही था. उन लोगों के लिए इज़्ज़त आनी जानी चीज़ है. जान दयाल अपने साथ अपने दो एक चेलों को भी लाये थे. परन्तु जब रफ़ी मार्ग स्थित आई एन एस के अमृत बाज़ार कार्यालय में जान दयाल की गतिविधियों की खबरें फैलीं तो वह वहां से भी पतली गली से निकल आये.
xxx
वो मालकिन इसलिए रो रही है क्योंकि उसका असली हसबैंड मर गया है!
पूर्व केंद्रीय मंत्री माधव राव सिंधिया की उत्तर प्रदेश चुनाव के दौरान हेलीकाप्टर दुर्घटना में मृत्यु हो गयी थी. उनकी शव यात्रा में भाग लेने बहुत से लोग ग्वालियर गए थे. दिल्ली के एक समाचार पत्र की मालकिन भी गयी थी. उनके पालतू संपादक भी उन्हें लेने स्टेशन पर आये थे. वह महिला संपादक और मालिक अपने पालतू संपादक के कंधे पर सिर रख कर रो रही थीं. चेन्नई के एक अंग्रेज़ी अखबार की मालकिन भी उसी वक़्त ग्वालियर के स्टेशन पर उतरी थीं. उनके साथ उनका मैनेजर भी आया था. जब चेन्नई वाली मालकिन ने देखा कि दिल्ली वाली मालकिन अपने पालतू संपादक के कंधे पर सर रख कर रो रही है, तो चेन्नई वाली ने अपने मैनेजर से कहा कि, "do you know why this bitch is weeping? Because her actual husband has died therefore this bitch is weeping." मैनेजर ने मालकिन से कहा- ,"Madam, she is a married woman." तब चेन्नई वाली मालकिन ने कहा- "You do not know. The one she is married to is her working husband. Maharaja was her actual husband."
xxx
अखबार मालिक की काम पिपासा और लोहिया जी का शोर
नेहरूजी के प्रधान मंत्री काल में उनके कटु आलोचक राम मनोहर लोहिया बिशम्भर दास मार्ग पर रहते थे. उनके आवास के बराबर में एक खाली ज़मीन पड़ी थी जिसमें बरसात के कारण बड़ी घास उग आई थी. उन्हीं दिनों दिल्ली के एक अखबार का मालिक अपनी एक महिला मित्र को लेकर आया. दोनों इसी घास में बैठकर तन्हाई का लाभ उठाने लगे. हल्का हल्का अँधेरा हो चला था. जब मालिक-संपादक अपनी काम पिपासा को शांत करके बाहर निकले तो लोहिया जी ने शोर मचा दिया कि मुझे मरवाने के लिए जवाहरलाल ने गुंडे भेजे हैं. आस पास के लोग जमा हो गए. परन्तु लोहिया जी वहां से हटे नहीं. कुछ देर बाद पुलिस आ गयी. नई दिल्ली के थाना प्रमुख और एसपी भी पहुंचे. कुछ देर बाद दिल्ली के पुलिस प्रमुख भी आ गए. पुलिस प्रमुख ने नई दिल्ली के एसपी को वहीं आदेश दे दिया कि मामले की जांच की जाए. मामला जवाहरलाल से सम्बंधित था तो जांच होनी ही थी अन्यथा लोहिया जी मामले को लोक सभा में उठाते और प्रधान मंत्री को जवाब देना पड़ता. बात पूरे देश में फैलती. दूसरे दिन पुलिस प्रमुख ने लोहिया जी को बताया कि आपको मारने के लिए नेहरू जी ने कोई गुंडा नहीं भेजा था. जो व्यक्ति यहाँ से निकल कर भागा था वह और कोई नहीं एक अखबार का मालिक विश्वबन्धु गुप्ता था जो अपनी प्रेमिका के साथ कोई तनहा जगह न मिलने के कारण आकर यहाँ बैठ गया था.
xxx
लेखक विजेंदर त्यागी देश के जाने-माने फोटोजर्नलिस्ट हैं और खरी-खरी बोलने-कहने-लिखने के लिए चर्चित हैं. पिछले चालीस साल
से बतौर फोटोजर्नलिस्ट विभिन्न मीडिया संगठनों के लिए कार्यरत रहे. कई वर्षों तक फ्रीलांस फोटोजर्नलिस्ट के रूप में काम किया और आजकल ये अपनी कंपनी ब्लैक स्टार के बैनर तले फोटोजर्नलिस्ट के रूप में सक्रिय हैं. ''The legend and the legacy : Jawaharlal Nehru to Rahul Gandhi'' नामक किताब के लेखक भी हैं विजेंदर त्यागी. यूपी के सहारनपुर जिले में पैदा हुए विजेंदर मेरठ विवि से बीए करने के बाद फोटोजर्नलिस्ट के रूप में सक्रिय हुए. विजेंदर त्यागी को यह गौरव हासिल है कि उन्होंने जवाहरलाल नेहरू से लेकर अभी के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की तस्वीरें खींची हैं. वे एशिया वीक, इंडिया एब्राड, ट्रिब्यून, पायनियर, डेक्कन हेराल्ड, संडे ब्लिट्ज, करेंट वीकली, अमर उजाला, हिंदू जैसे अखबारों पत्र पत्रिकाओं के लिए काम कर चुके हैं. विजेंदर त्यागी से संपर्क 09810866574 के जरिए किया जा सकता है.
विजेंदर त्यागी के पिछले लेखों को पढ़ने के लिए नीचे दिए गए शीर्षकों पर क्लिक कर सकते हैं…
चप्पल फेंक कर मारने वाली महिला पत्रकार





