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इलाहाबाद

अनुप्रिया पटेल ने पीएम और सीएम को पत्र लिखकर शहीद परिवारों का पक्ष रखा

शहीद बाबूलाल के परिवार के आंदोलन के बाद मुख्यमंत्री अखिलेख यादव आज शहीद के गांव पहुंचे… शहीद परिवार को सम्मान और आर्थिक मदद देने की मांग को लेकर आन्दोलन करने वाली अपना दल की राष्ट्रीय महासचिव और विधायक अनुप्रिया पटेल ने पीएम और सीएम को पत्र लिखकर शहीद परिवारों का पक्ष रखा है… अनुप्रिया ने इलाहाबाद में पीसी कर ये पत्र प्रेस को जारी किया है…

शहीद बाबूलाल के परिवार के आंदोलन के बाद मुख्यमंत्री अखिलेख यादव आज शहीद के गांव पहुंचे… शहीद परिवार को सम्मान और आर्थिक मदद देने की मांग को लेकर आन्दोलन करने वाली अपना दल की राष्ट्रीय महासचिव और विधायक अनुप्रिया पटेल ने पीएम और सीएम को पत्र लिखकर शहीद परिवारों का पक्ष रखा है… अनुप्रिया ने इलाहाबाद में पीसी कर ये पत्र प्रेस को जारी किया है…

माननीय मुख्यमंत्री जी,

उत्तर प्रदेश सरकार

सादर अभिवादन

माननीय, आप प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं। विश्वास किया जाता है कि नीतियां और उन्हें लागू किये जाने वाले हर फैसले आपकी आखिरी सहमति से ही पुष्ट होते हैं। इसी आधार पर एक उम्मीद लिए आपको पत्र लिख रही हूं । पत्र का उद्देश्य है उस भेदभाव की तरफ आपका ध्यान आकृष्ट कराना जिसे देश की तरफ से तो महसूस किया जा रहा है, लेकिन शासन-प्रशासन की तरफ से भी महसूस किया जा रहा है, ऐसा बिल्कुल नहीं दिखाई पड़ता।

महोदय, आपका ध्यान उस जांबाज सी.आर.पी.एफ़ जवान की शहादत और शहादत के बाद उसके परिवार की मदद के स्तर पर प्रशासनिक पहल की गैरमौजूदगी की तरफ दिलाना चाहती हूं, जिसके शव को नक्सलवादियों द्वारा बम की तरह या बम की सहायक एक्सेसरीज की तरह इस्तेमाल किया गया। इलाहाबाद के रहने वाले शहीद जवान का नाम है, बाबूलाल पटेल और जिसकी विधवा तीन महीने की गर्भवती है।

शहीद परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करने के लिए शहीद जवान के घर न तो किसी राजनेता की आमद हुई और न ही उस फोर्स के उच्चतम अधिकारियों ने वहां जाना मुनासिब समझा, जिस फोर्स के बाबूलाल पटेल एक जांबाज़ सैनिक थे। महोदय, शहीद की पत्नी और पिता को सम्मान की मांग करते हुए अनशन पर बैठना पड़ा। तब जाकर उनके परिवार को आर्थिक मदद मिलने की शुरूआत हुई और संवेदना व्यक्त करने शासन-प्रशासन के लोग पहुंचे।

भारत-पाकिस्तान की बाघा सीमा पर शहीद हुए हेमराज सिंह और सुधाकर सिंह के घर न सिर्फ राजनेताओं की बाढ़ आयी, बल्कि आप स्वयं भी वहां पहुंचे। जनरल विक्रम सिंह भी उनके घर पधारे। इससे उन शहीद सैनिकों के परिवार के मनोबल बढ़े और हर तरफ से मिली मदद की बड़ी राशि से उनके परिवार के भविष्य सुरक्षित भी हुए। हालांकि हेमराज के परिवार को भी सम्मान के लिए अनशन पर बैठना पड़ा। फिर भी ये कदम निश्चित रूप से इत्मिनान देते हैं। मगर देश के नाम अपने आपको कुर्बान करने वाले शहीद बाबूलाल पटेल के परिवार को जिस तरह से अकेला छोड़ दिया गया है, उससे न सिर्फ ये परिवार हताश हुआ है, बल्कि सेना में जाने को आकुल व्याकुल नौजवानों और उनके परिवार वालों में भी हतोत्साहन पैदा कर रहा है। ये हतोत्साहन भविष्य के सैनिक पैदा करने में तो रोड़ा बनेगा ही, शासन-प्रशासन के दोहरे रवैया से उपजे रोष को भी बढायेगा।

महोदय, आम लोगों की भावनाओं में ये सवाल बार-बार आते हैं कि क्या सैनिकों की शहादत के मूल्य भी अलग अलग होते हैं ? राजनीतिक फायदे नुकसान के तराजू पर क्या शहादत को भी तौला जाता है ? क्या हर जायज मदद पाने के लिए धरना-प्रदर्शन और राजनीतिक आंदोलन ही एक मात्र समाधान हैं ? महोदय, दरअसल सेना और आंतरिक सुरक्षा बलों के जवानों के लिए जो सेवा शर्तें हैं, उन्हीं में ये अंतर अंतर्निहित है। इससे न सिर्फ बाबूलाल पटेल जैसे शहीदों की शहादत अपमानित होती है बल्कि शहादत को लेकर चलती आम लोगों की सोच पर करारा प्रहार भी होता है।

मुख्यमंत्री जी, आपसे निवेदन है कि सबसे पहले शहीद बाबूलाल पटेल के परिवार को ज्यादा से ज्यादा आर्थिक मदद देकर उन्हें आर्थिक रूप से सुरक्षित किया जाए। बाबूलाल पटेल के परिवार को भी उतनी ही आर्थिक मदद दी जाए जितनी सरहद पर शहीद हुए हेमराज सिंह और सुधाकर सिंह के परिवार जनों को मिली है। ताकि शहीद की विधवा के गर्भ में पल रहा बच्चा जब समझने बूझने लायक बने तो अपने देश पर उसे भी ये सोचकर गर्व हो कि देश का जितना उसके पिता ने ख्याल रखा, देश ने भी उतना ही उसके पिता के परिवार का ध्यान रखा। जब वो बच्चा अपने दोस्तों के साथ पिता की शहादत की चर्चा करे तब अपने पिता की शहादत पर उसके भीतर वितृष्णा पैदा नहीं हो, बल्कि उसके साथ उसके दोस्तों के बीच देश की सेवा में क़ुर्बान होने की प्रेरणा मिले।

ऐसी मानसिकता और स्थितियां पैदा हो, इसके लिए जरूरी है कि आंतरिक सुरक्षा में शहीद होने वाले सभी जवानों के परिजनों को उतनी ही आर्थिक मदद और सम्मान मिले, जितनी सरहद पर शहीद होने वाले जवानों के परिजनों को मिलती है। क्योंकि दोनों ने देश की सुरक्षा के लिए ही अपने प्राणों की आहूति दी है।

प्रदेश के मुख्यमंत्री होने के नाते मैं आपसे मांग करती हूं कि आप ये सुनिश्चित कराने के लिए जरूरी कदम उठाएंगे कि आगे से सेना और आंतरिक सुरक्षा में लगे जवानों की शहादत में भेद नहीं किया जाएगा। दोनों की शहादत को एक माना जाएगा। साथ ही आप ये भी सुनिश्चित करेंगे कि आगे से शहीदों के परिजनों को सम्मान और मदद के लिए आवाज नहीं उठानी पड़ेगी।

इसी विश्वास के साथ

अनुप्रिया सिंह पटेल

राष्ट्रीय महासचिव, अपना दल

विधायक, उत्तर प्रदेश विधानसभा

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