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आखिर दो दिन बाद ही क्यों दर्ज़ हुआ एफआईआर में चौटाला का नाम?

करनाल : शिक्षक भर्ती घोटाले में सीबीआई की विशेष अदालत द्वारा प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला विधायक अजय चौटाला और शेर सिंह बड़शामी सहित 55 लोगों को दोषी मानते हुए 10 साल से लेकर 4 साल तक की सजा सुनाए जाने के बाद भले ही कांग्रेस भीतरघाते विपक्षी पार्टी के धूमिल होने की आशंका को लेकर प्रसन्न दिखाई देती हो, लेकिन जिस तरह से सीबीआई ने अदालत के समक्ष गवाह और दस्तावेज पेश किये हैं उस पर यह चिंतन करना अब बेहद जरुरी हो गया है कि क्या वास्तव में कांग्रेस ने इस मामले में सीबीआई का दुरुपयोग किया?

करनाल : शिक्षक भर्ती घोटाले में सीबीआई की विशेष अदालत द्वारा प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला विधायक अजय चौटाला और शेर सिंह बड़शामी सहित 55 लोगों को दोषी मानते हुए 10 साल से लेकर 4 साल तक की सजा सुनाए जाने के बाद भले ही कांग्रेस भीतरघाते विपक्षी पार्टी के धूमिल होने की आशंका को लेकर प्रसन्न दिखाई देती हो, लेकिन जिस तरह से सीबीआई ने अदालत के समक्ष गवाह और दस्तावेज पेश किये हैं उस पर यह चिंतन करना अब बेहद जरुरी हो गया है कि क्या वास्तव में कांग्रेस ने इस मामले में सीबीआई का दुरुपयोग किया?

अदालत का अपना निर्णय भले ही सही हो लेकिन इस मामले में सीबीआई के दुरुपयोग होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता दीगर सच यह है कि जब केंद्र में कांग्रेस की सरकार बनी तो महज़ दो दिन के बाद ही सीबीआई ने न केवल चार्जशीट में ओमप्रकाश चौटाला और अजय चौटाला को नामांकित कर दिया बल्कि एफआईआर में दोनों नेताओं का नाम दर्ज करते समय इनेलो के दिग्गजों से कोई पूछताछ तक नहीं की गई थी। इस मामले में सबसे बड़ा पेंच यह भी उभर कर सामने आ रहा है कि जिस आईएएस अधिकारी संजीव कुमार के दस्तावेजों को सीबीआई ने बतौर गवाह पेश कर गंभीरता से लिया है। उसी अधिकारी की इसी इनेलो सरकार ने उस समय उन्हें उनके पद से बर्खास्त कर दिया था, जब उनका नाम स्टेशनरी घोटाले से जुड़ा था। इनेलो सरकार ने ही उस समय संजीव कुमार के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश भी दिए थे।

साफ़ अंदाजा लगाया जा सकता है कि संजीव कुमार तत्कालीन इनेलो सरकार से बेहद फेडअप थे। यही नहीं पूर्व में बंसीलाल सरकार ने भी एक घोटाले के तहत उनके खिलाफ मामला भी दर्ज किया था। तब वह सर्व शिक्षा अभियान के निदेशक के तौर पर कार्यरत थे। यानी संजीव कुमार दो सरकारों में भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे रहे। सूत्रों ने जानकारी दी है कि चौटाला और उसके पुत्र को जेल की सलाखों के पीछे पहुंचाने के लिए सीबीआई ने अधिकारी संजीव कुमार को बतौर गवाह पेश कर उन्हें बाइज्ज़त रिहा करवाने का वायदा तक किया, लेकिन अंत में उन्हें भी सीबीआई ने सजा दिलवा दी। इसके पीछे कांग्रेस का यही तर्क और वज़ह सामने आ रही है कि कांग्रेस इस बात से डर रही थी कि कहीं संजीव कुमार की रिहाई होने के बाद और कोई अधिकारी कांग्रेस के घोटालों का पर्दाफाश ना कर दे, इसलिए कांग्रेस ने सीबीआई का इस्तेमाल करते हुए संजीव कुमार को भी जेल की सलाखों के पीछे भिजवा दिया।

यह बात काबिलेगौर है कि पिछले कईं वर्षों से इनेलो के सुप्रीमो ओमप्रकाश चौटाला और उनकी पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेता लगातार केंद्र सरकार द्वारा किये गए भ्रष्टाचार और घोटालों का लगातार जनता के बीच खुलासा कर रहे थे। वहीँ ओमप्रकाश चौटाला ने काफी समय से हरियाणा में आवासीय कम्पनी ड़ीएलएफ़ और राबर्ट वाड्रा के लेन -देन मामले में उन पर खासा निशाना साध रखा था। प्रदेश में लगातार हाशिये पर पहुँच रही हुड्डा सरकार की गिरती लोकप्रियता और घटती सीटों से घबराई केंद्र की कांग्रेस सरकार इस बात से भी डर रही थी कि कहीं हरियाणा में यदि इनेलो की सरकार आई तो राबर्ट वाड्रा पर इनेलो सरकार शिकंजा कस सकती है। जिससे कांग्रेस की न केवल बड़ी बदनामी होगी बल्कि पूरे देश में कांग्रेस की फजीहत भी होगी। इसका एक और कारण भी साथ जुडा था कि कांग्रेस राहुल गांधी को जिस पद पर ले जाना चाहती है, वह रास्ता भी पूरी तरह से धूमिल हो जाता। इसलिए कांग्रेस ने सीबीआई के दम पर चौटाला और इनेलो के खिलाफ ऐसी बिसात बिछाई कि 55 लोग भीतर चले गए वर्ना पूरा हरियाणा जानता है कि 3206 शिक्षकों में से 703 शिक्षक केवल महेंद्रगढ़ और रेवाड़ी जिले से हैं। चौटाला उस समय रोड़ी विधानसभा क्षेत्र से विधायक थे और अपने क्षेत्र से 5 से 10 लोगों को ही शिक्षक भर्ती किया गया। साफ़ लग रहा है कि शिक्षक भर्ती करते समय अपने हल्के को तरजीह ना देकर सभी जिलों के बेरोजगार युवाओं को रोज़गार देने का काम किया। इस मामले में आरोपियों को दोषी बनाकर अधिकतम सज़ा देना भी हैरान कर रहा है।

अब सवाल यह उभर कर सामने आ रहा है कि यदि बेरोजगार लोगों को रोज़गार उपलब्ध करवाने वाले मुख्यमंत्री को दोषी मानकर जेल की सलाखों के भीतर डाला जा रहा है तो वह कांग्रेस के नेता अब तक खुलेआम क्यों घूम रहे हैं, जिन पर पहले नौकरी लगाने की एवज में पैसे लेने और पैसे ना लौटाने की एवज में हत्या जैसे गंभीर आरोप लग चुके हैं। करमसिंह हत्याकांड के आरोपों से घिरे प्रदेश के पूर्व मंत्री ओमप्रकाश जैन व पूर्व मुख्य संसदीय सचिव जिलेराम शर्मा अभी भी जेल की सलाखों के भीतर नहीं पहुँच पाए, जबकि हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार द्वारा पूर्व में की गई क्राईम ब्रांच द्वारा जांच को निरस्त करते हुए सीबीआई जांच के आदेश दिए थे। आखिर सीबीआई अभी तक दोनों नेताओं के खिलाफ चार्जशीट दाखिल क्यों नहीं कर पायी? साफ़ लग रहा है कि कांग्रेस दोनों नेताओं को बचा रही है। बहरहाल शिक्षक भर्ती घोटाले में दोषी माने गए चौटाला समेत कई लोग भले ही जेल पहुँच गए हों, मगर उच्च-न्यायालय द्वारा विधानसभा में क्लर्कों की भर्ती तथा पीटीआई अध्यापकों की भर्ती रद्द किये जाने के बाद क्या इसके लिए हरियाणा में चल रही कांग्रेस की सरकार जिम्मेवार हैं? यदि हाईकोर्ट का निर्णय सही है तो कांग्रेस भी समान रूप से दोषी है तो इनके खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला नहीं बनता यदि बनता है तो इसका जवाब सीबीआई के पास भले ही ना हो लेकिन देश व प्रदेश की जनता के पास इसका जवाब मौजूद है, जो कांग्रेस को लोकसभा व विधान-सभा चुनावों के बाद जरुर मिल जाएगा।

अनिल लांबा की रिपोर्ट.

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