बी.पी. गौतम : हमारे यहाँ कल एक बड़े अखबार ने शहर के बुद्धिजीवी टाइप लोगों के साथ एक बैठक कर अखबार को और बेहतर बनाने की दिशा में सुझाव मांगे, संपादक, सुपर संपादक बगैरह मौजूद थे, एक बुजुर्ग व्यक्ति ने सुझाव रखा कि आजकल बलात्कार की खबरों को कुछ ज्यादा ही अहमियत दी जा रही है, सुबह को पत्नी, पुत्र, बहू और नातिन-नातियों के साथ चाय पीते हुए अखबार पढ़ता हूँ, तो शर्म आती है, साथ ही बाद में वह सब अख़बार पढ़ते हैं, तो अच्छा नहीं लगता … संपादक ने शिकायत पर सुझाव माँगा, तो वह बोले- एक पन्ना बलात्कार की खबरों के लिए निश्चित कर दीजिये, उस पन्ने को हम अखबार घर में आने से पहले ही फाड़ दिया करेंगे..
… पता है मुझे, इस बुजुर्ग को आपका मन गाली देने का करेगा, इसलिए बता दूं कि बुजुर्ग करोड़पति हैं और उनकी बहू-बेटियां उच्च शिक्षा प्राप्त हैं, पर स्कर्ट-स्लीवलेस ब्लाउज पहन कर मटरगस्ती नहीं करती और हाँ, उनके सिर पर ऐसा करने को बन्दूक नहीं रखी गई, सिखाया गया है… इंडिया वाले लोग भारत की चिंता को कभी महसूस नहीं कर सकते … जब से पांच प्रतिशत महिलायें स्कर्ट और स्लीवलेस ब्लाउज पर आई हैं, तब से हाहाकार मचा हुआ है … और ताज्जुब की बात यह है कि वह पूरे भारत को अपने जैसा बनाना चाहती हैं … तुम करो यार, पर औरों को तो बख्शो … पता हैं नहीं मानेंगी, क्योंकि जब तक सबको अपना जैसा नहीं बना लेंगी, तब तक उन्हें लोग सेक्सवर्कर की नज़र से देखते रहेंगे … अपनी इज्जत के लिए सबको सड़क पर लाकर मानेंगी…
बदायूं के पत्रकार बीपी गौतम के फेसबुक वॉल से.





