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वो राजेन ही था जिसके चलते हम हिमाचल में अमर उजाला को नम्‍बर एक बना पाए : दिनेश जुयाल

राजेन टोडरिया सिर्फ एक लड़ाका ही नहीं थे बल्कि कलम को भी नश्‍तर की तरह चलाना जानते थे. हिमाचल में अमर उजाला की पत्रकारिता का काल उनके जीवन का सबसे महत्‍वपूर्ण दौर माना जाता है. अमर उजाला की हिमाचल की लांचिंग वर्तमान में बरेली के संपादक पद की जिम्‍मेदारी निभा रहे वरिष्‍ठ पत्रकार दिनेश जुयाल जी के नेतृत्‍व में हुई थी. दिनेश जुयाल जी उस समय संपादक हुआ करते थे तो राजेन टोडरिया ब्‍यूरोचीफ. दिनेश जुयाल जी राजेन टोडरिया के आकस्मिक निधन से इतने मर्माहत हैं कि उनके बारे में बात करते समय उनकी लड़खड़ाती जुबान उनकी पीड़ा बयान कर रही थी.

राजेन टोडरिया सिर्फ एक लड़ाका ही नहीं थे बल्कि कलम को भी नश्‍तर की तरह चलाना जानते थे. हिमाचल में अमर उजाला की पत्रकारिता का काल उनके जीवन का सबसे महत्‍वपूर्ण दौर माना जाता है. अमर उजाला की हिमाचल की लांचिंग वर्तमान में बरेली के संपादक पद की जिम्‍मेदारी निभा रहे वरिष्‍ठ पत्रकार दिनेश जुयाल जी के नेतृत्‍व में हुई थी. दिनेश जुयाल जी उस समय संपादक हुआ करते थे तो राजेन टोडरिया ब्‍यूरोचीफ. दिनेश जुयाल जी राजेन टोडरिया के आकस्मिक निधन से इतने मर्माहत हैं कि उनके बारे में बात करते समय उनकी लड़खड़ाती जुबान उनकी पीड़ा बयान कर रही थी.

जुयाल जी ने कहा कि वो एक लड़ाकू पत्रकार था. उससे भी अच्‍छा इंसान था. उत्‍तराखंड के लिए उसके मन मामृत्‍व भरा हुआ था. पहाड़ के लिए वह किसी से भी लड़ने को तैयार रहता था. उनके अंदर बहुत ही प्रतिभा थी, पढ़ा-लिखा था. उसकी लेखनी में एक धार थी. राजेन के साथ अपने काम के अनुभव के बारे में दिनेश जुयाल ने बताया कि ये राजेन ही था जिसकी वजह से हम अमर उजाला को हिमाचल में नम्‍बर एक बना पाए. वो पहाड़ की जमीन को समझता था. वो पहाड़ के दर्द को समझता था.

उसने इसी दर्द को साझा करते हुए लोगों को अखबार से जोड़ा. ये दौर राजेन के साथ मेरा भी सबसे अच्‍छा काल था, जब हम पहले से जमे अखबारों को पीछे छोड़ते हुए अमर उजाला को हिमाचल में नम्‍बर एक बना पाए. अगर हमने अमर उजाला को तीन साल में नम्‍बर एक पर पहुंचाया तो उसका सबसे बड़ा कारण राजेन टोडरिया था. उसका चले जाना पत्रकारिता के लिए बहुत ही दुखद है. वो जीवन भर पत्रकारिता में आम आदमी और पहाड़ के लिए लड़ता रहा. 

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