बीजेपी भड़की हुई है। मगर कांग्रेस मौन है। अपने प्रवक्ता की बयानबाजी का क्या किय़ा जाए, यह कांग्रेस की समझ में नहीं आ रहा है। बहुत सारे लोगों को लग रहा है कि कांग्रेस प्रवक्ता शकील अहमद का दिमाग खराब हो गया है। वैसे अपना मानना है कि उनकी निजी औकात कुछ भी नहीं है। पर, सोनिया मेहरबान तो गधा भी पहलवान वाला मामला है। कांग्रेस को हर जगह, हर पैनल और हर खांचे में मुस्लिम कोटा चाहिए। सो, शकील अहमद कोटे से कांग्रेस के प्रवक्ता बने हुए हैं।
वैसे, इतिहास गवाह है कि मेहरबानी जब सीधे राजमाता की हो और आशीर्वाद राजकुमार का हो, तो दो कौड़ी के किसी भी इंसान का दिमाग इतना तो खराब हो ही जाता है कि वह अपनी औकात भूलकर किसी के भी बारे में कुछ भी बोलने लग जाए। राजनीति में इस तरह से बोलने को बकवास कहा जाता है। और शकील अहमद बकवास कर रहे हैं, यह सच है। शकील बीते रविवार को राजस्थान आए थे। सीकर में एक किसान सम्मेलन में भाषण दे रहे थे और देते – देते सीधे लालकृष्ण आडवाणी तक पहुंच गए। देश के बेहद सम्मानित नेता, पूर्व उप प्रधानमंत्री और बीजेपी के शीर्ष नेता लालकृष्ण आडवाणी के पाकिस्तानी मूल पर सवाल उठाते हुए शकील ने कहा कि भारत विभाजन के दौरान आडवाणी देश की सेवा के लिए नहीं बल्कि सेवा के बदले मेवा खाने के लिए भारत आए थे।
आडवाणी पर प्रहार करते हुए शकील ने यह तो कहा ही कि उन्होंने सत्ता के लिए हिंदुत्व को मुद्दा बनाया और फिर भूल गए। कांग्रेस प्रवक्ता ने बीजेपी पर सांप्रदायिक होने का आरोप लगाते हुए पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी पर निशाना साधा। बोले कि आडवाणी सत्ता के लिए पाकिस्तान छोड़कर भारत आए। और यह तक कह डाला कि आडवाणी को हिंदुओं की इतनी ही चिंता थी तो पाकिस्तान में रहने वाले हिंदुओं की सेवा करते। शकील अहमद के मुताबिक आडवाणी पाकिस्तान सिर्फ पैदा ही नहीं हुए, उनकी बीए तक की शिक्षा पाकिस्तान की है। अगर सचमुच आडवाणी को हिंदू समाज की सेवा करनी थी तो अपने घर में करते मगर वहां सेवा के बदले मेवा नहीं मिलता। वे एमपी, एमएलए, मंत्री और प्रधानमंत्री के उम्मीदवार नहीं होते।
शकील अहमद जब हमारे भूतपूर्व लौहपुरुष पर प्रहार कर रहे थे, तब वे यह भूल गए थे कि हमारे पूर्व पीएम इंद्रकुमार गुजराल भी तो पाकिस्तान से ही आए थे। और राजनीति में किसी गली मोहल्ला स्तर के भी नेता ना होने के बावजूद कांग्रेस की तरफ से देश पर थोप दिए गए आज के हमारे माननीय पीएम और सरदार मनमोहन सिंह भी कोई आसमान से नहीं टपके, या भारत माता का सीना चीरकर सरदारजी प्रकट नहीं हुए थे। वे भी तब के हिंदुस्तान और आज के पाकिस्तान की धरती पर ही पैदा हुए थे, और विभाजन के दौरान पाकिस्तान छोड़कर भारत आए थे। शकील अहमद के बयान को सच मान लिया जाए, तो इंद्रकुमार गुजराल तो खैर अब इस दुनिया में नहीं है, पर वे मनमोहन सिंह पर सीधे प्रहार कर रहे हैं।
आडवाणी ने तो संघर्ष किया, जेल गए, लाठियां खाईं। लोगों की सेवा की, फिर वे राजनीति में बड़े पदों पर पहुंचे। लेकिन हमारे सरदार मनमोहन सिंह ने तो सिर्फ सरकारी नौकरियों की मलाई खाई और कांग्रेस की मेहरबानी से सरकार में आ गए। पहले वित्त मंत्री बने और बाद में सोनिया गांधी ने पीएम की कुर्सी को ठुकरा दिया, तो वे पीएम पद पर आ गए। बीजेपी शकील अहमद और कांग्रेस से माफी की मांग कर रही है। लेकिन अपना मानना है कि हमारे देश में माफी मांगने
के बावजूद कोई किसी माफ नहीं करता। बदले की आग में जल रहे दो सिखों ने तत्कालीन पीएम श्रीमती इंदिरा गांधी को गोलियों से छलनी करके उनकी हत्या तक कर दी, फिर भी स्वर्ण मंदिर में सेना भेजने के लिए आज तक सिखों ने कांग्रेस को माफ थोड़े ही किया है।
लेखक निरंजन परिहार राजनीतिक विश्लेषक और वरिष्ठ पत्रकार हैं.





