उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से बहुत ही दुखद खबर आयी…अपने बहुत करीबी साथी वरिष्ठ पत्रकार श्री राजेन टोडरिया के असमय निधन की…पत्रकारों की जमात आज बहुत बड़ी हो गयी है लेकिन राजेन भाई जैसे लोग तो गिने चुने ही है…30-32 सालों की उनकी पत्रकारिता में उनको मालामाल करने के बहुत मौके आए लेकिन उन्होंने गरीबी में रहने का ही वरण किया और जनोन्मुखी पत्रकारिता की राह पर चलते रहे…तमाम अखबारों के संवाददाता से संपादक तक रहे लेकिन कभी बदले नहीं.
देहरादून में तो वे अमर उजाला को प्रतिष्ठा दिलाने के सबसे बड़े कारक रहे…मेरा उनका रिश्ता करीब दो दशक का तो हो ही गया था..अमर उजाला में उनके रहने के दौरान जो रिश्ते बने थे वे लगातार गहराते गए…वे बहुत ज्ञानवान पत्रकार थे और खुद में एक संस्था..युवा पत्रकारों को उन्होंने लगातार दिशा और मार्गदर्शन दिया…उनके निधन की खबर से मन इतना दुखी हो गया है कि कलम नहीं चल रही है…काश राजेन भाई कुछ दिन और रहते और उन अधूरे कामों को हम पूरा कर लेते जिनके बारे में हमने कुछ खाका तैयार किया था…उनका निधन खास तौर हिंदी पत्रकारिता और सरोकारी पत्रकारों के लिए एक बड़ा आघात है…भाभी जी और बच्चों के साथ उनसे जुड़े सैकड़ों साथियों को शोक की इस घड़ी में संबल मिल सके.
वरिष्ठ पत्रकार अरविंद कुमार सिंह के फेसबुक वॉल से साभार.





