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हिंदुस्‍तान विज्ञापन घोटाला : जवाब देने में डीएवीपी अधिकारियों को छूट रहे पसीने

मुंगेर। आजादी के बाद पहली बार बिहार के मुंगेर की पुलिस ने भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के विज्ञापन एवं दृष्य प्रचार निदेशालय (डीएवीपी, नई दिल्ली) को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 91 के तहत मुंगेर पुलिस के समक्ष विश्वस्तरीय 200 करोड़ के दैनिक हिन्दुस्तान विज्ञापन घोटाला से जुड़े सरकारी दस्तावेज प्रस्तुत करने का लिखित आदेश दिया है। मुंगेर पुलिस ने डीएवीपी निदेशालय, नई दिल्ली को कुछ महत्वपूर्ण बिन्दुओं पर लिखित प्रतिवेदन भी निर्धारित समय सीमा में मुंगेर पुलिस के समक्ष प्रस्तुत करने का लिखित आदेश दिया है।

मुंगेर। आजादी के बाद पहली बार बिहार के मुंगेर की पुलिस ने भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के विज्ञापन एवं दृष्य प्रचार निदेशालय (डीएवीपी, नई दिल्ली) को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 91 के तहत मुंगेर पुलिस के समक्ष विश्वस्तरीय 200 करोड़ के दैनिक हिन्दुस्तान विज्ञापन घोटाला से जुड़े सरकारी दस्तावेज प्रस्तुत करने का लिखित आदेश दिया है। मुंगेर पुलिस ने डीएवीपी निदेशालय, नई दिल्ली को कुछ महत्वपूर्ण बिन्दुओं पर लिखित प्रतिवेदन भी निर्धारित समय सीमा में मुंगेर पुलिस के समक्ष प्रस्तुत करने का लिखित आदेश दिया है।

दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 91 में प्रावधान है कि किसी भी मुकदमे के अनुसंधान के मामले में किसी भी पुलिस स्टेशन के थाना-प्रभारी संबंधित विभाग के व्यक्ति से दस्तावेज प्राप्त कर सकते हैं। इस कानून के प्रावधान के अनुरूप संबंधित विभाग के व्यक्ति बताए हुए स्थान पर निर्धारित समय पर पुलिस के समक्ष दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए बाध्य है।

200 करोड़ के दैनिक हिन्दुस्तान विज्ञापन घोटाला के पुलिस अनुसंधानकर्ता सह आरक्षी निरीक्षक, कोतवाली बीरेन्द्र कुमार ने पुलिस अधीक्षक पी. कन्नन के लिखित निर्देश पर डीएवीपी से निम्नलिखित विन्दुओं पर जवाब की मांगा है।

(1) डीएवीपी मुंगेर पुलिस को लिखित जवाब दे कि निदेशालय ने किस आधार पर और किन-किन तिथियों से बिहार के भागलपुर और मुजफ्फरपुर से मुद्रित/प्रकाशित दैनिक हिन्दुस्तान को सरकारी विज्ञापन प्रकाशन हेतु जारी किया?

(2) डीएवीपी मुंगेर पुलिस को लिखित बताए कि वर्ष 2001 में किसी भी समाचार-पत्र में सरकारी विज्ञापनों के प्रकाशन की क्या प्रक्रिया थी? इस संबंध में यदि कोई मार्गदर्शिका उपलब्ध हो तो निदेशालय उसे मुंगेर पुलिस को सुपुर्द करे।

(3) डीएवीपी मुंगेर पुलिस को बताए कि क्या भागलपुर और मुजफ्फरपुर से मुद्रित/प्रकाशित दैनिक हिन्दुस्तान में प्रकाशित होने वाले सरकारी विज्ञापनों के लिए पटना से प्रकाशित होने वाले विज्ञापनों के समानान्तर ही दर का निर्धारण किया गया था या उन दोनों स्थानों के लिए अलग से विज्ञापन दर का निर्धारण किया गया?

(4) भागलपुर और मुंगेर से मुद्रित/प्रकाशित दैनिक हिन्दुस्तान में आरएनआई नम्बर के रूप में जब से ‘आवेदित‘ छापा जाने लगा, दैनिक हिन्दुस्तान के प्रबंधन ने उसके बाद इसकी सूचना भारत सरकार के विज्ञापन एवं दृष्य प्रचार निदेशालय,नई दिल्ली को दिया या नहीं?

नई दिल्ली के डीएवीपी कार्यालय के सूत्रों से मिली सूचना में बताया गया है कि निदेशालय के वरीय अधिकारियों के पसीने मुंगेर पुलिस के प्रश्नों के जवाब देने में छूट रहे हैं। कारण यह है कि दैनिक हिन्दुस्तान प्रबंधन पहले ही लिखित रूप में सूचना एवं जनसम्पर्क निदेशालय, बिहार, पटना को कह चुका है कि उनके भागलपुर और मुजफ्फरपुर संस्करणों को निबंधन प्राप्त नहीं है। मुंगेर पुलिस ने प्रबंधन की यह चिट्ठी अपनी पर्यवेक्षण टिप्पणी में शामिल कर ली है। अखबार स्वयं लिखित रूप में स्वीकार करता है कि उनका भागलपुर और मुजफ्फरपुर संस्करण निबंधित नहीं है। तब प्रश्न उठता है कि डीएवीपी, नई दिल्ली ने किस आधार पर गैर निबंधित दैनिक हिन्दुस्तान को विज्ञापन जारी कर दिया या विज्ञापन दर जारी कर दिया?

डीएवीपी को कानूनी कार्रवाई की चेतावनी : डीएवीपी, नई दिल्ली को मुंगेर पुलिस के द्वारा भेजी नोटिस में यह भी चेतावनी दी गई है कि यदि निदेशालय मुंगेर पुलिस को निर्धारित तिथि तक मांगी गई वांछित सूचनाएं नहीं उपलब्ध कराता है, तो मुंगेर पुलिस भारतीय दंड संहिता की धारा 175 के तहत निदेशालय के संबंधित पदाधिकारी के विरूद्ध कानूनी कार्रवाई शुरू कर देगी। भारतीय दंड विधान की धारा 175 में प्रावधान है कि यदि पुलिस को संबंधित विभाग से मांगा गया दस्तावेज या जानकारी समय पर नहीं मिलती है, तो पुलिस विभाग के संबंधित व्यक्ति के विरूद्ध इस धारा में मुकदमा दर्ज कर सकती है और संबंधित विभागीय व्यक्ति को एक माह की सजा या पांच सौ रुपया का जुर्माना या दोनों सजाएं एक साथ दी जा सकती है।

अभियुक्तगण किसी भी समय गिरफ्तार हो सकते हैं : पटना उच्च न्यायालय के 17 दिसंबर, 12 के ऐतिहासिक आदेश के बाद मुंगेर पुलिस नामजद अभियुक्त (1) श्रीमती शोभना भरतिया, अध्यक्ष,  हिन्दुस्तान मीडिया वेन्चर्स लिमिटेड, नई दिल्ली), (2) अमित चोपड़ा (प्रकाशक एवं मुद्रक, मेसर्स हिन्दुस्तान मीडिया वेन्चर्स लिमिटेड, नई दिल्ली), (3) शशि शेखर (प्रधान संपादक, हिन्दुस्तान, नई दिल्ली), (4) अकु श्रीवास्तव ( पूर्व स्थानीय संपादक, पटना संस्करण, हिन्दुस्तान), (5) बिनोद बंधु (पूर्व स्थानीय संपादक, दैनिक हिन्दुस्तान, भागलपुर संस्करण) को कोतवाली कांड संख्या -445/2011 में किसी भी समय गिरफ्तार कर सकती है। आरक्षी अधीक्षक पी. कन्नन और पुलिस उपाधीक्षक एके पंचालर ने अपनी पर्यवेक्षण-टिप्पणियों में नामजद सभी अभियुक्तों के विरुद्ध लगाए गए सभी आरोपों को ‘सत्य‘ घोषित कर दिया है।

मुंगेर से श्रीकृष्ण प्रसाद की रिपोर्ट. इनसे संपर्क मोबाइल नं. -09470400813 के जरिए किया जा सकता है.


हिंदुस्‍तान के इस विज्ञापन घोटाले के बारे में अधिक जानकारी के लिए क्लिक करें – हिंदुस्‍तान का विज्ञापन घोटाला

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