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लखनऊ

बेईमानी में कौन आगे नेता या अफसर!

 

उत्‍तर प्रदेश में इस समय दौड़ लगी हुई है। अब हर जगह इस बात की चर्चा हो रही है कि बेईमानी में नेता आगे हैं या अफसर। नेताओं के बयान, अफसरों की कार्यशैली और सिस्टम के लाचारापन ने यूपी की तस्वीर बदरंग कर दी है। एक साल पूरे होते-होते अखिलेश सरकार को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। नौकरशाही को लेकर सपा मुखिया मुलायम सिंह समेत तमाम बड़े लोगों के बयान और ध्वस्त होती कानून व्यवस्था ने सपा के मिशन 2014 पर मानो ग्रहण लगा दिया है। 

 

उत्‍तर प्रदेश में इस समय दौड़ लगी हुई है। अब हर जगह इस बात की चर्चा हो रही है कि बेईमानी में नेता आगे हैं या अफसर। नेताओं के बयान, अफसरों की कार्यशैली और सिस्टम के लाचारापन ने यूपी की तस्वीर बदरंग कर दी है। एक साल पूरे होते-होते अखिलेश सरकार को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। नौकरशाही को लेकर सपा मुखिया मुलायम सिंह समेत तमाम बड़े लोगों के बयान और ध्वस्त होती कानून व्यवस्था ने सपा के मिशन 2014 पर मानो ग्रहण लगा दिया है। 
यूपी की पूरी नौकरशाही पिछले लगभग दस दिन से हलकान है। सपा के मुखिया मुलायम सिंह यादव ने नौकर शाही के पेंच कसते हुए कहा कि अफसर सुधरने का नाम ही नहीं ले रहे हैं। उन्होंने यह साफ तौर पर कह दिया कि एक दो जिलों को छोड़कर पूरे प्रदेश के सभी डीएम एसपी बदले जायेंगे। इस बयान के बाद पूरे यूपी की नौकरशाही में हड़कंप मच गया। सभी लोगों ने माना कि एक या दो दिन के भीतर प्रदेश में सफाई अभियान शुरू हो जायेगा। अधिकांश लोगों ने माना कि आईएएस और आईपीएस में प्रमोट हुए अफसरों को ही अब जिले की कमान दी जायेगी। मगर जब हफ्ता बीत गया तो जितने मुंह उतनी बातें शुरू हो गयीं। जब लोगों ने मालूम करना शुरू किया तो सरकार की फजीहत शुरू हो गयी। पता चला कि तबादलों की सूची कई बार बनी और फाड़ दी गयी। सबसे रोचक बात तो पुलिस महकमे की रही। 
 
सूत्रों का कहना है कि एक पुलिस अफसर ने मुख्यमंत्री से मिलकर बता दिया था कि पुलिस महकमे के एक बड़े अफसर और एक वरिष्ठ आईएएस ने दो दर्जन से अधिक जिलों का एडवांस ले लिया था। उन्होंने कुछ अफसरों से स्पीकर फोन पर बात भी सुनवा दी थी। जब मुख्यमंत्री के पास यह सूची पहुंची तो उन अफसरों के नाम उन्हीं जिलों के सामने लिखे थे जिनके बारे में बताया गया था। नाराज मुख्यमंत्री ने यह पूरी सूची फाड़ दी और पुलिस विभाग के इस बड़े अफसर की रवानगी की बात कह दी। मगर एक वरिष्ठ आईएएस अफसर इस बात पर सहमत नहीं हुए कि इन पुलिस अफसर को हटाया जाये। मामला सपा सुप्रीमो तक गया और पूरी सूची लटक गयी। 
 
कुछ ऐसा ही हाल आईएएस अफसरों के साथ भी हुआ। सत्‍ता के विभिन्न केन्‍द्रों ने अपने-अपने मन के अफसरों की सूची मुख्यमंत्री को दे दी। लिहाजा कोई भी सूची फाइनल नहीं हुई। इसका सबसे बड़ा नुकसान यह हुआ कि पिछले एक पखवाड़े से यूपी में अधिकांश जिलों में काम ठप हो गया है। थानों और तहसीलों के प्रभारी इंतजार कर रहे हैं कि कब उनके डीएम और एसपी का तबादला हो और नया अफसर आये। कई जिलों के अफसर परेशान हैं कि एक तारीख बीतने के बाद भी कई विभागों से उनके महीने का पैसा नहीं आया। सरकार की सबसे ज्यादा फजीहत गोंडा में हुई। जहां एसपी नवनीत राणा ने हाल ही में राज्यमंत्री बनाये गये केसी पांडे का ही स्टिंग ऑपरेशन कर लिया, जिसमें वे पशु तस्करी के लिए एसपी को घूस देने की बात कर रहे थे। मजे की बात यह है कि सूबे के मुख्यमंत्री इस स्टिंग को पिछली सरकार के समय हुआ स्टिंग ऑपरेशन बता रहे थे तो दूसरी ओर प्रदेश के अपर पुलिस महानिदेशक कानून व्यवस्था अरूण कुमार दावा कर रहे थे कि यह ऑपरेशन उनके कहने पर ही किया गया है। जब मामला बहुत तूल पकड़ गया तब मंत्री को बर्खास्त करने की जगह एसपी को ही डीजीपी ऑफिस से संबद्ध कर दिया गया। 
 
अफसरों और नेताओं की इस बेईमानी की जंग में कुछ और लोग भी थे जो सरकार की नाक कटाने पर आमादा थे। प्रदेश के खादी एवं ग्रामोद्योग मंत्री राजाराम पांडे ने सार्वजनिक रूप से आयोजित एक कार्यक्रम में महिला सुंदरता को लेकर जो बखान किया उससे प्रदेश में हड़कंप मच गया। मंत्री जी ने कहा कि वह पिछली डीएम कामिनी रतन चौहान को ही बहुत सुंदर मानते थे पर मौजूदा डीएम के धनलक्ष्मी उनसे भी ज्यादा सुंदर हैं। मंत्री जी यहीं पर नहीं रूके और उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने जीवन में इतनी सुंदर महिला नहीं देखी। बेचारी डीएम शर्म से सिर झुकाकर बैठ गयीं। इससे पहले एक और जिले में 

तैनात डीएम ने मुख्यमंत्री से शिकायत की थी कि उनके यहां के विधायक उन्हें लगातार एसएमएस करते हैं और उन्हें शादी तक का प्रस्ताव दे डाला है। खादी ग्रामोद्योग मंत्री के बयान के बाद उनके विभाग के ही राज्य मंत्री रियाज अहमद और सपा विधायक रविदास मलहोत्रा ने मंत्री के बयान की कड़ी आलोचना की है। प्रदेश में इन हालातों को देखकर युवा और ऊर्जावान मुख्यमंत्री हताश हैं। वे चाहकर भी अपनी टीम नहीं बना पा रहे हैं और उनके पिता की टीम पूरी सरकार का बेड़ा गर्क करने में जुटी है।
 
लेखक संजय शर्मा लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार हैं. हिंदी वीकली न्यूजपेपर वीकएंड टाइम्स के संपादक हैं. यह लेख उनके अखबार में प्रकाशित हो चुका है.
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