लखनऊ। रिहाई मंच ने आजमगढ़ के मिर्जा शादाब बेग के घर की कुर्की से संबन्धित समाचार पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि उत्तर प्रदेश सरकार एक तरफ उत्तर प्रदेश की तमाम आतंकवादी घटनाओं में गिरफ्तार किए गए बेगुनाह मुस्लिम नौजवानों को रिहा करने का अफवाह फैलाकर मुसलमानों की वाहवाही लूटने में लगी है तो वहीं दूसरी तरफ अपने अभियोजन अधिकारियों के द्वारा प्रार्थना पत्र दिलवाकर कुछ निर्दोषों के घरों की कुर्की कराने की कसरत कर रही है।
रिहाई मंच के अध्यक्ष एडवोकेट मुहम्मद शुऐब और इंडियन नेशनल लीग के राष्ट्रीय अध्यक्ष मोहम्मद सुलेमान ने जारी बयान में कहा कि जिस तरह से गोरखपुर कैंट पुलिस की अपील पर आजमगढ़ कोतवाली किला रोड निवासी मिर्जा शादाब बेग के घर की कुर्की की खबरें आ रही हैं, उससे सरकार का दोहरा चरित्र उजागर होता है कि एक तरफ वो गोरखपुर समेत कई आंतकवादी घटनाओं के मुकदमे वापस लेकर बेगुनाहों को छोड़ने का झूठा प्रचार करती है तो वहीं दूसरी तरफ इन्ही घटनाओं में लड़कों के घरों की कुर्की करने की बात करती है।
रिहाई मंच के उपाध्यक्ष जैद अहमद फारुकी ने कहा कि गोरखपुर विस्फोट में कचहरी विस्फोटों के आरोपी तारिक कासमी को मास्टर माइंड बताया गया है जबकि तारिक और खालिद के निर्दोष होने का सबूत आरडी निमेष जांच आयोग की रिपोर्ट है। जिसे सरकार जारी नहीं कर रही है। जिसमें बताया गया है कि कैसे इन निर्दोष युवकों को सांप्रदायिक खुफिया एजेंसियों की सांठ-गांठ से एसटीएफ ने पकड़ा और अमानवीय उत्पीड़न से जबरन कचहरी विस्फोट का अपराध स्वीकार करवाया। ऐसे में यह कैसे माना जा सकता है कि तारिक कासमी पर लगाए गए आरोप गोरखपुर में सही हों।
दरअसल, यदि सपा सरकार सचमुच निर्दोष मुसलमानों की गिरफ्तारियों पर चिंतित होती तो पिछली सरकार की तरह गोरखपुर विस्फोट के आरोपियों के गिरफ्तारियों पर आरडी निमेष जांच आयोग की तरह स्वंतत्र जांच आयोग गठित करती न कि अभियोजन पक्ष से आजमगढ़ के मिर्जा शादाब बेग के घर की कुर्की की मांग करवाती। रिहाई मंच के नेताओं ने कहा कि आजमगढ़ के मिर्जा शादाब बेग के घर की कुर्की न करवाकर उसके ऊपर लादे गए फर्जी मुकदमें को वापस कर अपने चुनावी वादे को पूरा करे सपा सरकार। (प्रेस रिलीज)