इलाहाबाद। कुंभनगरी में गंगाजल की गुणवत्ता को लेकर संत-महात्माओं का कोप थमने का नाम नहीं ले रहा है। कुपित महात्माओं ने साफ तौर पर कह दिया है कि मेला में आने वाले नेता बयान में संयम बरतें। खास बात यह है कि मौनी अमावस्या का प्रमुख स्नान पर्व रविवार को है। तीन दिन पहले ही कुंभ मेला में गंगा में साफ जल की मांग शुरू हो गई। यहां तक कि गुरुवार को सैकड़ों संन्यासियों ने गंगापुल पर पहुंचकर इलाहाबाद-वाराणसी मार्ग का रास्ता जाम कर दिया। गुस्साए संत-महात्माओं ने स्नान का भी बहिष्कार किया। उनकी नाराजगी नगर विकास मंत्री आजम खां के उस बयान से ज्यादा बढ़ा जिसमें उन्होंने मीडिया से गंगाजल की गुणवत्ता पर सवाल उठाने को साजिश और दुष्प्रचार करार दे दिया था।
संत-महात्मा गंगा में भूरा-काला रंग के जल को लेकर सवाल उठा रहे हैं। चार दिन पहले सरकार को चेतावनी दी गई थी कि संगम में स्नान करने के लिए स्नानार्थियों को साफ जल नहीं दिया गया तो संत स्नान नहीं करेंगे। इसके दूसरे दिन यानि छह फरवरी को प्रदेश के नगर विकास मंत्री संगम पहुंचे और गंगा में साफ जल न होने के मुद्दे पर मीडिया से कह दिया कि ऐसी मांग करने वाले साजिश और दुष्प्रचार कर रहे हैं। आजम खां के इस बयान ने संत-महात्माओं की नाराजगी को बढ़ाने का कार्य किया।
सात फरवरी को सुबह काशी सुमेरू पीठाधीश्वर नरेंद्रानंद सरस्वती, दंडी स्वामी विमलाश्रम महराज, हरिचैतन्य महराज की अगुवाई में सैकड़ों संत-महात्मा अपने आश्रम से निकले। इन लोगों ने इलाहाबाद-वाराणसी मार्ग के शास्त्री पुल पहुंचकर वहां जाम लगा दिया। करीब ढाई घंटे तक जाम चला। इस दौरान सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई। कमिश्नर देवेश चतुर्वेदी, आईजी आलोक शर्मा, मेला अधिकारी मणि प्रसाद मौके पर पहुंचे। संत-महात्माओं से काफी देर तक मान-मनौव्वल करने के बाद संत-महात्माओं का चक्काजाम खत्म हुआ। मौनी अमावस्या का स्नान प्रमुख स्नान पर्व माना जाता है। इसमें बड़ी तादाद में स्नानार्थियों के आने की उम्मीद की जा रही है। अफसरों की चिंता यह है कि अगर संतों का गुस्सा पूरी तरह शांत न हुआ तो उनकी मुसीबतें बढ़ सकती हैं।
इलाहाबाद से शिवाशंकर पांडेय की रिपोर्ट.