लखनऊ। कुंभ में मौनी अमावस्या के स्नान से ठीक एक दिन पहले अफजल गुरु को फांसी देकर कांग्रेस ने जो राजनैतिक संदेश दिया है उसका अर्थ साफ़ है। यह भगवा ब्रिगेड की कुम्भ की राजनीति का जवाब भी है और चुनाव की आहट भी, जिस तरफ मुलायम सिंह यादव इशारा कर रहे हैं। इलाहाबाद में विश्व के सबसे बड़े आध्यात्मिक समागम में सबसे ज्यादा लोग रविवार को ही मौजूद रहेंगे, जिनमें से आधे से ज्यदा पहुँच भी चुके हैं। विश्व हिन्दू परिषद ने इस मौके का राजनैतिक फायदा उठाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है और इलाहबाद में संगम की और जाने वाले रास्ते पर हिन्दुओं को जगाने वाले तरह तरह के पोस्टर लगे हुए हैं।
यहाँ हिंदू ,हिंदुत्व और मोदी के नारे भी लग चुके हैं। पर शनिवार को जो हुआ उससे लोगों को भगवा ब्रिगेड से ज्यादा गहरा रंग कांग्रेस के हिंदुत्व का नजर आया। राहुल गाँधी ने कांग्रेस की कमान संभाल ली है और अब जो कुछ भी सरकार और पार्टी करेगी उसका श्रेय उन्हें ही जाएगा। दो दिन से वे अपने क्षेत्र में ही जमे थे। राहुल गाँधी अपने राजनैतिक एजंडा के तहत आए थे और अखिलेश सरकार को निशाने पर रखा। पर बाकी बहुत से राज्यों में उन्हें भाजपा से निपटना है। वह भाजपा जो आजकल इलाहाबाद के कुंभ का राजनैतिक लाभ लेने के लिए आए दिन कोई न कोई शगूफा छोड़ रही थी। धर्म संसद से लेकर मंदिर निर्माण तक। विश्व हिन्दू परिषद के अशोक सिंघल भले यह कहे कि नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने का धर्म संसद से कोई वास्ता नहीं, पर होता सब वही है जो पहले से तय होता है। पर अफजल गुरु की फांसी से माहौल बदला है। इसका क्या राजनैतिक असर होगा यह कल्याण सिंह की टिपण्णी से समझा जा सकता है। मंदिर आंदोलन के नायक माने जाने वाले कल्याण सिंह ने कहा -देर से उठाया गया सही फैसला पर इसका कोई फायदा कांग्रेस को नहीं मिलेगा।
पर यह सब मानते हैं कि कांग्रेस ने पहले कसाब और फिर अफजल गुरु को फांसी देकर भाजपा के हिंदुत्व के हथियार की धार भोथरी कर दी है। उत्तर प्रदेश में तो भाजपा और कांग्रेस दोनों मुख्य राजनैतिक मुकाबले से बाहर हैं, पर जिन राज्यों में कांटे का मुकाबला है वहां कांग्रेस को इसका ज्यादा लाभ मिल सकता है। राजस्थान से लेकर छत्तीसगढ़ जैसे राज्य उदाहरण हैं। गौरतलब है कि दो दिन पहले ही दिल्ली से लेकर इलाहबाद के कुम्भ तक में नरेंद्र मोदी छाए हुए थे और जगह जगह से उन्हें प्रधानमंत्री बनाए जाने की मांग भी उठ रही थी। उनके उस भाषण की भी चर्चा जिसमें उन्होंने गुजरात की भिंडी से लेकर टमाटर तक की मार्केटिंग कर तालियाँ बटोरी थी। सोशल मीडिया तो उन्हें महीनों से प्रधानमंत्री बना रहा है इसलिए चर्चा में वे बने रहे। पर आज नजारा बदला हुआ था। भाजपा के नेता ने भी माना कि राहुल गाँधी अब हिंदुत्व का खेल बिगड़ रहे हैं और पार्टी को वह फायदा नहीं होगा जो अनुमान था।
पर जानकारी के मुताबिक कांग्रेस हिंदुत्व के बाद आर्थिक मोर्चे पर भी लोक लुभावन फैसले कर चुनाव की राह आसन करेगी। समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव इसका संकेत दे चुके हैं। इसलिए राजनैतिक दल कांग्रेस के नए उपाध्यक्ष राहुल गाँधी की भावी रणनीति को लेकर भी कम आशंकित नहीं हैं। आज जहां ज्यादातर राजनैतिक दल अफजल गुरु की फांसी पर सरकार का समर्थन करने पर मजबूर रहे वही भाकपा माले ने इसका खुलकर विरोध किया और इसे कट्टर हिन्दुत्ववादी ताकतों के निर्लज्ज तुष्टीकरण भी बताया। भाकपा माले ने आज कहा -सरकार का यह कदम कट्टर हिन्दुत्ववादी ताकतों के निर्लज्ज तुष्टीकरण का स्पष्ट प्रमाण है। संघ परिवार और उसके राजनीतिक मुखौटे भाजपा की लम्बे समय से यह एक मुख्य मांग रही है। अफजल गुरु को फांसी कांग्रेस ने देकर आगामी लोकसभा चुनाव के लिए अपनी तैयारी करते हुए इस मामले में भाजपा से बढ़त बनाने का प्रयास किया है।
रिजवान मुस्तफा की रिपोर्ट.